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‘5 दिन पहले नासिक से साइकिल से चला हूं, घर पहुंचने में अभी 6 दिन लगेंगे’

महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में फंसे मध्य प्रदेश के मजदूर अब साइकिल के सहारे अपने घर के लिए रवाना हो गए हैं।

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migrant labourers of MP

'5 दिन पहले नासिक से साइकिल से चला हूं, घर पहुंचने में अभी 6 दिन लगेंगे'

भोपाल. कोरोना ने रोजगार पहले ही छिन लिया है, लॉकडाउन की वजह से हजारों मजदूर देश के दूसरे राज्यों में फंसे हैं। अब इनके सामने रोटी की भी संकट है। लॉकडाउन वन के बाद इन्हें लग रहा था कि घर पहुंचने के लिए ट्रेनें शुरू हो जाएंगी। मगर लॉकडाउन 2 के साथ ही इनका सब्र का बांध टूट गया है। महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में फंसे मध्य प्रदेश के मजदूर अब साइकिल के सहारे अपने घर के लिए रवाना हो गए हैं।

मध्यप्रदेश के सतना जिले के बहुत सारे मजदूर महाराष्ट्र के नासिक में फंसे हुए थे। सतना यूपी बॉर्डर से सटा हुआ है। मजदूरों के पास नासिक में रुकने की अब कोई वजह नहीं थी और न ही घर तक पहुंचने के लिए कोई साधन। उसके बाद दर्जनभर मजदूर अपने परिवार को लेकर वहां से साइकिल से ही चल दिए।

पांच दिन पहले नासिक से चला हूं

नागपुर पहुंचे सतना जिले के ये मजदूर वहां से साइकिल या फिर पैदल ही घर की ओर बढ़ रहे हैं। नासिक से साइकिल से चले एक मजदूर ने कहा कि मैंने साइकिल से 5 दिन पहले नासिक से अपनी यात्रा की शुरुआत की है। सतना स्थित घर पहुंचने में हमें करीब 6 दिन और लगेगा।

बच्चे को लेकर साइकिल से चली हूं


मध्यप्रदेश के सिवनी की रहने वाली एक महिला पति के साथ रहकर नागपुर में मजदूरी करती है। कोरोना के कारण उसके पास काम नहीं है। महिला ने कहा कि मैं पति और 1 साल के बच्चे के साथ साइकिल से चली हूं। मैं 14 अप्रैल से बस शुरू होने के इंतजार में वहां बैठी थी लेकिन बस नहीं चली। उसके बाद हमने साइकिल से ही घर पहुंचने का फैसला किया।

सरकार ने 1-1 हजार देने का किया है फैसला


3 दिन पहले मध्यप्रदेश की सरकार ने यह फैसला किया है कि दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों के खाते में 1 हजार रुपये ट्रांसफर करेंगे। इसके लिए जनप्रतिनिधियों से सूची मांगी गई थी। सूची मिलने के बाद मजदूरों के खाते में करीब 7 लाख से ज्यादा रुपये ट्रांसफर किए गए। साथ ही सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि उन राज्यों के सीएम से हमने मजदूरों के रहने खाने की व्यवस्था करने के लिए बात की है।