
बहन की तरह हर लड़की का करें सम्मान और रक्षा
भोपाल। रक्षाबंधन पर भाई अपनी बहनों को रक्षा का वचन हर साल देते हैं। वे सिर्फ वचन ही नहीं देते, बल्कि मौका आने पर उसे निभाने के लिए तत्पर भी रहते हैं। पर समाज की एक सच्चाई यह भी है कि हर दिन किसी न किसी की बहन के साथ छोटी-बड़ी घटना होती है। इसका एक कारण यह भी है कि बहन से नजर हटते ही जब पुरुष अन्य महिला या लड़की की तरफ देखता है तो उसका नजरिया वैसा नहीं होता जैसा बहनों के प्रति होता है। यह बात व्यवहार में भी नजर आती है। इसी कारण शहर की कुछ बहनें भाइयों से अन्य लड़कियों के प्रति वैसा ही व्यवहार करने का वचन ले रही हैं जैसा वे बहन के साथ करते हैं।
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सभी पुरुष वर्ग को यह शपथ लेना चाहिए कि वो महिलाओं एवं लड़कियों की रक्षा करें, उनको मौका नहीं अपनी जिम्मेदारी समझें। समाज में फैल रही दुष्कर्म जैसी घटनाओं को समाज में बढऩे से रोकें, महिलाओं और लड़कियों की रक्षा अपनी जिम्मेदारी समझें। तभी महिलाओं और लड़कियों पर होने वाले अपराधों से मुक्ति मिल पाएगी।
मधुबाला पोरवाल
समाज में आज महिलाओं पर अपराध काफी बढ़ गए है, खासकर छोटी बच्चिों को भी शिकार बनाया जा रहा है। मैं अपने भाई को कहूंगी कि जिस तरह वो घर में बहनों और मां से व्यवहार करते हैं वैसे ही बाहर अन्य महिलाओं की भी इज्जत करें, ऐसा काम न करें कि उनके आत्म विश्वास को ठेंस पहुंचे। मैं लड़कों के लिए यहीं कहूंगीं कि कल आपकी भी शादी होगी और आप भी परिवार वाले होंगे, इसलिए कोई भी गलत काम करने से पहले दस बार सोचें।
अन्विता बागड़े
जिस प्रकार हम अपने परिवार में बहनों और मां की रक्षा और उनकी परेशानियों को समझते हैं वैसे ही लड़कों और पुरुषों को अपने आस-पास महिलाओं और लड़कियों की रक्षा करना चाहिए। उनके खिलाफ हो रहे अत्याचारों से मुहं मोडऩे की अपेक्षा उन्हें उनकी रक्षा करना चाहिए। मैं अपने भाई को यही कहूंगीं कि जैसे वो हमारी रक्षा करते हैं वैसे भी दूसरी लड़कियों की रक्षा और सम्मान करने से पीछे नहीं हटें।
वर्षा पटेल
हर लड़की है किसी घर की अमानत
रास्ते खड़े होकर लड़कियों को घूरना, कॉलेज के बाद पीछा करना, सोशल मीडिया पर कमेंट्स करना जैसे कई काम लड़के अक्सर करते हैं। इस रक्षाबंधन पर मैं भाई को शपथ दिलाऊंगी कि वह ऐसी किसी भी गतिविधि में न तो शामिल होगा, बल्कि इसे रोकेगा भी।
हर्षा हासवानी
नज्म
डॉ. सुधीर आजाद
बहनें कैसे समझ जाती हैं, समझ नहीं आता!
ममता, लाड़, मुहब्बत से, मम्मी की हैरानी को
गुस्सा, डांट, नाराजी से, पापा की परेशानी को
मीठी बात, गुजारिश से, भाई की शैतानी को
बहनें कैसे समझ जाती हैं, समझ नहीं आता!
भाई देर से लौटे, उसे कितना धमकाना है
मम्मी-पापा के गुस्से से किस हद तक बचाना है
कितनी ताकत देनी है और कितना डराना है
बहनें कैसे समझ जाती हैं, समझ नहीं आता!
हर रस्म उसी की है, और उसको निभाना है
एक घर को बना के घर, फिर दूजे घर को जाना है
हर एक रिश्ते के खातिर, कई रूप बनाना है।
बहनें कैसे समझ जाती हैं, समझ नहीं आता!
Published on:
26 Aug 2018 01:37 pm
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