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100 दिन की मोहन सरकार, ऐसा है मुख्यमंत्री के कामकाज का हिसाब-किताब

13 दिसंबर 2023 को डा. मोहन यादव ने ली थी एमपी के सीएम पद की शपथ...। 100 दिन में कितना कुछ बदला...।

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भोपाल

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Manish Geete

Mar 22, 2024

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मोहन सरकार के 22 मार्च 2024 को 100 दिन पूरे हो रहे हैं। डॉ. मोहन यादव ने 13 दिसंबर 2023 को सीएम पद की शपथ ली थी। इसके बाद सीएम और सरकार ने काम शुरू किया। अब 100 दिन बाद सरकार कई अच्छे फैसलों और कई खामियों के साथ खड़ी है। एक ओर जहां मरीजों को एयर एंबुलेंस की सेवा देने जैसी योजना को लागू करने का ऐलान किया तो दूसरी ओर बार-बार के तबादलों के झंझावत से सवालों के घेरे भी बढ़े हैं। मोहन सरकार 100 दिन में संकल्प-पत्र के 100 संकल्प पूरे करने का दावा करती है, लेकिन लोकसभा चुनाव का दबाव सत्ता-संगठन पर दिखता है।

आईएएस, आईपीएस और राज्य सेवा के अफसरों के तबादले में सरकार ने सख्ती बरती। सौ दिन में करीब 21 जिलों के कलेक्टर बदले। 20 जिलों के एसपी को हटाया। थोकबंद तबादलों में सरकार ने संकोच नहीं किया। आचार संहिता लगने के ठीक पहले करीब १५० तबादले किए। खामी ये रही कि कई अफसरों के मामले में चंद घंटों में निर्णय बदल दिए गए। कुछ का बार-बार तबादला किया गया। मसलन, पीएस संजय शुक्ला के सौ दिन में तीन बार तबादला हुआ। साठ से ज्यादा ऐसे अफसर रहे, जिन्हें इस दौरान पदस्थ करने के बाद वापस हटाकर दूसरी जगह भेजा। इससे प्रशासनिक स्तर पर निर्णय की कमजोरी सामने आई।

गेहूं पर बोनस
गेहूं पर 125 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया। इससे समर्थन मूल्य 2400 हो गया। हालांकि संकल्प पत्र में 2700 रुपए प्रति क्विंटल का वादा है।

4 माह का लेखानुदान
12 फरवरी को मुख्य बजट के बजाय 1.45 लाख करोड़ का लेखानुदान चार माह के लिए पेश किया। अब सरकार जुलाई में पहला मुख्य बजट लाएगी।

मंत्रियों का प्रशिक्षण
सीएम ने सुशासन संस्थान में मंत्रियों का दो दिनी प्रशिक्षण रखा। विधानसभा सत्र संचालन की बारीकियां, बजट, विभागीय कामकाज पर टिप्स दिए गए।

हर हफ्ते कैबिनेट
सरकार ने हर हफ्ते कैबिनेट की है। तीन माह में औसत 14 बैठकें हुईं। पहली बैठक सीएम व दोनों डिह्रश्वटी सीएम के साथ हुई थी। बैठकों में करीब 200 फैसले लिए गए।

अयोध्या में श्रीरामलला के दर्शन
मोहन कैबिनेट बीती चार मार्च को अयोध्या में राममंदिर में रामलला के दर्शन को गई। इसमें मंत्रियों को परिवार संग ले जाया गया। सीएम भी खुद पत्नी सहित दर्शन को गए।

उज्जैन पर फोकस
मुख्यमंत्री मोहन के गृह जिले उज्जैन पर सरकार का फोकस है। वहां दुनिया की पहली वैदिक घड़ी की स्थापना की गई। वर्चुअल लोकार्पण पीएम नरेंद्र मोदी ने किया। रीजनल इंवेस्टर समिट की शुरुआत भी उज्जैन से की। प्रशासनिक कसावट के लिए संभागीय स्तर पर बैठकों व समीक्षा की शुरुआत भी सीएम ने उज्जैन से की थी। विक्रमोत्सव को बड़ा स्वरूप दिया गया।

सरकार के विभागों की बात करें तो कामकाज में कोई भी विभाग ज्यादा कुछ नया नहीं कर सके। ज्यादातर विभाग तो प्रतिदिन के कामों में ही कई मौकों पर पिछड़ते दिखे। नतीजा सीएम हेल्पलाइन से लेकर विभागीय मंत्रियों तक शिकवाशि कायतें हुईं। यह हाल तब है जब सभी विभागों को लेखानुदान में भरपूर राशि मिली। महिला एवं बाल विकास जैसे कुछ विभाग ऐसे भी रहे जो समय पर वेतन नहीं दिलवा सके। हालांकि लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में बड़े बदलाव देखने को मिले।

प्रमुख विभागों का लेखा-जोखा गृह विभाग: धार्मिक स्थलों पर तेज ध्वनि वाले लाउडस्पीकर व खुले में मांस दुकानों पर प्रतिबंध लगाया।

राज्य विमानन विभाग: एयर एंबुलेंस की सुविधा शुरू कराई। विषम हालात में इसका फायदा गंभीर मरीजों को मिल सकेगा।

उद्योग विभाग: उज्जैन में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन।

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग: पुराने कॉलेजों में व्यवस्था अपग्रेड, नए कॉलेज खोलने, स्वास्थ्य केंद्रों के भवन निर्माण की राशि केंद्र से लेने जैसे काम हुए।

स्कूल शिक्षा: सीएम राइज स्कलों के निर्माण की गति नहीं सुधरी। रूटीन के कामों में भी विभाग पिछड़ा।

उच्च शिक्षा: 570 कॉलेजों को पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस बनाने का काम। छात्रों को डिजि लॉकर की सुविधा के लिए मशक्कत।

पीडब्ल्यूडी: सड़क, भवन निर्माण के कार्यों में तेजी। पीएम द्वारा 24,500 करोड़ के प्रोजेक्टों का लोकार्पण व शिलान्यास में राज्य के विभाग ने ताकत झोंकी।

राजस्व विभाग: ओला-पाला प्रभावित किसानों का सर्वे किया, लेकिन 100 फीसदी किसानों को राहत नहीं मिली। कई सर्वे से छूटे।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास: ग्रामीणों को उम्मीद थी कि विधानसभा चुनाव के बाद नए और टिकाऊ काम होंगे। गतिविधियां बढ़ेंगी, पर ऐसा नहीं हुआ।

वन विभाग: तेंदूपत्ता संग्राहकों का बोनस तो बढ़ाया लेकिन पूर्व से चल रहे टाइगर रिजर्व, अभयारण्य बनाने के प्रस्तावों पर उम्मीदों भरे निर्णय नहीं हो पाए। आचार संहिता के चंद दिन पहले राज्य वन्यप्राणी बोर्ड का गठन होकर रह गया।

नगरीय विकास: भोपाल में 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्से में बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने का काम किया, लेकिन जो काम चल रहे हैं, वे ही बढ़े। नवाचार देखने में नहीं आया।

वित्त विभाग: लेखानुदान को लेकर काम किया। अधिकारी, कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की। ऊर्जा विभाग: रबी सीजन में बिजली की कमी नहीं आने दी। इसके अलावा कुछ नया नहीं।