कोहेफिजा के पास पहले से बना हुआ है महापौर आवास...
भोपाल. पूर्ववर्ती सरकार में नियम-कानूनों को किस कदर दरकिनार किया जाता रहा, इसका एक और उदाहरण महापौर को 74 बंगला क्षेत्र में आवंटित शासकीय बंगला है। पूरे प्रदेश में भोपाल महापौर को आवंटित शासकीय बंगला अपवाद बना हुआ है। नगर निगम के इतिहास में पहली बार मंत्री को मिलने वाला बंगला किसी महापौर को दिया गया है। ऐसा तब किया गया है, जब कोहेफिजा में नगर निगम के पास महापौर बंगला पहले है। इससे पूर्व भी सभी महापौर नगर निगम के ही अपने बंगले में रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि नगर निगम के पास अपना खुद का महापौर आवास है। यह आवास कोहेफिजा क्षेत्र में स्थित है। आलोक शर्मा से पूर्व के महापौर इसी बंगले में रहे हैं। पहली बार महापौर आलोक शर्मा ने 74 बंगला क्षेत्र में पत्रकार भवन के पास बी-32 नम्बर बंगला दिया गया। इस बंगले में महापौर ने भी अपने तरीके से निर्माण कराया। बंगले के अंदर सड़क बनवाने के लिए कई पेड़ काट डाले गए। इस दौरान पत्रकार भवन की पाइपलाइन फूट गई थी और छज्जा भी टूट गया था। इसका विरोध जब स्थानीय लोगों ने किया तो पता चला कि तीन पेड़ काटने की परमीशन की आड़ में कई वर्ष पुराने नौ पेड़ों को काट डाला गया था। इस में भी जिम्मेदार अधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।
केवल भोपाल है अपवाद
उज्जैन, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर आदि में महापौर के लिए नगर निगम के अपने निवास ही आवंटित हैं। इस मामले में केवल भोपाल महापौर ही अपवाद हैं। सवाल यह है कि यहां भी नगर निगम का महापौर आवास पहले से है और पूर्व महापौर उसमें रहते भी आए हैं तो किन परिस्थितियों में मंत्री वाला शासकीय बंगला महापौर को दिया गया?
किस नियम के तहत दिया बंगला
महापौर आलोक शर्मा को किन नियमों के तहत मंत्री वाला शासकीय बंगला आवंटित किया गया है, इस सवाल का जवाब देने से अधिकारी कतरा रहे हैं। कुछ अधिकारियों ने मीटिंग का मैसेज भेजकर कॉल काट दिया और कुछ ने प्रश्न सुनते ही इसका जवाब देने में अक्षम बताते हुए किनारा कर लिया। इस बारे में महापौर आलोक शर्मा का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नम्बरों पर संपर्क किया गया तो नेटवर्क लगातार स्विच ऑफ बताता रहा।
मंत्रियों के स्तर के बंगलों का आवंटन गृह विभाग से होता है। इस बारे में आप वहीं से जानकारी हासिल कर सकते हैं।
एसआर नायर, ज्वाइंट डायरेक्टर-संपदा