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मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर विशेष, जानिए राजधानी के डवलपमेंट की खास बातें

Madhya Pradesh Foundation Day: कभी भोपाल एक कस्बे सरीखे था। आज यह देश की सबसे विकसित राजधानियों में शामिल है।

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भोपाल

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Manish Geete

Nov 01, 2022

madhya pradesh foundation day

madhya pradesh foundation day celebration: मध्यप्रदेश के चहुंमुखी विकास में राजधानी भोपाल सक्रिय सहभागी है। मेट्रो ट्रेन से लेकर एलिवेटेड फ्लाइओवर तक जहां इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के प्रतीक हैं वहीं भारत भवन और मानव संग्रहालय सभ्यता और संस्कृति के विकास की कहानी गढ़ रहे हैं। भोपाल के युवा भी हर क्षेत्र में यह नए प्रतिमान रच रहे हैं। कभी भोपाल एक कस्बे सरीखे था। आज यह देश की सबसे विकसित राजधानियों में शामिल है।



अगले 50 साल के शहर विकास की पटकथा लिख रहा भोपाल

राजेश चौरसिया, स्ट्रक्चर इंजीनियर और सिटी प्लानर

भोपाल मेट्रो के साथ अब शहर को एलिवेटेड फ्लाइओवर के विकल्प की ओर ले जाना चाहिए। हालांकि, इसकी शुरुआत हो चुकी है। कोलार सिक्स लेन के बाद जल्द ही नर्मदापुरम रोड को एलिवेटेड फ्लाइओवर की सौगात मिलेगी। शहर में विश्व स्तरीय स्टेशन रानी कमलापति बनकर तैयार है। भोपाल स्टेशन और शहर के अन्य रेलवे स्टेशन अब इसी का अनुसरण कर रहे हैं। शहर का सबसे लंबा ढाई किमी का ब्रिज गणेश मंदिर से लेकर एमपी नगर थाने, गायत्री मंदिर के पास उतरेगा। जब यह पूरा होगा शहर की रफ्तार को दोगुना करेगा। राजा भोज एयरपोर्ट पर बरसों पुराने टॉवर को तोड़कर नया और ज्यादा ऊंचाई का टॉवर बनने जा रहा है। इससे एयरकनेक्टिविटी बढ़ेगी। यहां से इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू होंगी।

प्रोफेसर कॉलोनी में मंत्री बंगलों से लेकर नई कलेक्टोरेट का भवन बनाने से लेकर शहर में सात स्थानों पर नए फ्लाइओवर आकार लेंगे। जो भविष्य के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आसान करेंगे। अचारपुरा से लेकर बैरसिया रोड, अगरिया छापर में नए औद्योगिक क्लस्टर का उदय हो रहा है। इससे विकास के रास्ते खुलने के साथ ढेर सारे रोजगार भी पैदा होगा। 2023 तक राजधानी की आबादी 27.50 से ज्यादा हो जाएगी। ऐसे में भविष्य के लिए तैयार की जा रही ट्रांसपोर्ट और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट इंटरनेशनल स्टैंडर्ड का होगा। चिकित्सा सेवा से राजधानी के लोगों का जीवन और आसान होगा। 67 साल की यह विकास यात्रा गौरवान्वित करने वाली है।

 

कभी शहर में सालाना ओपीडी एक लाख थी, आज 22 लाख

डा. पंकज शुक्ला, एनएचएम के पूर्व संचालक

1956 में गांधी मेडिकल कॉलेज के नाम से भोपाल का पहला मेडिकल कॉलेज खुला। अब एम्स और हमीदिया के अलावा 4 निजी मेडिकल कॉलेज भोपाल में चल रहे हैं। 1972 में शहर के अस्पतालों की सालाना ओपीडी करीब एक लाख थी। लेकिन, अब सिर्फ तीन बड़े अस्पतालों-हमीदिया, जेपी और एम्स में ही सालाना ओपीडी 22 लाख के ऊपर पहुंच गई है। ऐसे में बड़े हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है।

