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MP election 2018: कांग्रेस की पहली सूची में चला राहुल का फार्मूला,30 युवा और 22 महिलाओं को दिया मौका

कांग्रेस के 155 उम्मीदवारों की घोषणा,सिंधिया-दिग्विजय टकराव में कमलनाथ ने मारी बाजी...

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MP election 2018: कांग्रेस की पहली सूची में चला राहुल का फार्मूला,30 युवा और 22 महिलाओं को दिया मौका

भोपाल। टिकट बंटवारे में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के टकराव के बीच कांग्रेस की शनिवार देर रात 155 उम्मीदवारों की आई पहली सूची में प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ बाजी मार ले गए।

कांग्रेस की यह सूची भाजपा के 176 उम्मीदवारों की घोषणा के दूसरे दिन आई है। दिग्विजय-सिंधिया की खींचतान से सूची अटकी हुई थी। इसमें राहुल गांधी के युवा और महिला फैक्टर तथा जमीनी सर्वे को आधार बनाकर कमलनाथ अपने 50 समर्थकों को टिकट दिलाने में सफल रहे। शेष 75 सीटे ऐसी हैं, जिन पर उम्मीदवारों के चयन को लेकर कांग्रेस क्षत्रपों के बीच रस्साकसी है।

ये भी खास...
- कमजोर परफॉर्मेंस वाले 3 विधायकों के टिकट काटे, 8 के किए होल्ड।
- बाकी 75 सीटों पर अभी फैसला नहीं।

आदिवासियों में प्रभावी सांसद कांतिलाल भूरिया ऐसे क्षत्रप हैं, जिनके बेटे विक्रांत भूरिया और भतीजी कलावती को टिकट दिया है। दिग्विजय के पुत्र जयवर्धन को राघोगढ़ और भाई लक्ष्मण सिंह को चाचाौड़ा से प्रत्याशी बनाया है।

भाजपा के अनुभवी चेहरों को मात देने राहुल फैक्टर का ध्यान रखते हुए कांग्रेस ने 155 में से 52 युवा और महिलाओं को टिकट दिए हैं। इनमें 15 नए युवा चेहरे हैं तो 15 पुराने हैं। 22 महिलाओं को मौका दिया है।

नाथ के 50, दिग्विजय के 25 और सिंधिया के 21 टिकट
सूची में कमलनाथ के एक तिहाई 50 समर्थक टिकट पा गए। दिग्विजय के 25 और सिंधिया के 21 समर्थकों को टिकट मिला है। अजय सिंह 13 और अरूण यादव 5 करीबियों को टिकट दिलवा पाएं हैं।

कांतिलाल भूरिया के खाते में 2 टिकट आए है जो उनके पुत्र विक्रांत और भतीजी कलावती का है। ये तीनों नेता दिग्विजय गुट के माने जाते हैं।

क्षत्रपों के प्रभाव की सीटों पर नहीं हो सका फैसला
कांग्रेस ने जिन 75 सीटों के टिकट रोके हैं, उसमें तीन फॉर्मूले अपनाए हैं। पहले नंबर पर विवाद वाली सीटें रोकी हैं। दूसरे नंबर पर सीएम शिवराज, मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया, नरोत्तम मिश्रा जैसे दिग्गज भाजपा नेताओं के सामने प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं।

उन सीटों को भी रोका है, जो दिग्विजय, सिंधिया और अजय सिंह के गढ़ माने जाते हंै। सिंधिया के गढ़ गुना-शिवपुरी और खास समर्थक रामनिवास रावत की सीट इसका उदाहरण है। इंदौर शहर की तीन नंबर छोड़कर कोई सीट घोषित नहीं की। यहां दिग्विजय का दखल माना जाता है।

दिग्गजों के विवाद में उलझे हैं ये टिकट
दिग्विजय-सिंधिया खींचतान से ग्वालियर-चंबल के 6 विधायकों के टिकट होल्ड किए। ये सिंधिया का गढ़ है। इधर सिंधिया ने भी दिग्विजय और अजय सिंह के समर्थक राजनगर विधायक विक्रम सिंह नातीराजा का टिकट होल्ड करवा दिया। जमीनी सर्वे में कमजोर आए विधायक दिनेश कुमार का टिकट खतरे में है।

