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माखन सिंह जाटव हत्याकांड: बीजेपी के पूर्व मंत्री ने किया सरेंडर

पूर्व मंत्री ने न्यायाधीश सुरेश सिंह के सामने किया सरेंडर...

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भोपाल

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Amit Mishra

Apr 05, 2019

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माखन सिंह जाटव हत्याकांड: बीजेपी के पूर्व मंत्री ने किया सरेंडर

भोपाल। माखन सिंह जाटव हत्याकांड के मामले में फंसे पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य ने शुक्रवार को भोपाल की विशेष अदालत में सरेंडर कर दिया। अग्रिम जमानत रद्द होने के बाद पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य ने न्यायाधीश सुरेश सिंह के सामने सरेंडर किया। इस दौरान उनके वकील भी उनके साथ मौजूद रहे।

हालांकि थोड़ी देर बाद ही पूर्व मंत्री लाल सिंह आर्य को कोर्ट से जमानत मिल गई। अब अगली सुनवाई 27 अप्रैल को होनी है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

भोपाल की विशेष कोर्ट में किया था शिफ्ट
कांग्रेस के विधायक रहे माखनसिंह जाटव की 2009 में हुए हत्या से जुड़े प्रकरण की सुनवाई 13 फरवरी को भोपाल की विशेष कोर्ट में शिफ्ट कर दिया गया था। इसके पहले मामले की सुनवाई इंदौर की सीबीआई कोर्ट में चल रही थी और इसे यहां से शिफ्ट करने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका पर कोर्ट ने पिछले दिनों सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। कोर्ट ने कहा है चूंकि हत्याकांड भिंड के नजदीक हुआ था, इसलिए मामले की सुनवाई का न्याय क्षेत्र भोपाल होगा। हत्याकांड में प्रदेश के पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य को भी आरोपी बनाया गया है।


ये है मामला...
मालूम हो विधायक माखनलाल जाटव की गोहद के छरेंटा गांव में 13 अप्रैल 2009 को रात करीब 8 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस वक्त वे कांग्रेसी प्रत्याशी भागीरथ प्रसाद के समर्थन में हुई सभा से लौट रहे थे। इस मामले में गार्ड की रिपोर्ट पर नारायण शर्मा, शेरा उर्फ शेरसिंह, पप्पू उर्फ मेवाराम सेठी कौरव सहित अन्य को आरोपी बनाया था। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी और कोर्ट के आदेश पर पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य को भी प्रकरण में आरोपी बनाने के आदेश दिए गए थे।

सुनवाई के लिए भिंड की सेशन कोर्ट भेजा...
हत्या भले ही भिंड में हुई लेकिन सीबीआई का न्याय क्षेत्र इंदौर होने की वजह से तत्कालीन सीबीआई मजिस्ट्रेट शुभ्रासिंह की कोर्ट में इस मामले में चालान पेश किया। 10 जनवरी 2011 को मजिस्ट्रेट शुभ्रासिंह ने इस केस को कमिट करते हुए इस सुनवाई के लिए भिंड की सेशन कोर्ट भेज दिया। सीबीआई ने मजिस्ट्रेट के इस आदेश को चुनौती देते हुए 2011 में हाई कोर्ट में रिविजन प्रस्तुत की। इसमें कहा सीआरपीसी के प्रावधानों के मुताबिक इस मामले की सुनवाई इंदौर के सेशन कोर्ट में ही होना चाहिए। जबकि अन्य पक्ष केस की सुनवाई भोपाल में चाहता था।