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105 किमी. दूर साइकिल से बेटे को परीक्षा दिलाने लाने वाले मजदूर पिता को मिला देश के बड़े उद्योगपति का साथ

बेटे को अफसर बनाने का सपना देखने वाले मजदूर शोभाराम की मेहनत को महिन्द्रा ग्रुप ने सराहा, बेटे की पढ़ाई खर्चा उठाएगा महिन्द्रा ग्रुप..

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भोपाल. बेटे को अच्छी शिक्षा देकर बड़ा अफसर बनाने का सपना देखने वाले मजदूर पिता शोभाराम का सपना पूरा करने के लिए अब देश के एक बड़े उद्योगपति ने उनका साथ दिया है। देश की नामी ग्रामी कंपनियों में से एक महिन्द्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिन्द्रा ने मजदूर पिता शोभाराम के बेटे को 105 किलोमीटर साइकिल चलाकर स्कूल में परीक्षा दिलाने की खबर मिलने के बाद ट्वीट कर मजदूर पिता के सपने में सहयोग करने की इच्छा जताई है।

महिन्द्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिन्द्रा ने किया ट्वीट
महिन्द्र ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिन्द्रा ने एक अखबार में छपी खबर को पढ़ने के बाद मजदूर पिता के बेटे को अफसर बनाने में सहयोग करने की पहल की है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि एक वीर माता-पिता, जो अपने बच्चों के लिए बड़े सपने देखते है, ये वे आकांक्षाएं हैं जो देश की प्रगति को बढ़ावा देती हैं। हम @MahindraRise इसे एक उदय कहानी कहते हैं। हमारे फाउंडेशन को आशीष की आगे की शिक्षा का समर्थन करने के लिए विशेषाधिकार प्राप्त होगा।

105 किमी. साइकिल चलाकर पहुंचे थे परीक्षा केन्द्र
बता दें कि बीते दिनों मनावर तहसील के ग्राम बयड़ीपुरा के रहने वाले मजदूर शोभाराम अपने बेटे आशीष को दसवीं क्लास की परीक्षा दिलाने के लिए 105 किमी तक साइकिल चलाकर लेकर आए थे। तब पिता शोभाराम ने बताया था कि वो मजदूर हैं और नहीं चाहते कि उनका बेटा भी मजदूर बने। सपना है कि बेटा अधिकारी बने इसलिए मेहनत मजदूरी कर पढ़ा रहा हूं। बेटा आशीष भी पढ़ने में होशियार है लेकिन लॉकडाउन के कारण इस बार उसकी पढ़ाई प्रभावित हो गई। ट्यूशन भी नहीं लगवा पाया इसलिए तीन विषयों में उसके पेपर रुक गए। बेटे को परीक्षा दिलाने के लिए धार लाना था लेकिन बसें बंद थीं और इतने पैसे भी नहीं थे कि किराए का वाहन कर पाता। एक दोस्त से 500 रुपए उधार लिए और घर से तीन दिन का राशन बांधकर साइकिल देकर बेटे को परीक्षा दिलाने के लिए निकल पड़ा।

कलेक्टर ने भी किया सहयोग
कलेक्टर आलोक कुमार सिंह ने भी इस मामले में तत्काल संज्ञान लिया था और जिला शिक्षा अधिकारी को ये निर्देश दिए थे कि छात्र एवं उसके पिता को तत्काल सकारात्मक सहयोग प्रदान करते हुए उनके रहने ठहरने एवं भोजन की उचित व्यवस्था कर परीक्षा हेतु छात्र को उचित वातावरण दिया जाए। साथ ही परीक्षा के बाद पिता एवं छात्र को उनके गंतव्य तक सुरक्षित रूप से पहुंचाने के निर्देश भी दिये हैं। कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा पिता-पुत्र को शासकीय मोतीलाल नेहरू छात्रावास धार में ठहराया गया एवं वहीं पर उनके भोजन की व्यवस्था भी की गई है।

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