
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित आज दुनियाभर में क्रिसमस पर्व मनाया जा रहा है। दुनिया के इस सबसे बड़े त्योहार को मनाने में ईसाई समाज के साथ ही अन्य समाजजन भी पीछे नहीं हैं। ईसाई दोस्तों के साथ त्योहार को सेलिब्रेट करने के लिए उनके अन्य दोस्त भी जुटे हुए हैं। भोपाल के सबसे पुराने जहांगीराबाद सेंट फ्रांसिस असिसि कैथेड्रल चर्च में भी पर्व की धूम है। इसे भोपाल शहर में कैथोलिक ईसाई समुदाय का पहला चर्च माना जाता है। इसे पोप पॉल चतुर्थ ने आर्च डायसिस का दर्जा प्रदान किया है। इस चर्च में रविवार रात प्रभु यीशु के जन्म का उत्सव मनाया गया।
सुबह साढ़े नौ बजे से विशेष प्रार्थना
शहर के प्रोटेस्टैंट चर्च में सोमवार को सुबह साढ़े नौ बजे से विशेष प्रार्थना शुरू हुई यह प्रार्थना दोपहर 12 बजे तक चलेगी। गोविंदपुरा स्थित सेंट जोंस चर्च के नवनिर्मित भवन में रविवार को क्रिसमस पर विशेष प्रार्थना हुई और कैंडिल रैली निकाली गई। चर्च के फादर अनिल मार्टिन ने बताया, शहर के प्रोटेस्टैंट चर्चों में सुबह साढ़े नौ बजे से दोपहर १२ बजे तक प्रार्थना होंगी।
आयोजित की जाएगी, साथ ही क्रिसमस पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य नाटिका आदि कार्यक्रम होंगे।
25 दिसंबर को नहीं हुआ था ईशु का जन्म
25 दिसंबर को ईसाई समुदाय के लोग यीशू मसीह के जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं। मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि इस दिन ईसा मसीह का का जन्म नहीं हुआ था। कहा जाता है कि उनका जन्म अक्टूबर में हुआ था, लेकिन फिर भी ईसा मसीह का जन्मदिन मनाने के लिए इस दिन को चुना गया। बताया जाता है चौथी शताब्दी से पहले ईसाई समुदाय इस दिन को त्योहार के रुप में नहीं मनाते थे। मगर, चौथी शताब्दी के बाद गैर ईसाइयों के साथ सूर्य के उत्तरायण में आने के उत्सव के साथ 25 दिसंबर को बड़े दिन के रूप में मनाया जाना लगा।
आज से शुरू हुआ 12 दिनी उत्सव
25 दिसंबर को हर साल क्रिसमस डे के रुप में मनाया जाता है। ईसाई समुदाय की मान्यता के अनुसार क्रिसमस से रौशनी का आरंभ होता है। क्रिसमस का पर्व 12 दिनों तक मनाए जाने की परंपरा है। ये बात बहुत ही कम लोग जानते हैं, लेकिन क्रिसमस का पर्व 25 दिसंबर से शुरु होकर 5 जनवरी तक रहता है।
25 दिसंबर यानि पहले दिन के लिए मान्यता है कि इस दिन यीशू का जन्म हुआ था।
26 दिसंबर को बॉक्सिंग दिन के नाम से भी जाना जाता है। इसे सेंट स्टीफंस डे का नाम दिया जाता है। इन्हें पहला ईसाई शहीद माना जाता है, जिन्होंने धर्म के विश्वास के लिए जान दी थी।
27 दिसंबर को सेंट जॉन का दिन होता है। ये यीशू से प्रेरित माने जाते हैं।
28 दिसंबर को पवित्र और निर्दोष लोगों को याद करने का दिन होता है। इस दिन लोग उन बच्चों के लिए प्रार्थना करते हैं जिन्हें राजा हेरोद ने यीशू को ढूंढते हुए मार दिया था।
29 दिसंबर यानि 5वें दिन को सेंट थॉमस बेकेट को याद किया जाता है। वह 12वीं शताब्दी में कैंटरबरी के आर्कबिशप थे। चर्च पर राजा के अधिकार को चुनौती देने के कारण उन्हें 29 दिसंबर को उनकी हत्या कर दी गई थी।
30 दिसंबर को सेंट ईगविन ऑफ वर्सेस्टर को याद किया जाता है।
31 दिसंबर इस दिन को नए साल से पहले की शाम भी कहा जाता है। पोप सिलवेस्टर प्रथम ने पारंपरिक रुप से इस दिन को मनाया था। इंग्लैंड में इस दिन कई पारंपरिक खेल प्रतियोगिताएं होती हैं। ईस्ट यूरोपीयन देशों में आज भी न्यू ईयर इव को कई बार सिलवेस्टर के नाम से जाना जाता है।
01 जनवरी यानि क्रिसमस पर्व का आठवां दिन यीशू की मां मैरी को समर्पित किया जाता है।
02 जनवरी को चौथी सदी के ईसाई ‘सेंट बासिल द ग्रेट’ और ‘सेंट ग्रेगरी नाजियाजेन’ को याद किया जाता है।
03 जनवरी को यीशू का नामकरण किया गया। इस दिन जीसस से प्रार्थना की जाती है।
04 जनवरी यानि क्रिसमस के 11वें दिन सेंट एलिजाबेथ एन सीटन को समर्पित किया जाता है। ये अमेरिका की पहली संत मानी जाती हैं।
05 जनवरी यानि क्रिसमस पर्व के आखिरी दिन को एपिफनी शाम के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन को सेंट जॉन न्यूमैन समर्पित किया जाता है इन्हें अमेरिका का पहला बिशप माना जाता है।
Updated on:
25 Dec 2017 05:46 pm
Published on:
25 Dec 2017 11:20 am
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