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मुख्य आरोपी के खिलाफ नहीं दर्ज हुई FIR, योगीराज शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज

10 साल की जांच के बाद मुख्य आरोपी का नाम हटाकर स्टोर कीपर जैसों को बनाया आरोपी  

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एफआइआर

भोपाल . स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों रुपए के घोटाले के मुख्य आरोपियों की 10 साल तक जांच करने के बाद भी लोकायुक्त संगठन एवं लोकायुक्त पुलिस ने मुख्य आरोपी पर एफआईआर दर्ज ही नहीं की। तत्कालीन स्वास्थ्य संचालक योगीराज शर्मा पर लोकायुक्त पुलिस ने केस दायर कर लिया। लेकिन घोटाले में मुख्य भूमिका निभाने वाले तत्कालीन स्वास्थ्य संचालक अशोक शर्मा को एफआईआर से बाहर कर दिया।

चौंकाने वाली बात तो यह है कि तत्कालीन विधायक कल्पना परुलेकर (शिकायतकर्ता) ने अशोक शर्मा, योगीराज शर्मा, तत्कालीन प्रमुख सचिव स्वास्थ्य, अपर संचालक स्वास्थ्य के भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। लोकायुक्त संगठन ने जांच में इसे सही भी पाया, लेकिन एफआईआर में अशोक शर्मा का नाम ही गायब है।

आरोपियों की संख्या बढ़ाने के लिए लोकायुक्त ने तीन अन्य ऐसे अरोपियों बसंत शैल्के तत्कालीन स्टरो कीपर, मंजू चतुर्वेदी जिला विस्तार एवं साधन अधिकारी और लेखापाल सतीश सक्सेना के खिलाफ केस दायर किया हैं, जिन पर विभागीय जांच व कार्रवाई की जा चुकी है। हालांकि घोटाले में यह भी आरोपी हैं, क्रय सामग्री का प्रस्ताव बनाने व क्रय आदेश देने वाले अशोक शर्मा को छोड़ दिया गया है। इस मामले की संजय जैन द्वारा विवेचना की जा रही है।

लोकायुक्त एसपी इरमीन शाह का कहना है कि मामला दर्ज कर लिया गया है। योगीराज शर्मा सहित चार लोगों को आरोपी बनाया गया है। शेष विवेचना चल रही है।

शिकायतकर्ता की मृत्यू के बाद दर्ज हुआ केस

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 एवं संशोधित अधिनियम-2018 की धारा 7, 13 (1) (डी), 13 (2) और आईपीसी की धारा 409, 418, 420 व 120 बी के तहत केस दर्ज किया गया है। लोकायुक्त संगठन को तत्कालीन विधायक स्व कल्पना परुलेकर ने अगस्त, 2009 में शिकायत की थी। इस पर करीब 10 साल इस मामले की लोकायुक्त में जांच ही चलती रही, केस दायर नहीं किया गया। अब शिकायतकर्ता की मृत्यू हो चुकी है।

उनकी शिकायत पर लोकायुक्त में दो प्रकरण जांच में लिए गए थे, इनमें से एक मामले की अभी जांच पूरी नहीं हुई है, इसलिए केस भी दर्ज नहीं किया गया है। सिर्फ एक ही मामला दर्ज कर विवेचना में लिया गया है। इसमें भी अशोक शर्मा को बचा लिया गया है। लोकायुक्त की विशेष स्थापना पुलिस का कहना है कि विवेचना के बाद अशोक शर्मा का भी नाम जोड़ लिया जाएगा।

उपचार के पैसे से करवाया था भुगतान

अशोक शर्मा ने 2007 से 2009 के बीच बिना बजट प्रावधान के ही 940 इलेक्ट्रॉनिक्स फिल्म डिवाइस विद मोबाइल चार्जर की करीब 3 करोड़ 75 लाख रुपए की खरीदी की थी। इनमें से कई अनुपयोगी निकली।

108 जगह यूनिट लगाने के बाद ही बंद हो गई, चल नहीं पाइ। 134 यूनिट इंस्टॉल ही नहीं हो पाई। लेकिन नियम विरुद्ध जाकर अशोक शर्मा व योगीराज ने दीन दयाल अंत्योदय उपचार योजना के पीडी खाते से इसका भुगतान करवा दिया।

चहेती फर्मों को सामान की सप्लाय से पहले ही पैसे भी दिलवा दिया। जबकि खरीदी प्रस्ताव में एनआरएचएम से भुगतान करने का प्रावधान किया गया था। कइ तरह के नियम-शर्तों का उल्लंघन किया गया। दोनों ने पद का दुरुपयोग किया।