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अगर आपके घर में भी हैं कामकाजी महिलाएं तो जरूर पढ़ें ये खबर

अगर आपके घर में भी हैं कामकाजी महिलाएं तो जरूर पढ़ें ये खबर

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भोपाल। कामकाजी महिला की दोहरी जिम्मेदारियां होती हैं। वह दो मोर्चों पर अपने काम को अंजाम देती है। एक तरफ जहां घर-परिवार की जिम्मेदारी बखूबी निभाती है, वहीं ऑफिस के काम में भी पीछे नहीं रहती। शहर की काउंसलर शबनम खान बताती है कि आज भी वर्किंग वुमन को लेकर नकारात्मक सोच और भ्रांतियां समाज में देखने को मिलती हैं। वर्किंग वुमन को लेकर यह भी अवधारणा है कि वे अपने घर के खर्चों और अन्य जरूरतों के चलते ही नौकरी आदि करती है। सच्चाई यही नहीं है। अपनी काबिलियत और कुशलता के बेहतर इस्तेमाल के लिए वे अपना अच्छा कॅरियर चुनती हैं। माना पैसा उनकी जरूरत हो सकता है लेकिन बेहतर मुकाम हासिल करना भी उनका मकसद रहता है।

काम में कमी

यह एक गलत अवधारणा है कि वर्किंग वुमन ऑफिस या फिर घर से जुड़ा काम बेहतर नहीं कर पाती। जबकि शादी के बाद वर्किंग वुमन अधिक कुशलता के साथ अपने काम को अंजाम देती है। अधिक जिम्मेदारी से वे अधिक कुशल बनती हैं।

मां बनने पर

यह भी भ्रांति है कि मां बनने के बाद कामकाजी महिला का काम कमजोर रहता है। जबकि ऐसे में भी कामकाजी महिला दोनों जिम्मेदारियों के बीच बेहतर संतुलन बनाती हैं। वे खुशी वाले विभिन्न मौकों का इंतजार करती है और घर-परिवार या दोस्तों के साथ इसका पूरा लुत्फ उठाती है।

कम समय देती है

यह भी सच नहीं है कि पहले की मांओं की तुलना में वर्किंग मदर बच्चों को कम वक्त देती है। वर्किंग वुमन अधिक कुशलता के साथ अपने बच्चों को समय देती है। वह इस समय का बेहतर इस्तेमाल भी जानती है।

पुरुषों से पीछे

समाज में यह भी एक गलत अवधारणा है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में कम काम करती हैं। जब हम पुरुषों और वर्किंग वुमन के पूरे काम का अंकन करेंगे तो पाएंगे कि महिलाओं का काम पुरुषों की तुलना में कहीं भी कमजोर या कम नहीं है।

कार्यकारी अधिकारी

किसी कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में महिला को स्वीकारा नहीं जाता। कहा जाता है वे भावुक होती हैं और कंपनी के फैसले भावना से नहीं, बल्कि बिजनेस के हिसाब से लिए जाते हैं। ऐसे में महिलाओं के साथ भेदभाव होता है।

शादी को खतरा

लोगों के बीच यह भी सोच बनी हुई है कि महिलाओं के वर्किंग होने से शादी खतरा रहता है। इस तरह के रिश्ते अधिक नहीं चल पाते। यह भी एक गलत अवधारणा ही है। एक अध्ययन ने यह साबित किया है कि साझा काम करने वाले और परिवार की जिम्मेदारियों को साझा कर निभाने वाले दंपतियों के परिवार में खुशहाली देखने को मिलती है। वे खुशहाल जिंदगी जीते हैं।