ट्रेनों में चाय-नाश्ते और भोजन की दरें बढ़ाने की तैयारी, लेकिन शताब्दी समेत अन्य विशेष ट्रेनों में क्वालिटी सुधार पर ध्यान नहीं

सिस्टम सुधार पर ध्यान नहीं: दिल्ली से हबीबगंज के बीच रोजाना होती हैं छह से सात शिकायतें, रेलवे के जिम्मेदार सुनते हैं सिर्फ ट्विटर की

By: Pushpam Kumar

Published: 27 Nov 2019, 09:02 AM IST

भोपाल. रेलवे मार्च 2020 से विशेष ट्रेनों में भोजन समेत चाय-नाश्ते की दरें बढ़ाने की तैयारी में है। हालांकि इनमें जो खाना परोसा जा रहा है, उसकी गुणवत्ता में सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। हबीबगंज से दिल्ली जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस की बात करें तो अव्यवस्थाओं की रोजाना छह-सात शिकायतें होती हैं। डेढ़ महीने में इनका आंकड़ा 110 से अधिक पहुंच गया है, लेकिन ट्विटर पर आई शिकायतें ही दर्ज की जा रही हैं। इन पर ही कार्रवाई होती है, अन्य को दबा दिया जाता है।
स्प्रिंग टूटने, इंजन में खराबी की शिकायतें भी
पुराने हो चुके शताब्दी के कोचों की स्प्रिंग टूटने, कम कूलिंग, जर्जर सीटों और इंजन में खराबी की समस्या आम है। सोमवार को सी-11 कोच की स्प्रिंग टूटने से ट्रेन निर्धारित समय से 40 मिनट देरी से रवाना हुई थी। इसी तरह से खाने की गुणवत्ता को लेकर आए दिन सवाल उठते हंै।
गुणवत्ता सुधारें फिर बढ़ाएं रेट
मंडल रेल उपयोगकर्ता सलाहकार समिति सदस्य निरंजन वाधवानी का कहना है कि डीआरएम के साथ बैठकों में खाने की गुणवत्ता पर चर्चा होती है। ग्वालियर स्थित किचन से ट्रेन में खाना दिया जाता है। कुछ दिन पहले वहां छापे में गंदगी मिली थी। ऐसी स्थिति में खाने की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो सकता। रेलवे पर जुर्माना होगा तभी केटरिंग व्यवस्था ठीक होगी।
कच्ची रोटी, पतला सूप, खराब सब्जी...
ट्विटर पर आने वाली शिकायतों में कच्ची रोटी, पतला सूप और खराब सब्जी देने की सबसे ज्यादा हैं। यात्रियों के मुताबिक वेज और नॉनवेज कैटेगिरी में दिया जाने वाला खाना महज खानापूर्ति है। शिकायत पर अटेंडर अभद्रता करते हैं। शिकायत ट्वीट करने पर अटेंडर और केटरिंग एजेंसी को जवाब देना पड़ता है, जबकि मौखिक की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती। लापरवाही पर केटरिंग एजेंसी पर जुर्माना लगाने का प्रावधान है। रेलवे ट्विटर पर की गई शिकायतों पर ही 500 से 5000 रुपए का जुर्माना लगाता है, लेकिन कभी-कभी।
शताब्दी में खाने की गुणवत्ता संबंधी जो शिकायतें आती हैं, उन्हें आईआरसीटीसी को भेज देते हैं। कोशिश होती है कि इन शिकायतों पर कार्रवाई की जाए। ट्विटर और फोन के माध्यम से भी शिकायतें मिलती हैं। सभी पर कार्रवाई की जाती है।
अनुराग पटेरिया, सीनियर डीसीएम, भोपाल रेल मंडल

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