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तीन सालों में मक्के का रकबा और उत्पादन बढ़ा तो बीज के दाम भी 625 रुपए तक महंगे हो गए

कृषि विभाग ने मक्के का रकबा बढ़ाकर इस साल 1 लाख 65 हजार हेक्टेयर कर दिया है, जो पिछले साल से 3 हजार 800 हेक्टेयर अधिक है। मक्के का रकबा बढऩे के कारण मक्का बीज की दरों में भी वृद्धि हो गई है।

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खुले बाजार में भी महंगा हुआ बीज

Seeds became expensive even in the open market

बैतूल। बीते तीन सालों से जिले में मक्के का रकबा तेजी से बढ़ा है। सोयाबीन की जगह अब किसान मक्के के उत्पादन में ज्यादा रूचि दिखा रहे हैं। यही कारण है कि कृषि विभाग ने मक्के का रकबा बढ़ाकर इस साल 1 लाख 65 हजार हेक्टेयर कर दिया है, जो पिछले साल से 3 हजार 800 हेक्टेयर अधिक है। मक्के का रकबा बढऩे के कारण मक्का बीज की दरों में भी वृद्धि हो गई है। सरकार मक्के के बीज में जो अनुदान किसानों को देती थी, उसमें भी कटौती कर दी है। पिछले साल जहां मक्का का बीज किसानों को 1600 रुपए प्रति क्विंटल में मिला था। वहीं इस साल बीज की दरों में 625 रुपए तक की बढ़ोत्तरी हो गई है। अब किसानों को 2225 रुपए प्रति क्विंटल पर बीज खरीदना पड़ेगा। वहीं जिले में सबसे ज्यादा उत्पादन होने वाली सोयाबीन बीज की दरों में 150 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट आई है। सोयाबीन का रकबा भी इस साल यथावत रखा गया है। जिसमें किसी प्रकार की कोई वृद्धि नहीं की गई है।

मक्का बीज 625 रुपए महंगा हुआ
जिले में मक्का उत्पादन का रकबा बढऩे से बीज के दाम भी बढऩे लगे हैं। वर्ष 2021 में जहां मक्का का उत्पादन 1 लाख 50 हजार 500 हेक्टेयर में होता था। वह वर्ष 2022 में बढ़कर 1 लाख 61 हजार 200 हेक्टेयर और वर्ष 2023 में बढ़कर 1 लाख 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्र हो गया। जिले में मक्का उत्पादन अधिक मात्रा में होने के कारण बीज निगम ने मक्के पर दी जाने वाली अनुदान की राशि को घटाकर 2225 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है। जबकि पिछले साल मक्का बीज पर किसानों को 3000 रुपए अनुदान दिया गया था। इस साल मक्का बीज की दरें 4450 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है, जो पिछले साल की तुलना में 150 रुपए प्रति क्विंटल कम हैं, लेकिन शासन की तरफ से दिए जाने वाले अनुदान राशि में कटौती कर दिए जाने से किसानों को 625 महंगा बीज मिलेगा। इसी प्रकार हाईब्रिड क्वालिटी का 10 वर्ष तक की अवधि वाला मक्का बीज 11 हजार 470 रुपए प्रति क्विंटल मिलेगा। इसमें 3000 रुपए का अनुदान है। किसानों को 8 हजार 470 रुपए प्रति क्विंटल में पड़ेगा।

सोयाबीन बीज की दरो में 150 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट
बीज निगम ने खरीफ वर्ष 2023 में किसानों के लिए बीज की विक्रय दरें घोषित कर दी है। सोयाबीन बीज के रेट प्रति क्विंटल 8950 के लगभग निर्धारित किए हैं। हालांकि इसमें शासन ने हजार रुपए का अनुदान भी रखा है,लेकिन बीज खरीदने पर किसानों को 8 हजार 950 रुपए प्रति क्विंटल की दर ही भुगतान करना होगा। बीज अनुदान की राशि बाद में डीबीटी(डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर)के माध्यम से किसानों के खाते में आएगी। देखा जाए तो सोयाबीन बीज की दरों में हर साल उतार-चढ़ाव आता रहा है। वर्ष 2020 में सोयाबीन बीज की दर 6650 रुपए प्रति क्विंटल थी जो वर्ष 2022 में बढ़कर 10,100 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गई थी। वहीं इस साल यह 8 हजार 950 रुपए प्रति क्विंटल है। यह दरें सोयाबीन बीज की 15 वर्ष तक की अवधि वाली फसल के लिए हैं। जबकि 15 वर्ष से अधिक अवधि के सोयाबीन बीज पर किसी प्रकार का अनुदान नहीं दिया गया है।

धान में वैरायटी के आधार पर दरें कम-ज्यादा
बीज निगम में धान में वैरायटी के आधार पर बीज की अलग-अलग दरें निर्धारित की है। इस साल खरीफ सीजन में दस वर्ष तक की अवधि धान सुगंधित की दरें 5000 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित की गई है। जिसमें 1500 रुपए अनुदान दिया गया है।किसानों को यह 3500 रुपए प्रति क्विंटल पड़ेगी। धान सुगंधित दस वर्ष से अधिक अवधि का बीज 5000 हजार रुपए प्रति क्विंटल और अनुदान 500 रुपए प्रति क्विंटल सहित किसानों के लिए विक्रय दर 4500 रुपए की गई है। धान मोटी 4350 रुपए और विक्रय दर 2850 रुपए रखी गई है। जिसमें अनुदान 1500 रुपए तथा दस वर्ष से अधिक अवधि की धान मोटी फसल पर 500 रुपए अनुदान सहित 3850 रुपए किसानों के लिए विक्रय दरें तय की गई है। दस वर्ष तक अवधि वाली धान पतली की दरें 4870 रुपए और अनुदान 2000 रुपए सहित किसानों के लिए विक्रय दर 2870 रुपए तय की गई है। धान पतली दस वर्ष से अधिक अवधि की धान बीज की किसानों के लिए विक्रय दर 4870 रुपए और अनुदान 1000 रुपए दिया गया है।
इनका कहना
- बीज निगम ने खरीफ सीजन के लिए बीज की दरें निर्धारित कर दी गई है। सोयाबीन बीज की दरों में वृद्धि नहीं हुई है। मक्का बीज के अनुदान में कटौती की गई है। इस वजह से बीज महंगा हुआ है। बीज खरीदने पर अनुदान की राशि किसानों के खातों में आएगी।
- रामबीर राजपूत, सहायक संचालक कृषि बैतूल।