तीन विधायकों के टिकट काट नए चेहरों पर दावं
कमजोर परफॉर्मेंस वाले तीन विधायकों करैरा सीट से शंकुतला खटीक, कोतमा से मनोज अग्रवाल और सिरोंज से गोवद्र्धन उपाध्याय के टिकट काटे हैं। करेरा से जसवंत जाटव, कोतमा से सुनील सराफ और सिरोंज सीट से अशोक त्यागी पर दावं लगाया है। तीनों नए चेहरे हैं।

जयस अध्यक्ष को टिकट देकर आदिवासियों में सेंध
कांग्रेस ने आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में सक्रिय जयस के अध्यक्ष हीरालाल अलावा को मनावर सीट से टिकट दिया है। कांग्रेस और भाजपा पहले इस संगठन से गठबंधन करना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस ने अध्यक्ष को टिकट देकर जयस को ही एक तरह से अपने पाले में ले लिया।

टिकट कटने के अंदेशे में गौर दो दिन के मौन पर
टि कट कटने की आशंका को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर से कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने टेलीफोन पर चर्चा की। कमलनाथ ने उन्हें कांग्रेस के टिकट पर गोङ्क्षवदपुरा से चुनाव लडऩे का न्योता दिया है।

इसके अलावा गौर की जगह यदि उनकी बहू निर्दलीय चुनाव लड़ती है तो भी कांग्रेस उनका समर्थन कर सकती है। हालांकि दोनों पक्षों ने इस खबर की पुष्टि नहीं की है। शाम को बाबूलाल गौर और कृष्णा गौर गुफामंदिर पूजा करने पहुंचे।

44 हारे प्रत्याशियों को भी दिया टिकट
कांग्रेस ने पहली सूची में 2013 के चुनाव में पराजित हुए 44 को भी टिकट दिया है। तीन बागियों सचिन बिड़ला, कलावती भूरिया और सुनीता पटेल को भी उम्मीदवार बनाया है। तीनों ही पिछले चुनाव में निर्दलीय खड़े हुए थे।

इधर, गुड्डू के भाजपा में आने के बाद कांग्रेस का दांव, संजय का बुदनी से चुनाव लडऩे से इनकार...
पूर्व कांग्रेस सांसद प्रेमचंद गुड्डू के भाजपा में आने के दूसरे दिन कांग्रेस ने नहले पर दहला मारते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केसाले संजय सिंह मसानी को कांग्रेस में शामिल किया है।

संजय सिंह ने दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता ली। उन्होंने कहा, प्रदेश में शिवराज की नहीं, कमलनाथ की जरूरत है। शिवराज के 13 साल बहुत हुए, अब मौका दूसरों को मिलना चाहिए। सीएम के परिवार का सदस्य नहीं, रिश्तेदार हूं।

संजय के शिवराज के खिलाफ बुदनी से चुनाव लडऩे की अटकलें लगती रही। बाद में पत्रिका से संजय ने कहा, मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा, भूमिका कमलनाथ तय करेंगे। गोंदिया के संजय फिल्मों से जुड़े रहे हैं। शिवराज जब मुख्यमंत्री बने, तब से वे मध्यप्रदेश में सक्रिय रहे। सूत्रों के मुताबिक वे भाजपा में वारासिवनी सीट से टिकट मांग रहे थे।

टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय लडऩे का ऐलान भी किया था। उन्हें कांग्रेस में लाने में उनके उन उद्योगपति मित्रों की भूमिका है, जिनके कमलनाथ से नजदीकी संबंध हैं। कांग्रेस ने बुदनी और वारासिवनी से पहली सूची में प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं।

नाथ के वीडियो को सीएम ने किया ट्वीट
सीएम शिवराज ने कमलनाथ के एक वीडियो को ट्विटर हैंडल से पोस्ट कर उस पर लिखा कि यदि यही कांग्रेस की राजनीति है तो बाकी जनता खुद समझदार है। वही फैसला करेगी कि 28 नवंबर को किसको विजयी बनाएगी।

वीडियो में नाथ कहते दिख रहे हैं कि कोई कहता है कि उसके उपर तो चार केस हैं। मुझे तो जीतने वाला उम्मीदवार चाहिए। कांग्रेस ने इसे साजिश बताया है।