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MP election 2018: राजधानी भोपाल में कहां से कौन बना Congress का उम्मीदवार,जानिये यहां…

कांग्रेसी खेमे में जश्न : टिकट मिलते ही नेताजी ने बंटवा दी मिठाई, खुशी में झूम उठे समर्थक, खूब पटाखे फूटे...

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congress-2018 candidate for bhopal

MP election 2018: राजधानी भोपाल में कहां से कौन बना Congress का उम्मीदवार,जानिये यहां...

भोपाल। मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा के चुनावों के लिए कांग्रेस ने अपनी पहली लिस्ट शनिवार को देर शाम जारी कर दी है।

इस लिस्ट में कुल 155 प्रत्याशियों का ही खुलासा किया गया है। वहीं राजधानी भोपाल में कांग्रेस ने तीन सीटों पर नाम तय करते हुए जहां अकील पर भरोसा कायम रखा है, वहीं पीसी को एक और मौका दिया है, जबकि बैरसिया में नया चेहरा उतारा गया है।

इन नामों के सामने आते ही कांग्रेसी खेमे में जश्न का माहौल देखा गया। इसके अलावा टिकट मिलते ही नेताजी ने बंटवा दी मिठाई, खुशी में झूम उठे समर्थकों ने खूब पटाखे फोड़े।

1-जनता के मुद्दों पर बेबाकी से रखते हैं राय
उत्तर- आरिफ अकील

तीन बार से विधायक। पार्टी की नजर में ईमानदार और मेहनतकश। पिछले सालों में छवि सुधार पर ध्यान दिया। टिकट मिलते ही लक्ष्मी टॉकीज स्थित सराय में कार्यकर्ताओं संग जश्न मनाया।

क्षेत्र में अतिक्रमण बढ़ा तो विकास थम गया
क्षेत्र की बड़ी समस्या अतिक्रमण और विकास न होना है। संकरी गलियां, जर्जर मकान, बाजारों में पार्किंग की समस्या और बुनियादी सुविधाओं का अभाव यहां के प्रमुख मुद्दे हैं। बारिश में जलभराव से जनता परेशान होती है।

ये है खास...

आमदनी- कृषि।
सोशल मीडिया- फेसबुक-ट्विटर पर सक्रिय।
पहचान- जमीनी नेता जो हवाई चप्पल पहनता है।
राजनीतिक अनुभव- छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। विधायक और फिर मंत्री बने।
कॅरियर का ग्राफ- दिग्विजय मंत्रीमंडल में सदस्य रहे। संगठन में तवज्जो कम हुई, लेकिन जिताऊ चेहरा होना टिकट दिलाता है।
कोर टीम- मो. शफ ीक, सरवर खान, शाहिद अली, पुत्र आतिफ और भाई आमिर अकील।
रेकॉर्ड- तीन बार से विधायक।
ठीया- सिकंदरी सराय में जनता से मिलते हैं।
पहनावा- खादी का सफेद कुर्ता पायजामा और हवाई चप्पल। खास मौकों पर खादी जैकेट।

विकास कार्यों की स्थिति संतोषजनक है, लेकिन और काम होने चाहिए।
जोया अख्तर, करोंद

लोगों की उन तक पहुंच आसान है, लेकिन क्षेत्र का विकास नहीं हो पाया। अभी भी काफी समस्याएं हैं जिन्हें दूर किया जाना चाहिए।
मोहम्मद फराज, करोंद

आरिफ अकील को वोट बैंक की राजनीति से मतलब है। इतनी बार विधायक बनने के बाद उन्होंने कोई काम नहीं करवाए केवल अतिक्रमण करवाए हैं।
आलोक शर्मा, महापौर

2-हाईप्रोफाइल विधानसभा क्षेत्र में जमीन से जुड़ाव
दक्षिण-पश्चिम- पीसी शर्मा

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह से निकटता का मिला फायदा। दक्षिण से विधायक रहे हैं। ईमानदार छवि और जनता से सीधा संपर्क। टिकट मिलते ही घर पर जुटे समर्थकों के साथ मनाया जश्न।

बरसों से जननेता की छवि गढऩे में लगे
झुग्गी-झोपडिय़ों का गढ़। बड़ा तालाब भी अतिक्रमण का शिकार। न्यू मार्केट में पार्किंग और अवैध हॉकर्स बड़ी समस्या हैं। पिछले दिनों दुष्यंत कुमार संग्रहालय जमींदोज हुआ तो जनता संग सड़क पर उतरे तब भवन आवंटित।

ये है खास...

