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MP officers Transfer News- तबादलों की नहीं बढ़ पाई अभी तारीख

- अब तबादलों की तारीखों पर नए सिरे से विचार होना भी संभावित

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भोपाल। प्रदेश में सरकारी विभागों में तबादलों की डेडलाइन 5 अक्टूबर को खत्म हो चुकी है। इसके चलते अब फिलहाल तबादलों पर रोक लागू हो गई है, जबकि गुरुवार को भी बैकडेट में तबादलों के आदेश जारी होते रहे। इस बीच सरकार के स्तर पर तबादलों की अंतिम तारीख 10 अक्टूबर तक बढ़ाने पर विचार हो रहा है, लेकिन अब तक आदेश नहीं निकल सका है।

इसके चलते अब तबादलों की तारीखों पर नए सिरे से विचार होना भी संभावित है, क्योंकि 7 अक्टूबर की स्थिति में यदि 10 अक्टूबर तक तारीख बढ़ती है, तब भी सिर्फ तीन दिन ही मिलेंगे। जबकि मंत्री पांच से दस दिन की मोहलत और चाहते हैं।

दरअसल, इस बार तबादलों पर प्रतिबंध 17 सितंबर से 5 अक्टूबर तक के लिए हटाया गया था, लेकिन इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों के चलते अधिकतर मंत्री व्यस्त रहे। इसके अलावा अधिकारियों की भी इन्हीं कार्यक्रमों से व्यस्तता रही। उस पर अधिकतर मंत्री भोपाल में कम ही रुके हैं। इस कारण बेहद कम तबादले हो पाए थे।

इसी कारण 5 अक्टूबर को डेडलाइन खत्म होने के बाद भी गुरुवार को बैकडेट में तीन से चार विभागों की तबादला सूचियां जारी हुईं। स्कूल शिक्षा विभाग ने जरूर 10 अक्टूबर तक तबादलों के लिए आवेदन आवेदन बुलाए हैं, लेकिन बाकी विभागों को सामान्य प्रशासन विभाग से तबादला तारीख बढऩे के आदेश का इंतजार है।

इससे पहले जनसेवा अभियान सहित अन्य व्यस्तताओं के कारण विभागीय मंत्रियों को तबादलों के लिए समय ही नहीं मिला। इसके अलावा कुछ मंत्रियों की अफसरों से पटरी नहीं बैठ रही, जिसके कारण तबादले अटके रह गए। मंत्रियों के बंगलों के चक्कर काट-काटकर कर्मचारी व उनके परिजन भी काफी परेशान हुए, क्योंकि अधिकतर मंत्री भोपाल में कम ही रुके हैं। इस कारण अब तबादलों की डेडलाइन खत्म होने के बाद बैकडेट या तारीख बढ़ाने का विकल्प ही बचता है।

इस दौरान अधिकतर मंत्री भोपाल में कम ही रुके। तबादलों के लिए तय समय में जो मंत्री भोपाल में ज्यादा रहे, उनमें नरोत्तम मिश्रा, विश्वास सारंग, भूपेंद्र सिंह, कमल पटेल, प्रभुराम चौधरी आदि हैं। जबकि अधिकतर मंत्री आते-जाते रहे। वहीं कुछ मंत्री तो लगभग गायब ही रहे।

ज्यादा दिक्कतें यहां
सबसे ज्यादा दिक्कत बड़े विभागों में हैं, क्योंकि यहां के कर्मचारी तबादलों के लिए चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन मंत्रियों से मुलाकात तक नहीं हो पाई। बड़े विभागों में स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, ग्रामीण विकास, बिजली और नगरीय प्रशासन जैसे विभाग हैं।