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Lok sabha Election 2024 : जब मुंबई में बिगड़ गए थे सिंधिया, सुधारने के लिए घरवालों ने उठाया कड़ा कदम

Lok sabha Election 2024 : Jyotiraditya Scindia School Stoty- सिंधिया पिछली बार कांग्रेस प्रत्याशी थे और बीजेपी के प्रत्याशी से एक लाख से ज्यादा वोटों से हार गए थे। यही कारण है कि इस बार वे गांव-गांव, घर-घर जा रहे हैं। सभाओं में कई मजेदार बातें भी बता रहे हैं।

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अशोकनगर में बचपन की एक मजेदार दास्तान सुनाई

Lok sabha Election 2024 : Jyotiraditya Scindia School Stoty - एमपी की गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच दिलचस्प चुनावी लड़ाई हो रही है। यहां केंद्रीय मंत्री बीजेपी प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। सिंधिया पिछली बार कांग्रेस प्रत्याशी थे और बीजेपी के प्रत्याशी से एक लाख से ज्यादा वोटों से हार गए थे। यही कारण है कि इस बार वे गांव-गांव, घर-घर जा रहे हैं। सभाओं में कई मजेदार बातें भी बता रहे हैं। अशोकनगर में उन्होंने अपने बचपन की ऐसी ही एक मजेदार दास्तान सुनाई।

यहां सिख समाज का सम्मेलन हुआ जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सिखों की तरह पगड़ी पहनी और उनसे अपना दिल का रिश्ता बताया। सिंधिया ने यहां बताया कि उन्हें बोर्डिंग स्कूल क्यों भेजा गया और वहां किस राजकुमार को उन्हें सुधारने का जिम्मा सौंपा गया।

ज्योतिरादित्य सिंधिया इस बार बीजेपी के टिकट पर गुना से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। यहां के अशोकनगर में सिख सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें सिंधिया भी पहुंचे। ज्योतिरादित्य ने कहा कि मैं यहां वोट मांगने नहीं आया बल्कि सिखों से अपना दिल का रिश्ता बताने आया हूं। उन्होंने देश की रक्षा और विकास में सिखों के योगदान की भी चर्चा की।

सम्मेलन में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने बचपन का रोचक किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि कैसे वे मुंबई में बिगड़ गए और उन्हें सुधारने के लिए घरवालों ने कड़ा कदम उठाया। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि उन्हें स्कूली पढ़ाई के लिए मुंबई भेजा गया था पर मेरी कुछ आदतें घरवालों को रास नहीं आईं। उन्हें लगा कि यह बिगड़ गया तो मुझे सुधारने के लिए बोर्डिंग स्कूल में डाल दिया।

जब मैं बोर्डिंग स्कूल गया तो 7 वीं क्लास में था। मुझे सुधारने का जिम्मा 11वीं क्लास के जिस स्टूडेंट को दिया गया वे थे पटियाला के टिक्का रजिंदर सिंह या पटियाला महाराज के बेटे। पटियाले के राजकुमार दिनभर मेरी ड्यूटी बजाते थे।

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