6 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

घर की दहलीज से राष्ट्रपति भवन तक का सफर… 67 वर्ष की उम्र में सूखी लौकी पर कलर करना सीखा, दस साल में ही पाया पद्मश्री

84 वर्ष की उम्र में दो बार आंखों का ऑपरेशन, अब नई पीढ़ी को सीखा रहीं चित्रकला  

less than 1 minute read
Google source verification
jodhiya_bai.jpg

भोपाल। उमरिया जिले के एक छोटे से गांव में रहती हूं, कभी सोचा नहीं था कि मुझे चित्रकला सीखनी है। पति की मौत के बाद 2008 में आर्थिक स्थिति खराब हुई तो लकडि़यां और गोबर बेचती थी।चाचा ने कहा कि मेरे घर आकर काम करने लगो। तब मैं उनके घर में गोबर लीपकर उसमें सुंदर आकृतियां बनाती थीं। मेरे चाचा ने सूखी लौकी पर कलर करना सीखाया। बाद में लकड़ी पर अपनी कला को उभारा। जब कागज पर चित्रकारी करने को कहा तब मैंने हैंडमेड पेपर और कैनवास पर चित्रकारी करनी शुरू की।

ये कहना था 84 वर्षीय पद्मश्री जोधइया बाई का, वे जनजातीय संग्रहालय में चल रहे चित्रांकन शिविर में शामिल होने के लिए आई हैं। उन्होंने बताया कि 67 वर्ष की उम्र में मैंने कला सीखना शुरू किया। मैंने तो कभी दिल्ली देखा भी नहीं था। पद्मश्री लेते समय जब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात हुई तो उनसे घर को पक्का कराने की मांग की थी।

इटली-फ्रांस की आर्ट गैलेरी में मेरी कृतियां

जोधइया बाई ने बताया कि मैं पेरिस और मिलान जैसे शहरों में पेंटिंग कर चुकी हूं। इटली, फ्रांस, जापान, इंग्लैंड से लेकर अमेरिका तक की आर्ट गैलरियों में मेरी कलाकृतियों को देख सकते हैं। 2022 में महिला दिवस के अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मुझे नारी शक्ति सम्मान से सम्मानित किया था। उन्होंने बताया कि जनजातीय संग्रहालय की दीवार को 10 साल पहले बैगा चित्रकारी से सजाया था। अब उसके रंग फीके पड़ गए हैं। उसी चित्र के जीर्णोद्वार के लिए मैं यहां आई हूं। यह मेरे लिए गौरव की बात है कि मुझे अभी भी लोग इतना सम्मान दे रहे हैं।