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जानिए क्या मिल सकता है नानी की जमीन पर नवासे का हक! 

दरअसल मामला आदिवासी राजगौड़ परिवार का है। नानी ने अपने नवासे को 13 एकड़ जमीन विरासत में दी थी। 

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Anwar Khan

Sep 26, 2016

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भोपाल। मप्र राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग ने राजस्व महकमे से जानकारी मांगी है कि नानी की दी हुई जमीन पर नवासे का हक है या नहीं। दरअसल मामला आदिवासी राजगौड़ परिवार का है। नानी ने अपने नवासे को 13 एकड़ जमीन विरासत में दी थी। दस्तावेजों में हेरफेर कर एक शिक्षक द्वारा जमीन बेचे जाने के बाद यह मामला आयोग में पहुंचा है। इस पर आयोग ने कलेक्टर से जमीन के मालिकाना हक की जानकारी और रिकॉर्ड तलब किया है। मामला रायसेन जिले के उदयपुरा के गोरखपुर राजवंश परिवार से ताल्लुक रखने वाले भानू प्रताप से जुड़ा है। फरियादी ने दायर प्रकरण में बताया कि उनकी दादी गुलाब बाई ने दूसरी जाति (आदिवासी नहीं) के संग्राम सिंह से प्रेम विवाह किया था। बाद में उनके पिता अमित सिंह की नानी नन्नाबाई ने वसीयतनामे के जरिए उन्हें 13 एकड़ जमीन दी थी। हालांकि, इसका कहीं उल्लेख नहीं है कि संग्राम सिंह किस जाति के थे। गुलाब बाई और संग्राम सिंह दोनों की मौत दस साल पहले हो चुकी है। वर्ष 2010 में जमीन छिनने के बाद से दुखी भानू की मां सविता ने आत्महत्या कर ली थी। उनके पिता अमित सिंह की भी दो साल पहले बीमारी के चलते मौत हो चुकी है।

गड़बड़ी के आरोप
भानू प्रताप का आरोप है कि गांव के एक शिक्षक ने हेरफेर कर वर्ष 2010 में उनके पिता अमित सिंह राजगौड़ के नाम दर्ज जमीन में जाति राजपूत कर इसे विमला साहू के नाम करवा दिया, जबकि वसीयतनामे के अनुसार बही खाते में जाति राजगौड़ दर्ज थी। जमीन अजजा वर्ग की होने से इसके लिए सरकारी अनुमति नहीं ली गई। वहीं खसरा नंबर में से अमित सिंह के पिता संग्राम सिंह की जाति राजपूत लिख दी गई।

वसीयत में जमीन नन्नाबाई राजगौड़ से अमित राजगौड़ के नाम दर्ज थी। बही के पुराने दस्तावेज में वारिस का नाम अमित सिंह राजगौड़ दर्ज है। जमीन बेचे जाने के बाद के दस्तावेज में वारिस का नाम अमित सिंह वल्द संग्राम सिंह राजपूत दर्ज किया गया है।

0 मामले में रायसेन कलेक्टर एवं एसडीएम को पत्र लिखकर जानकारी मांगी गई है। इसके बाद ही निर्णय हो सकेगा।
संजय वाष्र्णेय, सचिव अजजा आयोग

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