
पेटलावद में सीमेंट की सड़कें कीचड़ में तब्दील
भोपाल. अस्पतालों के हड्डी रोग विभाग में हर रोज सड़कों से पीडित मरीजों की लंबी कतारे मिल रही हैं। बीते तीन माह की बात करें तो हड्डी रोग विभाग की ओपीडी में 30 फीसदी का इजाफा हुआ है। यहां आने वाला हर तीसरा मरीज गड्ढों के कारण परेशान है। मरीजों में स्लिप disk के साथ ज्वांइट पेन के मरीज सबसे ज्यादा हैं।
जेपी अस्पताल के अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. केके देवपुजारी बताते हैं लगातार झटकों से स्लिप disk की दिक्कत ज्यादा होती है। रीढ़ की हड्डी हमारा फस्टज़् लाइन डिफेंस सिस्टम है। बाइक पर बैठने से पूरे शरीर का वजन इस परहोता है। ऐसे में अगर लगातार झटके लगते हैं तो रीड़ की disk अपने स्थान से खिसक जाती है। इन दिनों ओपीडी में हर रोज ऐसे दो से तीन मरीज आ रहे हैं। इसके अलावा हेड इंजुरी, शोल्डर शॉक्स या घुटनों का ददज़् भी इससे हो सकता है। खिसक सकता है आंखों का पदाज़् सड़कों के गढ्ढों से सिफज़् हड्डी ही नहीं आंखों पर भी असर होता है।
एम्स की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. भावना शमाज़् बताती हैं कि मायोपिया से पीडि़त मरीजों को लगातार झटके गंभीर परेशानी में डाल सकते हैं। इससे आंखों का पदाज़् जो बाहर से आने वाली रोशनी को नियंत्रित करता है वो खिसक सकता है।
केस एक
शाहपुरा के रहने वाले राकेश लाल की हमीदिया अस्पताल के पास दुकान है। घर से दुकान करीब छह किमी दूर है। बारिश में पूरे सड़क में गड्ढे हो गए। राकेश लाल बाइक से ही दुकान जाते हैं लेकिन बीते तीन महीने से लगातार गड्ढों में बाइक चलाने से उनकी पीठ में ददज़् होने लगा। ददज़् जब असहनीय हुआ तो अस्पताल में जांच में पता चला कि लगातार झटकों के चलते उन्हें रीढ़ की हड्डी में सूजन आ गई है।
केस दो
अशोका गार्डन निवासी नितेश परमार ऑनकॉल रिपेरिंग का काम करते हैं। इसके लिए उन्हें रोज शहर के अलग अलग क्षेत्रों में जाना पड़ता है। लेकिन बीते तीन महीने में उन्हें लगातार चक्कर आने लगे। डॉक्टर को दिखाया तो बताया कि सड़कों पर गड्ढों में झटके लगने से रीढ़ की हड्डी से कोई नस दब रही है, इससे चक्कर आ रहे हैं। अगर समय पर उपचार नहीं किया जाता तो लकवे की शिकायत भी हो जाती।
Updated on:
31 Oct 2019 11:05 am
Published on:
31 Oct 2019 11:05 am
