
Ravana
भोपाल। विजयदशमी बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। रावण को लेकर भी कई अलग-अलग मान्यताएं बताई जाती हैं। रावण के 10 सिर को लेकर भी कई कहानियां हैं। कुछ लोग मानते हैं कि रावण के दस सिर भम्र थे। वहीं, कुछ लोग रावण के दस सिर वेद और दर्शन होने की बात मानते हैं।
दशानन के सिर की मान्यता
रावण का नाम सुनते ही सभी के दिमाग में दस सिर वाली छवि आती है। लेकिन रावण के दस सिर को लेकर भी अलग-अलग बातें कही जाती हैं। कुछ लोगों का कहना है कि रावण के दस सिर की कहानी झूठी है। रावण के 10 सिर सिर्फ भम्र हैं। कुछ लोगों के अनुसार रावण के दस सिर थे। कहते हैं कि रावण छह दर्शन और चार वेदों का ज्ञाता था, इसलिए उसके दस सिर थे। इसी कारण उसे दशानन और दसकंठी भी कहा जाता है।
भोलेनाथ को दी बलि
रावण दहन की परंपरा है कि इस दिन दस बुराईयों का अंत होता है। रावण भगवान शिव का बड़ा भक्त था। और उसने भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। जब भगवान प्रकट नहीं हुए तो उन्हें प्रसन्न करने के लिए उसने अपने सिर की बलि दे दी थी।
दस सिर बुराई का प्रतीक
रावण के दस सिरों को बुराई का प्रतीक माना जाता है। हर सिर का अलग अर्थ है। क्रोध, काम, लोभ, मोह, द्वेष, घृणा, पक्षपात, अंहकार, व्यभिचार और धोखा सभी रावण के दस सिर के अर्थ हैं। कुछ धार्मिक ग्रंथों में ऐसा भी कहा गया है कि रावण गले में नौ मणियों की माला पहने रहता है और इन्हें ही दस सिर के रूप में दिखाकर भम्र पैदा करता था।
Published on:
05 Oct 2022 05:22 pm
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