
भोपाल। बंजर और सूखे वन भूमि को मटका तकनीक से हरा-भरा किया जाएगा है। इस तकनीक से एक हेक्टेयर क्षेत्र में कम से कम 50 बरगद, पीपल, गूलर सहित अन्य प्रजाति के पेड़ लगाए जाएंगे। इस तरह का पहला प्रयोग मुरैना जिले के बामसौली क्षेत्र में 35 हेक्टेयर क्षेत्रफल में किया जा रहा है।
प्रयोग सफल होने के बाद करीब तीन सौ अलग-अलग वन क्षेत्रों की बंजर भूमि जंगल तैयार किए जाएंगे।
मुरैना जिले में तीन सौ हेक्टेयर का जंगल खाली है, यहां पेड़ नहीं है। हर साल बारिश में प्लांटेशन किया जाता है, लेकिन ये पौधे मार्च से पहले सूख जाते हैं। क्योंकि यहां की मिट्टी बंजर, रेतीली और पथरीली है।
अब यहां पौधरोपण के साथ ही उसके बगल में एक मटका भी जमीन के अंदर गाड़ दिया जाएगा। पौधे के जिस हिस्से की तरफ मटका रखा जाएगा, उसी हिस्से में छोटे-छोटे छेंद किए जाएंगे, जिससे पौधों को पर्याप्त मात्रा में पानी मिलता रहे। बारिश के बाद मटके के माध्यम से पौधों को पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंचाने का काम किया जाएगा।
मटके में हर 10 से 15 दिन के अंदर टैंकरों के माध्यम से पानी भरने की व्यवस्था की जाएगी। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह पौधे जैसे-जैसे बड़े होते चले जाएंगे, वैसे-वैसे अपनी जड़ों से मटके को कवर करते जाएंगे। कुछ समय बाद पेड़ों की जड़े मटके को पूरी तरह से कवर कर लेंगे।
पेड़ बड़ा होने के बाद उसे फिर अलग से अलग से पानी की जारूरत नहीं पड़ेगी। इस क्षेत्र में बरगद, पीपल के अलावा उन पौधों को लगाया जाएगा, जो पथरीली जमीनों में होते हैं। मटका तकनीक से ३५ हेक्टेयर में प्लांटेशन किया जाएगा, इस प्रोजेक्ट के लिए वन विभाग ने करीब 29 लाख रुपए बजट रखा है।
बामसौली का पूरा क्षेत्र बंजर
मुरैना जिले के सौ हेक्टेयर का बामसौली क्षेत्र पूरी तरह से बंजर है। यहां करधई के पेड़ हैं, लेकिन इसे बकरियां खा जाती है, जिससे यह पेड़ बड़े नहीं हो पाते हैं। ये पेड़ इतनी ऊंचाई तक भी नहीं जाते हैं जिससे वे बड़े होने पर जंगल का रूप ले सके। बन विभाग इन पेड़ों को बचाने के लिए फेंसिंग कर रहा है इसके साथ ही इसकी सुरक्षा के लिए ग्रामीणों की एक समिति बना रहा है। यह समिति यहां होने वाले प्लांटेशन के देख-रेख के साथ उसमें पानी डाल सके।
क्यों लगा रहे हैं पीपल-बरगद के पौधे
बरगद और पीपल के पौधे लगाने के पीछे वन विभाग के दो उद्देश्य हैं। पहले यह है कि लोगों की इन पर धार्मिक आस्था है और दूसरा यह है कि कम पानी और पथरीली जमीनों पर भी हमेशा हरे-भरे रहते हंै। इसके अलावा इसमें पानी रोकने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है। इसके चलते यहां अन्य पेड़-पौधे तैयार होंगे और इससे उस क्षेत्र का जल स्तर भी ऊपर आएगा। इसके साथ ही इन पेड़ों के होने से इस क्षेत्र के तापमान भी गिरावट आएगी।
Published on:
12 Aug 2019 10:00 am
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