अस्पतालों के इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार इजाफा हो रहा है। साल 2022 में हमीदिया कि नई बिल्डिंग में सुल्तानिया जनाना अस्पताल शिफ्ट हुआ। 300 बेड के काटजू जच्चा-बच्चा अस्पताल की सौगात मिली। यह दोनों उच्च तकनीक से लैस हैं। मशीन से लेकर बेड तक सब आधुनिक हैं। इसी साल हमीदिया में पहली सरकारी रोबोटिक सर्जरी हुई है। जिला अस्पताल में हेल्प डेस्क की सुविधा शुरू की गई। भोपाल के जीएमसी में हिंदी में चिकित्सा शिक्षा देने की शुरूआत करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।

 

 

डिजिटल की ओर बढ़ती शिक्षा व्यवस्था, तेजी से बदल रही स्कूलों की तस्वीर

आईएस चौहान, पूर्व कुलपति बीयू

म प्र की स्थापना के समय शिक्षा के क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर का दखल बहुत कम था। स्कूली शिक्षा में मिशनरी स्कूल थे, लेकिन उच्च शिक्षा के लिए सिर्फ सरकारी संस्थान ही हुआ करते थे। प्राइवेट सेक्टर का कोई स्कोप नहीं था, लेकिन आज हर तरफ प्राइवेट सेक्टर का बोलबाला है। यह समय की जरूरत भी है। सरकार के पास इतना फंड नहीं हैं कि वह सभी को शिक्षित कर सके। हालांकि, प्राइवेट सेक्टर पर समुचित कंट्रोल की जरूरत है। ताकि गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिल सके। यह खुशी की बात है कि तेजी के साथ मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था डिजिटल की ओर बढ़ रही है। भविष्य की जरूरतों के अनुसार कॉलेजों की नई बिल्डिंग स्ट्रक्चर डिजाइन की जा रही हैं। ऐसे कमरे बन रहे हैं जिसमें वर्चुअल कक्षाएं चलाई जा सकें।

इस साल मध्य प्रदेश हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट ने कॉलेज के छात्र-छात्राओं के लिए सिलेबस की पीडीएफ उपलब्ध कराई है। कॉलेजों में किताबें की जगह सीडी पहुंच रही है। हाईटेक लैब, पार्किंग की अच्छी व्यवस्था, डिजिटल लाइब्रेरी तैयार हो रही हैं। प्रदेश में 9 हजार 200 सीएम राइज स्कूल खुल रहे हैं। यहां बच्चों को वर्ल्ड क्लास सुविधाएं मिलेंगी। कॉलेज लेवल पर भी काफी सुधार हो रहे हैं। एग्रीकल्चर में नए नवाचार के लिए कई कृषि कॉलेजों में रिसर्च की सुविधाएं दी जा रही हैं। वहीं रिटायर्ड प्रोफेसर और एक्सपर्ट डॉ. तैयब सैफी बताते हैं कि कृषि विश्वविद्यालयों में ऐसी फसलों को तैयार किया जा रहा है जो स्वास्थ्य के लिए लाभ दायक हों। 67 सालों की विकास यात्रा में मप्र ने जो हासिल किया है वह काबिले तारीफ है। वहीं, हमीदिया के हड्डी विभाग के एचओडी डॉ. सुनीत टंडन कहते हैं आज स्पाइन सर्जरी से लेकर हड्डी से जुड़ी ऐसी कोई भी ऐसी सर्जरी नहीं है, जो भोपाल में न होती हो। यहां सभी तरह के सुपर स्पेशियलिटी कोर्स उपलब्ध हैं। आज दूसरे राज्यों के मेडिकल स्टूडेंट भोपाल यह कोर्स करने आ रहे हैं। एम्स में इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के रिसर्च हो रहे हैं।

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