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IAS रमेश थेटे पर 24 प्रकरण, किसी पर शासन ने नहीं दी अभियोजन की स्वीकृति

उज्जैन में पदस्थ रहने के दौरान लोकायुक्त ने दर्ज किए थे मामले

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MP Lokayukt

IAS रमेश थेटे पर 24 प्रकरण, किसी पर शासन ने नहीं दी अभियोजन की स्वीकृति

राधेश्याम दांगी, भोपाल. आईएएस अफसर रमेश एस. थेटे और वर्तमान में सचिव, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्प संख्यक कल्याण विभाग के खिलाफ लोकायुक्त संगठन में 24 प्रकरण चल रहे हैं। 22 प्रकरण 2013 के और 2 2014 के हैं।

लोकायुक्त संगठन ने अधिकतर प्रकरणों में जांच पूरी कर ली हैं और प्रकरणों में चालान पेश करने के लिए शासन से अभियोजन की स्वीकृति मांगी, लेकिन शासन ने किसी भी प्रकरण में अब तक स्वीकृतियां नहीं दी है। अधिकतर प्रकरणों में अभियोजन की स्वीकृतियों के लिए शासन के पास तीन महीने से अधिक समय से प्रकरण लंबित पड़े हैं।

इस पर लोकायुक्त संगठन ने गंभीर आपत्ति भी ली और शासन को इस बारे में लिखा भी हैं, लेकिन शासन स्तर से कोई जवाब नहीं मिला। इस मामले में लोकायुक्त संगठन ने यह तक पत्र लिखा कि शासन भ्रष्टाचारियों को बचाने का प्रयास बंद करें। दिलचस्प बात यह है कि सभी 24 प्रकरणों में से अधिकतर में रमेश थेटे के साथ तीन-चार आरोपी समान रूप से आरोपी है।

यह तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी हैं, लेकिन शासन ने थेटे की स्वीकृतियां नहीं दी इसलिए इन पर भी कार्रवाई नहीं हो रही है। अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, पीसी मीणा से बात की तो उन्होंने इस प्रकरण की जानकारी नहीं होने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह प्रकरण मेरी जानकारी में नहीं है।

एक साल, समान आरोपी फिर भी 22 केस

रमेश थेटे के मामले में सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह सभी प्रकरण जब थेटे उज्जैन संभाग में अपर आयुक्त के पद पर पदस्थ थे तब लोकायुक्त ने दर्ज किए थे। वर्ष 2013 में 22 केस दर्ज किए थे। इनमें थेटे के साथ वहां के तत्कालीन अतिरिक्त तहसीलदार धर्मराज प्रधान, अतिरिक्त तहसीलदार, नित्यानंद पांडे तहसीलदार,

आदित्य शर्मा, शंकरलाल करोठ, मनोज शर्मा, आदर्श जामगढ़े, राजेंद्र सोलंकी, मनोज तिवारी (सभी पटवारी) और कृष्ण कुमार सिंह आरआई आरोपी हैं। शेष दो अन्य प्रकरण में भी आरोपी समान है, जो 2014 में दर्ज किए गए थे। जानकारों का कहना है कि समान आरोपी और एक ही समय अवधि के प्रकरण होने के बावजूद भी अलग प्रकरण दर्ज करना और अब अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलना कई सवाल खड़े करते हैं।

जिन-जिन मामलों में तीन महीने से अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिली, उनको लेकर हमने शासन को लिखा है। रमेश थेटे के मामले में भी स्वीकृति नहीं आई है। शासन से हम लगातार पत्राचार कर रहे हैं।
- राजेंद्र सिंह, सचिव, लोकायुक्त संगठन

मेरे पक्ष में हाईकोर्ट ने आदेश पारित कर दिया है। मैंने इस बारे में शासन को भी अवगत करवाया, लेकिन लोकायुक्त चिट्ठियां लिख रहा है। इन मामलों को क्वेश करवाने के लिए कोर्ट जाना पड़ा तो वह भी करूंगा।
- रमेश थेटे, सचिव अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विभाग

इधर, थेटे पहुंचे कोर्ट फिर भी मांग रहे स्वीकृतियां

दरअसल, जब थेटे अपर आयुक्त, राजस्व उज्जैन थे तो उन्होंने अपर आयुक्त की कोर्ट की हेसियत से जमीन के मामलों में आदेश पारित किए थे। इन्हें शासन ने गलत बताया था। इसके बाद शासन भी इन मामलों के खिलाफ कोर्ट पहुंचा, तो जिन लोगों के पक्ष में थेटे ने आदेश पारित किए थे, वे भी हाई कोर्ट पहुंच गए।

हाई कोर्ट ने सभी लोगों के आदेशों को सही बताया। इसके आधार पर थेटे भी हाई कोर्ट पहुंच गए। हाई कोर्ट ने भी थेटे के पक्ष में आदेश जारी कर दिया और बतौर अपर आयुक्त की न्यायालय से जारी आदेशों को हाई कोर्ट ने सही ठहराया। थेटे ने इसकी जानकारी शासन को भी दे दी, लेकिन अब तक लोकायुक्त संगठन इन मामलों में अभियोजन की स्वीकृतियां ही मांग रहा है।