
भोपाल. मध्यप्रदेश में जिन सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणाम सही नहीं आए हैं। उनके शिक्षकों का अब टेस्ट होगा। यह बारह जून को होना है। इससे पहले ही लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन विवादों में आ गया है। इस नोटिफिकेशन के एक प्वाइंट के अनुसार सरकार ने शिक्षकों को परीक्षा के दौरान नकल की खुली छूट दी है।
लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार टेस्ट देने आए शिक्षक अपने साथ एक पाठ्यक्रम की पुस्तक ला सकते हैं। जिसका उपयोग परीक्षा के दौरान कर सकते हैं। इसके साथ ही वह कोई दूसरी पुस्तक नहीं ला सकते हैं। यह पत्र सभी जिला शिक्षा अधिकारी को समस्त लोक शिक्षण संभाग के संयुक्त संचालक की तरफ से जारी किया है।
इन शिक्षकों की है परीक्षा
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की तरफ से जारी रिजल्ट में जिन स्कूलों के परिणाम 0 से 30 फीसदी तक रहे हैं। उन स्कूलों के शिक्षकों का दक्षता संवर्धन टेस्ट होगा। साथ ही पत्र में लिखा गया है कि जो शिक्षक परीक्षा में अनुपस्थित रहेंगे, उनको कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर कार्रवाई की जाएगी। उपयुक्त कारण होने पर भी अऩुपस्थित शिक्षकों की फिर से परीक्षा ली जाएगी।
ला सकेंगे किताब
नोटिफिकेशन में यह कहा गया है कि शिक्षक चाहें तो पाठ्यपुस्तक का उपयोग परीक्षा के दौरान कर सकेंगे। पाठ्यपुस्तक के अलावे अतिरिक्त कोई अन्य सामग्री का उपयोग नहीं कर सकेंगे। उत्तरपुस्तिकाएं उसी दिवस पर जांची जाएंगी और परीक्षा परिणाम गोपनीय रखे जाएंगे।
12 जून को होगी परीक्षा
मध्यप्रदेश सरकार के स्कूली शिक्षा विभाग का तरफ से यह परीक्षा 12 जून को आयोजित की जाएगी। जो टीचर इस परीक्षा में फेल होंगे, उन्हें या तो बाहर कर दिया जाएगा या फिर शैक्षणिक कार्य के अलावे दूसरे काम में लगा दिया जाएगा।
इन जिलों में खराब हुआ है रिजल्ट
इस साल आए रिजल्ट में सिंगरौली, रीवा, ग्वालियर, सीधी, मुरैना, शिवपुरी और भिंड के स्कूलों के रिजल्ट खराब हुए हैं। सरकार उन स्कूलों की सूची तैयार की है, जिनके रिजल्ट पिछले दो या तीन सालों से लगातार खराब आ रहे हैं। ऐसे में इन स्कूलों के साथ अब सरकार ढिलाई बरतने को तैयार नहीं है।
उम्मीद के अनुसार रिजल्ट नहीं
मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के द्वारा इस बार 16 मई को परीक्षा परिणाम प्रकाशित किए गए। 10वीं 61.32% और 12वीं में 72.37% फीसदी छात्र सफल हुए हैं। इस बार भी लड़कियों के रिजल्ट लड़कों की तुलना में बेहतर रहे हैं। यानी कुल मिलाकर दसवीं करीब चालीस फीसदी तक छात्र फेल हुए। ऐसे में प्रदेश की शिक्षा की स्थिति काफी खराब है।
उठ रहे हैं सवाल
सरकार के इस फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि छात्रों के साथ जब परीक्षा के दौरान सख्ती बरती जाती है तो फिर शिक्षकों को ये छूट क्यों दी जा रही है। क्योंकि छात्रों का भविष्य इनके ही हाथ में होता है। नकल कर जो टीचर पास करेंगे वो छात्रों को क्या पढ़ाएंगे।
Updated on:
03 Jun 2019 05:07 pm
Published on:
03 Jun 2019 05:03 pm
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