
madhyapradesh-mahamukabla-2018
भोपाल. कांग्रेस के क्षत्रपों में विधानसभा की 59 सीटों पर नामों को लेकर असहमति बनी हुई है। इनमें वे सीटें भी शामिल हैं, जहां से भाजपा के मंत्री चुनाव लड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की बुदनी सीट पर भी सस्पेंस बरकरार है। माना जा रहा है कि कांग्रेस ने भाजपा के बड़े चेहरों को घेरने की रणनीति के तहत ही इन सीटों पर उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं। वहीं, भाजपा की पहली सूची में उन उम्मीदवारों के नाम आ चुके हैं, जो कांग्रेस के बड़े नेताओं के खिलाफ उतारे हैं। घेराबंदी करने भाजपा ने पुराने पराजित योद्धाओं को ही उतारा है। पार्टी अमित शाह ने कांग्रेस के गढ़ों को धवस्त करने की रणनीति पर काम करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सूची में भाजपा की किलेबंदी कमजोर दिख रही है।
- यहां तय नहीं कांग्रेस के उम्मीदवार
बुदनी से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने किसे उतारे? यहां कांग्रेस के राजकुमार पटेल और नए चेहरे में अर्जुन आर्य का नाम चर्चा में है।
रहली में मंत्री गोपाल भार्गव के सामने टिकट घोषित नहीं। पिछली बार बृजबिहारी पटेरिया लड़े थे।
बालाघाट में मंत्री गौरीशंकर बिसेन के सामने उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया। पिछली बार के प्रत्याशी उम्मेद लिलहारे की जमानत जब्त हुई थी।
होशंगाबाद में विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा के सामने प्रत्याशी तय नहीं। 2013 में रविकिशोर जायसवाल लड़े थे।
दमोह में मंत्री जयंत मलैया के सामने उम्मीदवार के नाम पर मंथन जारी।
पन्ना में भी घोषित नहीं किया उम्मीदवार। पिछली बार प्रत्याशी मीना सिंह यादव की जमानत जब्त हुई थी।
मंत्री शरद जैन की सीट रही जबलपुर उत्तर का टिकट अभी होल्ड है, पिछली बार यहां से नरेश सर्राफ लड़े थे।
- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के क्षेत्र छिंदवाड़ा सीट पर भी कांग्रेस ने पत्ते नहीं खोले हैं, यहां से भाजपा के चौधरी चंद्रभान सिंह विधायक हैं। यहां पिछली बार दीपक सक्सेना कांग्रेस प्रत्याशी थे।
राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य की गोहद सीट पर टिकट रोका गया है। पिछली बार यहां मेवाराम जाटव लड़े थे।
भोपाल की गोविंदपुरा सीट का टिकट रोका गया। यह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की सीट रही है। यहां पिछली बार कांग्रेस प्रत्याशी गोविंद गोयल थे।
- भाजपा का यहां पराजितों पर दावं
अजय सिंह - पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह की परंपरागत सीट चुरहट पर भाजपा ने शर्देंदू तिवारी को टिकट दिया है। तिवारी 2013 में पराजित हो चुके हैं।
गोविंद सिंह - लहार सीट पर डॉ. गोविंद सिंह छह बार से विधायक हैं। इन 30 सालों में गोविंद सिंह के किले को ढहाने के लिए भाजपा ने कई बार कोशिश की, लेकिन मात नहीं दे पाई। इस बार फिर रसाल सिंह को टिकट दिया गया है, जो पहले हार चुके हैं।
रामनिवास रावत - विजयपुर सीट से पांच बार के विधायक रामनिवास के सामने भाजपा ने सीताराम अवस्थी को उतारा है। सीताराम पिछली बार के पराजित योद्धा है। हालांकि, अभी कांग्रेस ने अभी रावत का नाम घोषित नहीं किया है।
बाला बच्चन - इस बार भाजपा ने राजपुर सीट पर देवी सिंह पटेल को टिकट दिया है। बाला बच्चन के सामने पहले भी देवी सिंह चुनाव हार चुके हैं। बच्चन यहां चार बार के विधायक हैं।
केपी सिंह - पांच बार के पिछोर विधायक केपी सिंह के सामने भाजपा ने प्रीतम सिंह लोधी को टिकट दिया है। लोधी 2013 में हार गए थे।
जयवद्र्धन सिंह - जयवद्र्धन पहली बार के विधायक हैं, लेकिन अपने पिता की परंपरागत सीट राघोगढ़ से चुनाव लड़ते हैं। राघोगढ़ सीट पर तीन दशक से भाजपा घेराबंदी में कमजोर साबित होती आई है। इस बार भूपेंद्र रघुवंशी को नए चेहरे के रूप में उतारा है।
रजनीश सिंह - विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष स्व. हरवंश सिंह के बेटे रजनीश पहली बार के विधायक हैं, लेकिन उनकी सीट केवलारी भी परंपरागत है। यहां इस बार राकेश पाल सिंह को नए चेहरे के रूप में टिकट दिया गया है।
सचिन यादव - पूर्व उपमुख्यमंत्री स्व. सुभाष यादव के बेटे सचिन अपनी परंपरागत सीट कसरावद से विधायक हैं। वे पहली बार के विधायक हैं, लेकिन उनकी परंपरागत सीट पर भी भाजपा दो दशक से कमजोर है। यहां आत्माराम पटेल को भाजपा ने टिकट दिया है। आत्माराम पिछला चुनाव हार गए थे।
Published on:
05 Nov 2018 05:03 am

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