सुरंग जैसे संकरे स्थानों में इसके उपयोग को बढ़ावा दिया गया। वहीं एक छोटी डोरी से लटकाकर इसे सामान्य दीए की तरह घर में भी यूज किया जाता था...
भोपाल। मानव संग्रहालय में अगस्त माह के प्रादर्श 'सुरंग दीया' पर एग्जीबिशन चल रही है। सुरंग दीया का उपयोग सुरंगों में आवागमन के समय किया जाता था। इसे जमीन पर लुढ़का-लुढ़काकर यूज किया जाता था। इससे सुरंग में छिपे हुए शत्रु अथवा हानिकारक जीव-जंतु की पहचान भी होती थी। सुरंग जैसे संकरे स्थानों में इसके उपयोग को बढ़ावा दिया गया। वहीं एक छोटी डोरी से लटकाकर इसे सामान्य दीए की तरह घर में भी यूज किया जाता था। ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार मुगल रानियों द्वारा अपने हमामखाने में जल क्रीड़ा के समय सुरंग दीए का प्रयोग सूक्ष्म प्रकाश के लिए किया जाता था।
इसकी इसी कुशलता ने सुरंग जैसे सकरे स्थानों में इसके उपयोग को बढ़ावा दिया। दूसरे उपयोग के रूप में सुरंग के अलावा एक छोटी डोरी से लटकाकर इसे सामान्य दीये की तरह घर के भीतर या बाहर कर सकते थे। ऐतिहासिक संदर्भों में मुगल रानियों के अपने हमामखाने में जलक्रीड़ा के समय सुरंग दीये का उपयोग सूक्ष्म प्रकाश के लिए किए जाने के तथ्य भी मिले हैं।
ये है सुरंग दिया
* सुरंग दीया लोहे की पत्तियों से निर्मित एक गोल पिंजरेनुमा संरचना है।
* प्रदर्शित सुरंग दीये की बाहरी पिंजरेनुमा संरचना कुल 27 पत्तियों से बनी है।
* यह गोलाकार पिंजरा मध्यभाग से खुलकर दो अद्र्धगोलों में बंट जाता है।
* दोनों अद्र्धगोले आपस में दो स्थानों पर लोहे के पिन से जुड़े रहते है,
* इन पिनों को सरलता से निकाल कर दीये में तेल डाला जा सकता है।
* गोलाकार पिंजरे के आंतरिक भाग में दो टोटियों वाला फ्लैट दीपक/तेल संग्रहण पात्र होता है। एक टोटी से तेल डालते हैं व एक टोटी में बाती लगाकर दीपक को प्रज्ज्वलित किया जाता है।
* सामान्य उपयोग हेतु बाहरी सतह के एक छोर पर एक छोटे से आयरन रिंग को जोड़ दिया जाता है, जिससे इसे पकड़कर लटकाया जा सके।
* इसके बाद मध्य में स्थित तेल संग्रहण की कटोरी में सरसों का तेल भरकर कपास की मोटी बाती लगा दी जाती है।
* बत्ती प्रज्ज्वलित कर दिये के ऊपरी आवरण को बंद कर दिया जाता है।