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भोपाल। नारियलखेड़ा स्थित मदरसे के मौलवी ने २० बच्चियों का मुंडन इसलिए करा दिया, क्योंकि उन्हें बच्चियों के बालों में जुएं होने का शक था। अभिभावक मोहम्मद जाकिर अली ने शुक्रवार को इसकी लिखित शिकायत मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग में की है।
बाल आयोग अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा ने शिकायत में जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि शिकायत काफी संवेदनशील है और बच्चियों के साथ होने वाला व्यवहार गलत है। तीन सदस्यीय जांच कमेटी बना दी गई है जो शिकायत की जांच करेगी।
घाव हुआ पर छिपाया
अभिभावक मोहम्मद जाकिर अली ने बताया कि उसने तीन महीने पहले ही दस वर्षीय बच्ची का एडमिशन मदरसे में कराया था। मदरसे में करीब 15 दिन के बाद बच्ची सिर खुजलाने लगी। बस यही देखकर मौलवी साहब ने उसकी बच्ची का मुंडन करा दिया। जिसकी सूचना उन्हें नहीं दी गई।
बच्ची ने बताया कि बीते दिनों उसके घुटने में फुंसियां होने लगी और धीरे-धीरे वह घाव के रूप में परिवर्तित हो गई। जब उसने मदरसे के प्रबंधक से पिता को सूचना देने के लिए कहा तो उन्होंने टाल दिया। जाकिर बच्ची को देखने मदरसे गए तो बच्ची के पैरों के घाव देखकर चौंक गए। उन्होंने बताया कि मदरसे में इन दिनों करीब ६० बच्चियां रह रही हैं, जिसमें कई दूर-दराज क्षेत्रों की हैं।
बच्चा बोला-पापा ने नहीं खरीदा वीडियो गेम इसलिए घर से भागकर आ गया
मेरे दोस्तों के पास तरह-तरह के वीडियो गेम है जिसके बाद मैंने पापा से अपने लिए भी लैपटॉप वाला वीडियो गेम खरीदने को कहा था। लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
बस यही सुनकर मैं घर से भागा गया था। यह कहना था इंदौर निवासी एक बच्चे का जो दो दिन पहले चाइल्ड लाइन को मिला। चाइल्ड लाइन डायरेक्टर अर्चना सहाय ने बताया कि बच्चे के बयान बाल कल्याण समिति द्वारा लिए जा रहे हैं।
पिता बोले- वहीं रहने दो
बच्चे के भोपाल में होने की जानकारी जब इंदौर चाइल्ड लाइन ने पिता को दी तो उन्होंने बच्चे को घर वापस ले जाने से इंकार कर दिया।
पिता ने बताया कि बच्चे द्वारा मांगी गई कोई वस्तु जब घर नहीं आती है तो वह घर से भाग जाता है। पहले भी दो बार घर से भागकर राजस्थान और गुजरात पहुंच गया था। चाइल्ड लाइन इंदौर में पिता की काउंसलिंग की जा रही है ताकि वह बच्चे को घर ले जाएं।
गरीब बच्चे से ली फीस, ऑल सेंट की एनओसी रद्द हो
स्कूल प्रबंधन ने आरटीई के तहत पढऩे वाले किसी भी बच्चे से फीस नहीं ली है। लिए गए १५०० रुपए विकास शुल्क, स्कूल डायरी, ट्रांसपोर्ट फीस के नाम पर लिए गए हैं। यह कहना था गोविंदपुरा स्थित सेंट पीटर्स मारथोमा स्कूल की प्राचार्य अल्पना सुनील कुमार का। वे शुक्रवार को बाल आयोग की संयुक्त बेंच में स्कूल का पक्ष रखने पहुंची।
डीपीसी द्वारा की गई जांच रिपोर्ट की जानकारी देते हुए आरटीई प्रभारी सीमा गुप्ता ने आयोग को बताया कि स्कूल अन्य फीस के नाम पर फीस ले सकता है।
स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश
प्रिंसिपल अल्पना सुनील कुमार ने आयोग को बताया कि आरटीई में संशोधन होने के बाद स्कूल २०१३ से ही आरटीई के दायरे से बाहर हो गया है, जिसके कारण वह अब आरटीई में एडमीशन देने के लिए बाध्य नहीं हैं। आयोग सदस्य ब्रजेश चौहान ने स्कूल का माइनॉरिटी सर्टिफिकेट मांगा है।
वहीं शासन-प्रशासन के आदेशों का पालन नहीं करने वाले एयरपोर्ट रोड स्थित ऑल सेंट स्कूल की एनओसी रद्द करने की अनुशंसा की गई है। साथ ही स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश भी दिया है।
Published on:
28 Apr 2018 08:39 am
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