
mahamukabla-2018
रामपुर बाघेलान से राजीव जैन। रामपुर बाघेलान मंत्री हर्ष सिंह और उनके परिवार की परंपरागत सीट रही है। कभी दादा अवधेश प्रताप सिंह विंध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद चुनाव जीतकर पिता गोविंद नारायण सिंह मुख्यमंत्री बने। हर्ष सिंह खुद चार बार विधायक (दो बार कांग्रेस, एक बार समानता दल और एक बार भाजपा) रहे हैं। अब इसी परिवार की चौथी पीढ़ी से उनके बेटे विक्रम सिंह मैदान में हंै। 1985 के बाद से जीत को तरस रही कांग्रेस ने इस ब्राह्मण बाहुल्य सीट पर स्थानीय ब्राह्मण रमाशंकर पयासी को प्रत्याशी बनाकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। 1985 में भी यह सीट कांग्रेस के लिए हर्ष सिंह ने ही जीती थी। बसपा के पूर्व विधायक रामलखन सिंह पटेल अपने प्रभाव और जातिगण समीकरण के भरोसे फिर मैदान में हैं। वे 2008 में हर्ष सिंह को भी पटखनी दे चुके हैं, इसलिए न तो उन्हें प्रत्याशी हल्के में ले रहे हैं, न मतदाता। पिछले तीन चुनाव में यहां मुकाबला भाजपा और बसपा के बीच ही रहा है।
क्षेत्र में विकास, स्थानीय को रोजगार व सिंचाई संसाधन प्रमुख मुद्दे हैं। इलाके में इनकी चर्चा कम और जातियों की ज्यादा है। रीवा और सतना के बीच हाइवे पर बसे रामपुर बाघेलान के लोग तो दस साल से ज्यादा से बनते हुए हाइवे और उड़ती धूल से आजिज आ चुके हैं। अब तो यह हाल है कि सड़क तो उनके लिए मानों कोई मुद्दा ही नहीं है। सज्जनपुर के अमृतलाल ने बताया कि खाद-बीज की कीमत खूब बढ़ी है, नहरों में समय पर पानी नहीं छोड़ा जा रहा। किसान परेशान हैं। परिवर्तन की लहर है, बाकी देखिए क्या होता है। रघुनाथपुर के उग्रसेन सिंह ने कहा कि किसानों के लिए सरकार ने योजनाएं तो कई चलाई पर जमीन पर वाजिब लोगों को लाभ नहीं मिला। वे कहते हैं कि कांग्रेस ने कर्जमाफी का वादा किया, लेकिन उनकी यहां जमीन मजबूत नहीं है। चुनाव सिर्फ वादों से नहीं जीते जाते।
रजरवार के देवशंकर पयासी ने कहा, गांव की सड़क जर्जर है। बारिश में पैदल निकलना भी दूभर हो जाता है। अबेर के मृगेन्द्र सिंह कहते हैं क्षेत्र में परिवर्तन की लहर है। लोगों में नाराजगी है, फिर भी विक्की भइया (विक्रम सिंह)से लोग खुश हैं। लोग मुद्दों की बजाय जाति पर ही मतदान करते हैं। खोहर के विक्रम सिंह का कहना है कि क्षेत्र में सीमेंट फैक्ट्रियां हैं, पर स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिलता। वादा था कि 80 फीसदी कर्मचारी स्थानीय रखे जाएंगे, पर ऐसा नहीं हुआ। पिछले कई चुनाव में कांग्रेस कमजोर रही, अब देखना है कि बदलाव की ये बयार किसे फायदा पहुंचाती है। कर्रा के कमलेश कुशवाहा ने कहा, गांव की सड़क जर्जर है। पुलिया टूट गई थी तो दूसरी बनाने की बजाय मुरुम डालकर चलने लायक बना दिया। गाड़ा के कृष्णपाल दाहिया कहते हैं कि दस साल हो गए पर आज भी एनएच 75 का काम चल रहा है, मंत्री कुछ खास नहीं कर पाए। कांग्रेस भी कमजोर विपक्ष के रूप में दिखी। युवा संतोष कुमार सिंह की नाराजगी रोजगार को लेकर है। वे कहते हैं कि मनकहरी में सीमेंट फैक्ट्री है, जिसकी जमीन फंसती है, उसे ही नौकरी मिलती है, वो भी लेबर या सिक्योरिटी गार्ड की। आप जाकर देख लीजिए 90
फीसदी कर्मचारी बाहरी हैं।
- 15 साल में ये रहे विधायक
2013 हर्ष सिंह, भाजपा
2008 रामलखन पटेल, बसपा
2003 हर्ष सिंह, समानता दल
- विधानसभा प्रोफाइल
मतदाता 236524
पुरुष 124956
महिला 111567
बूथ 223
प्रत्याशी 23
- जातिगत वोट बैंक
ब्राह्मण 52000
पटेल 28000
क्षत्रिय 22000
कुशवाहा 15000
दाहिया 12000
* प्रत्याशियों की ताकत और कमजोरी
- विक्रम सिंह, भाजपा
ताकत : मंत्री पुत्र हैं, रामपुर नगर पंचायत के अध्यक्ष। क्षेत्र के लिए युवा चेहरा हैं, मुद्दों से वाकिफ ।
कमजोरी : मतदाताओं में पिता जितने प्रभावी नहीं। नगर पंचायत अध्यक्ष होने से काम का मूल्यांकन भी।
- रामशंकर पयासी, कांग्रेस
ताकत : लंबे समय सक्रिय, जातिगत गणित में फिट हैं। संगठनात्मक क्षमता मजबूत।
कमजोरी : पार्टी का क्षेत्र में संगठनात्मक ढांचा कमजोर, अन्य जातियों में प्रभाव कम।
- रामलखन पटेल, बसपा
ताकत : क्षेत्र में लगातार सक्रियता। जातिगण समीकरण पक्ष में।
कमजोरी : बसपा वोटर और पटेल समुदाय के अलावा अन्य में स्वीकार्यता कम।
केंद्र व प्रदेश सरकार की हर योजना को अंतिम छोर तक पहुंचाया गया। ग्रामीण सड़कों के निर्माण के मामले में रामपुर बाघेलान विधानसभा प्रदेश के टॉप फाइप क्षेत्र में शामिल है। विकास के आधार पर वोट मांग रहा हूं।
- विक्रम सिंह, भाजपा प्रत्याशी
क्षेत्र के विकास के मामले में भाजपा सरकार लापरवाह रही। मंत्री का गृह क्षेत्र है, उसके बाद भी क्षेत्र विकास कोसों दूर है। स्कूल, शिक्षा, अस्पताल, सड़क क्षेत्र के लिए बेमानी साबित हो रहे हैं। जनता इनसे त्रस्त है।
- रमाशंकर पयासी, कांग्रेस प्रत्याशी
दो बार लोगों ने मेरे काम को देखा है। वो जानते हैं कि मैं हमेशा जनता के बीच रहता हूं। रामपुर किसी एक परिवार तक सिमट कर नहीं रह सकता है। जनता पर भरोसा है कि वो जमीनी नेता को चुनेगी।
- रामलखन सिंह, बसपा प्रत्याशी
Published on:
24 Nov 2018 05:20 am
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