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नए लोकायुक्त जस्टिस एनके गुप्ता ने पदभार संभाला-देखें वीडियो

बुधवार को ली थी पद व गोपनीयता की शपथ। वहीं सोमवार को पूछे गए अधिकांश सवालों का जवाब उन्होंने नो कमेंट कहते हुए टाल दिया।

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भोपाल। एमपी के नए लोकायुक्त जस्टिस एनके गुप्ता ने सोमवार को पदभार ग्रहण कर लिया। इस दौरान जहां उन्होंने पत्रकारों के प्रश्नों को भी सुना वहीं पुछे गए अधिकांश का जवाब उन्होंने नो कमेंट कहते हुए टाल दिया। वहीं एक जगह उन्होंने दोषियों पर कड़ाई के मामले में उन्होंने दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा यह कहते हुए अपनी बात खत्म की।

दरअसल पिछले बुधवार को प्रदेश के नवनियुक्त लोकायुक्त जस्टिस एनके गुप्ता ने राजभवन में आयोजित समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण कर ली। राज्यपाल ओपी कोहली ने उन्हें शपथ दिलाई। कार्यक्रम में उप लोकायुक्त यूसी माहेश्वरी की गैर मौजूदगी चर्चा का विषय रही।

शपथ समारोह के बाद जस्टिस गुप्ता ने मीडिया से बातचीत का आग्रह ठुकरा दिया। पत्रकारों के जोर देने पर वह बोले कि सोमवार को दोपहर में चर्चा करेंगे। शपथ समारोह का संचालन मुख्य सचिव बीपी सिंह ने किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा सहित मंत्री उमाशंकर गुप्ता, रामपाल सिंह एवं विश्वास सारंग भी मौजूद थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और अधिकारी मौजूद थे।

जबकि इससे पहले उनकी नियुक्ति से कांग्रेस में हड़कंप की स्थिति बन गई थी, क्योंकि मध्यप्रदेश में आधी रात को सरकार ने चुपके से नए लोकायुक्त की नियुक्ति कर दी गई। जिसके बाद पूरे प्रदेश में बखेड़ा खड़ा हो गया। कांग्रेस के भीतर से लेकर लोकायुक्त के भीतर तक हंगामा खड़ा हो गया है।

नए लोकायुक्त की नियुक्ति से जहां उप लोकायुक्त यूसी महेश्वरी नाराज हो गए हैं, वहीं अंदरखाने चर्चा रही कि उप लोकायुक्त की सक्रियता से घबराकर सरकार ने नए लोकायुक्त की नियुक्ति की है।

दरअसल, सरकार ने पिछले दिनों रात में चुपके से एनके गुप्ता को नया लोकायुक्त नियुक्ति किया था। महत्वपूर्ण यह है कि लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए तय कमेटी में मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस होते हैं। अचानक से आधी रात में नियुक्ति ने सरकार को ही घेरे में लाकर खड़ा कर दिया

कांग्रेस के भीतर भी शुरू हुआ बखेड़ा
कांग्रेस के भीतर भी एक नया बखेड़ा शुरू हो गया है। कांग्रेस के नेताओं का मानना था कि नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह मिलाजुला खेल खेल रहे हैं। वह एक तरफ तो सरकार का विरोध कर रहे हैं और दूसरी तरफ सरकार के हर बड़े फैसले में चुपके से सहमति दे रहे हैं। चाहे फिर मानवाधिकार आयोग में सरबजीत सिंह की नियुक्ति का मामला हो या फिर लोकायुक्त की नियुक्ति का। अपने नेता प्रतिपक्ष की वजह से कांग्रेस खुद सवालों के घेरे में आ गई है।

जिसके बाद कांग्रेस के कई दिग्गल नेताओं ने भी नेता प्रतिपक्ष पर सवालों के कई बाण चलाए, वहीं नेता प्रतिपक्ष ने यह कह कर सारा मामला सरकार की ओर ही उल्ट दिया था कि एक ही नाम आया था।

वहीं लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट में केस लड़ रहे अजय दुबे ने भी इस पर चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर ऐसी क्या वजह रही जो रात के अंधेरे में जाकर नेता प्रतिपक्ष को इसके लिए सहमति देनी पड़ी। लोगों के बढ़ते विरोध के बीच नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मामले को बैलेंस करने की कोशिश शुरू कर दी है। उन्होंने नए लोकायुक्त की क्षमता पर सवाल उठाए हैं। खुद कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने टवीट पर सवाल किया था कि आखिर नेता प्रतिपक्ष ने इसके लिए सहमति क्यों दी? कहीं न कहीं लोकायुक्त की नियुक्ति ने कांग्रेस के भीतर भी घमासान तेज कर दिया है।

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