खींच रहा परदेस: 12 वर्ष में 16.21 लाख से ज्यादा ने छोड़ी इंडियन सिटीजनशिप
भोपाल. अपनी माटी छोड़ लोगों को विदेशी सुख-सुविधाएं रास आ रही हैं। पैसा, विलासितापूर्ण जीवन, पढ़ाई, अवसर जैसी चीजों की वजह से भारतीयों को परदेस भा रहा है। वे वहीं बस रहे हैं। चौंकाने वाला आंकड़ा ये है कि औसतन 1.35 लाख से ज्यादा लोग हर साल भारतीय नागरिकता (Indian Citizenship) छोड़कर दूसरे देशों की नागरिकता ले रहे हैं। अकेले वर्ष 2022 में 1.83 लाख से ज्यादा लोगों ने भारतीय नागरिकता त्याग दी। यह संख्या 12 वर्ष में सबसे ज्यादा है।
वहीं के हो गए
दुनिया के कई देशों में दोहरी नागरिकता का प्रावधान है, लेकिन भारत में नहीं। यदि कोई भारतीय दूसरे देश की नागरिकता लेता है तो भारत की नागरिकता स्वत: खत्म हो जाती है। भारतीय नागरिकता त्यागने की ये भी एक बड़ी वजह है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 2021 में सबसे ज्यादा 78,284 भारतीयों ने अमरीका की नागरिकता ली। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया 23,533, कनाडा 21,597 और फिर 14,637 ने यूनाइटेड किंगडम की नागरिकता ली।
(31 अक्टूबर 2022 तक)
ये हैं मुख्य वजह
1- काम करने का माहौल अच्छा है। काम के हिसाब से अच्छी आमदनी।
2- कोई नौकरी के लिए विदेश गया। वहां रहना अच्छा लगा तो बसने का फैसला किया।
3- रहन-सहन भारत से कहीं बेहतर है।
4- बच्चों की पढ़ाई की खातिर।
5- छोटे देशों में भी बिजनेस, व्यापार के लिए बेहतर सुविधाएं।
ओसीआइ कार्ड का सहारा
विदेश के हो गए, फिर भी भारत से जुड़े रहना है तो ऐसे में overseas citizen of india (OCI) कार्ड बेहद मददगार है। यह कार्ड एक तरह से तय शर्तों के साथ भारत में जीवनभर रहने, काम करने और सभी तरह के आर्थिक लेन-देन की सुविधा देता है। बिना वीजा के भारत आ सकते हैं, लेकिन ऐसा व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता। मतदान का अधिकार नहीं। सरकारी नौकरी नहीं। खेती के लिए जमीन भी नहीं खरीद सकता।