आमदनी- कृषि।
सोशल मीडिया- फेसबुक-ट्विटर पर सक्रिय।
पहचान- क्षेत्र में हर छोटे-बड़े आयोजन में भागीदारी। मौखिक आमंत्रण पर भी पहुंचते हैं।
राजनीतिक अनुभव- मैनिट से पढ़ाई की। यहीं से राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत।
कॅरियर का ग्राफ- 1998 में दक्षिण विधानसभा से विधायक रहे। बीडीए के अध्यक्ष भी रहे। कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा।
कोर टीम- गुड्डू चौहान, ईश्वर सिंह चौहान, पुत्र पीवी शर्मा समेत अन्य।
रेकॉर्ड- एक बार विधायक।
ठीया- रविशंकर मार्केट, ग्यारह सौ क्वार्टर स्थित आवास पर।
पहनावा- सफेद कुर्ता पायजामा, गले में कांग्रेस का दुपट्टा रहता है। सैंडिल पहनना पसंद है।

मौजूदा विधायक के बंगले पर जाओ तो वे मिलते ही नहीं हैं। पीसी शर्मा इस मामले में अलग हैं। उनसे मिलना आसान है।
भानु सिंह, नेहरू नगर

नगर निगम स्तर की कई समस्याएं हैं। नेहरू नगर में आवारा कुत्तों का आतंक, अतिक्रमण जर्जर सड़कें जैसी समस्याएं हैं।
संजय जैन, निवासी, नेहरू नगर

मुझसे एक बार हार चुके शर्मा फिर चुनाव मैदान में हैं। विकास कार्यों पर सवाल उठा रहे हैं तो बताएं क्षेत्र की जनता फिर भी भाजपा को क्यों चुनती है?

उमाशंकर गुप्ता, भाजपा प्रत्याशी

3- संगठन और क्षेत्र में सक्रियता ने दिलाया टिकट
बैरसिया- जयश्री हरिकरण
क्षेत्र में बेहतर संपर्क। संगठन से भी जुड़ाव। टिकट मिलने के बाद बैरसिया के खजूरिया रामदास गांव के हनुमान मंदिर में दर्शन किए। वहां से भोपाल के लिए रवाना। कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न।

राजधानी के नजदीक पर विकास से कोसों दूर
यहां के किसान बिजली, मुआवजा राशि और फसल के उचित दाम न मिलने से परेशान हैं। बैरसिया शहर में अतिक्रमण बड़ा मुद्दा है। राजधानी से सटा होने के बावजूद पिछड़ापन दूर नहीं हो सका है।

ये है खास...

आमदनी- कृषि, पेट्रोल पंप का व्यवसाय। पति नौकरीपेशा।
सोशल मीडिया- फेसबुक पर।
पहचान- जनता के बीच सतत संपर्क । महिला मंडलों में सक्रिय।
राजनीतिक अनुभव- 2009 में जिला पंचायत का चुनाव लड़ीं थीं, लेकिन हार गईं।
कॅरियर का ग्राफ- जिला पंचायत सदस्य का चुनाव हार चुकी हैं। अब सीधे विधायक का टिकट मिल गया। विधानसभा युवक कांग्रेस अध्यक्ष रही हैं। जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष तो मप्र कांग्रेस कमेटी में प्रवक्ता।
कोर टीम- सुरेंद्रसिंह ठाकुर, रणधीर सिंह, जोधाराम गुर्जर, अनीता शर्मा।
लाइफ स्टाइल: साडिय़ों का शौक। कई राज्यों की साडिय़ों का कलेक्शन।
रेकॉर्ड- संगठन में सक्रिय। क्षेत्र में जनता के बीच लगातार संपर्क बनाए रखती हैं।
ठीया- राजधानी के बीएचईएल क्षेत्र में निजामुद्दीन कॉलोनी में निवास।

महिला को टिकट दिया है तो हमारी समस्याओं को बेहतर तरीके से समझ सकेंगी। गांव वालों को दूर-दूर से पीने का पानी लाना पड़ता है। इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
रीना दांगी खजूरिया

ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के लिए बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। क्षेत्र में बढ़ते अपराध पर रोक लगाई जाना चाहिए।
कंचन गुर्जर, ग्राम टांडा

कांग्रेस किसी को भी टिकट दे, कोई फर्क नहीं पड़ता। हमने पांच साल में जो काम किया, जनता उसे जानती है।
विष्णु खत्री, भाजपा प्रत्याशी