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भोपाल। पीठासीन अधिकारियों की रविवार को ट्रेनिंग शुरू हुई। इस दरमियान पता चला कि ड्राइवर को पीठासीन अधिकारी बना दिया गया।
चुनाव आयोग ने हिदायत दी है कि आगे से इस तरह की लापरवाही हुई तो नोडल अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। जिले के संयुक्त संचालक संस्थागत वित्त विभाग से अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है।
सूची में नारायण सिंह चौहान को सहायक ग्रेड-2 बताया है, जबकि वे क्षेत्रीय सहायक हैं। इसी सूची में पांच नंबर पर बद्री मीणा को सहायक ग्रेड-3 बताया है जबकि वे ड्रायवर हैं।
सहायक ग्रेड-एक तनवीर श्रीवास्तव को सहायक ग्रेड-2 कर दिया है। ड्राइवर शिव प्रसाद विश्वकर्मा को सहायक ग्रेड-3 और ड्राइवर हेमराज सोनवने को सहायक ग्रेड-3 बताया गया है।
कलेक्टर ने लिखा चेतावनी भरा पत्र
466 विभागों ने नोडल अधिकारी बनाकर 36 हजार कर्मचारियों का डाटा दिया था। इस डाटा को मुख्य सर्वर पर डाल दिया। इससे पदनाम और वेतनमान में गड़बड़ी हो गई।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को पीठासीन अधिकारी बना दिया गया। डाटा भी असुरक्षित हो गया। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. सुदाम खाडे ने ऐसे नोडल अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए कार्यालय प्रमुखों को पत्र लिखा है।
इधर, चुनाव ड्यूटी ने अटका दिए इ-वे बिल, भावांतर भुगतान...
वहीं दूसरी ओर विधानसभा चुनाव में ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों की ड्यूटी भी लगा दी गई है, जो जीएसटी सहित वाहनों की चेकिंग आदि में जुटे हुए हैं। कहा जा रहा है कि इससे जीएसटी के साथ इ-वे बिल का कामकाज प्रभावित होगा।
इसका असर वाणिज्यिक कर विभाग में देखा जा रहा है। यहां संयुक्त आयुक्त राज्य कर से लेकर एलडीसी-यूडीसी महिला-पुरुष की भी ड्यूटी चुनाव में है।
इसी प्रकार प्रदेश में भावांतर भुगतान योजना के तहत फसल खरीदी का काम भी प्रभावित हो रहा है। नतीजतन किसानों के खाते में पैसा पहुंचने जैसे कई काम प्रभावित होंगे।
90प्रतिशत अमला ड्यूटी पर...
वाणिज्यिक कर के 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी चुनाव में है। विभागीय कमिश्नर ने जून में कलेक्टरों से कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखने की मांग की थी। चुनाव ड्यूटी में प्रशिक्षण से चुनाव संपन्न कराने तक चार दिन लगेेंगे।
दो नंबर माल की आवाजाही पर नियंत्रण नहीं रहेगा। मंडी बोर्ड के कर्मियों की ड्यूटी लगाई है। ऐसे में एक माह में मंडियों में आवक ज्यादा रहेगी। किसान परेशान होंगे तो राजस्व पर भी असर दिखेगा।
टैक्स से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगने से रिफंड, रजिस्ट्रेशन, कैंसिलेशन, नोटिस, रिकवरी सहित इ-वे बिल की चैकिंग जैसे काम प्रभावित होंगे। भावांतर का पैसा समय पर किसानों के खाते में नहीं पहुंच सकेगा।
- मुकुल शर्मा, जीएसटी एक्सपर्ट
Published on:
29 Oct 2018 09:57 am
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