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भोपाल. राजधानी की जमीन और उस पर निर्माण व उपयोग के नियमों के साथ जमकर खिलवाड़ हुआ है। एमपी नगर में ग्रीन लैंड पर व्यावसायिक भवन विकसित करने पर हाइकोर्ट की आपत्ति के बाद पत्रिका ने शहर के अन्य क्षेत्रों में पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि सरकारी रेकॉर्ड में श्यामला हिल्स की जो जमीन छोटे झाड़ के जंगल के तौर पर दर्ज है, वहां वीआइपी कॉलोनी बन गई है। लिंक रोड किनारे विशिष्टजनों के लिए बनाया गया क्लब भी वनभूमि यानी ग्रीन लैंड पर ही है। बोट क्लब पर वाटिका पार्क में निगम ने 10 हजार वर्गफीट का ओपन थियेटर तैयार कर रहा है। हबीबगंज स्टेशन के सामने अस्पताल की भूमि पर होटल बन गई है। ऐसे ही तमाम निर्माण वनभूमि पर हो गए। शहर में आवासीय अनुमतियों से व्यवसायिक भवन बना लिए गए हैं।
ऐसे समझें वन के खसरों पर निर्माण
आरटीआई के तहत मिली जानकारी में खसरा नंबर 90/1 की 13.019 हैक्टेयर भूमि बताई गई। आज यहां कॉलोनी विकसित हो गई है। खसरा नंबर 91/2/9202 पर 20 हैक्टेयर भूमि दर्ज है ये बड़ा झाड़ का जंगल है, लेकिन यहां भी कॉलोनियां विकसित हो गईं। खसरा नंबर 92/1/1/ग वन भूमि पर भी अन्य निर्माण व गतिविधियां हो रही हैं।
इन्हें करना चाहिए कार्रवाई : नगर निगम को भवन अनुज्ञा शाखा के चीफ सिटी प्लानर विजय सावलकर को भवन अनुज्ञाओं और लैंड यूज के आधार पर कार्रवाई करना चाहिए। जिला प्रशासन की ओर से कलेक्टर सुदाम पी खाड़े को नजूल नियमों के आधार पर बाजार, आवासीय क्षेत्र व ग्रीन लैंड को कसना चाहिए। इसके आधार पर कार्रवाई की जाना जरूरी है।्र
अरेरा कॉलोनी में
512 व्यावसायिक गतिविधियां
अरेरा कॉलोनी को पूरी तरह आवासीय उपयोग के लिए विकसित किया हुआ है। यहां पर लगातार बढ़ती व्यवसायिक गतिविधियों की पड़ताल करने यहां के तत्कालीन जोन प्रभारी नीलेश श्रीवास्तव ने सर्वे कराया था। इसमें पता चला यहां 512 व्यवसायिक गतिविधियां संचालित है जो कि अवैध हैं।
कॉलोनियों में विकसित हो गए 200 बाजार
आवासीय कॉलोनियों में बिना किसी योजना करीब 200 बाजार विकसित हो गए। निगम ने शहर में विकसित बाजारों को लेकर कराए एक सर्वे में ये स्थिति सामने आई थी। अवधपुरी थाने के पास तो मास्टर प्लान की रोड पर एक बिल्डर द्वारा जमीन घेरने के बाद रोड खत्म हो गई और कॉलोनी की अंदरूनी रोड मुख्यमार्ग बन गई। इसके किनारे के मकान मालिकों ने अपने घरों में दुकान खुलवाकर पूरा बाजार विकसित करवा दिया। अब यहां ट्रैफिक और पार्र्किंग की दिक्कत हो गई।
&शहर में बेतरतीब विकास हुआ है। स्थिति ये हैं कि अवैध निर्माण पर कंपाउंडिंग नियम तक का पालन यहां नहीं हो पाता, क्योंकि लोगों ने तय नियम से दस फीसदी से अधिक अवैध निर्माण कर रखे हैं। इसके लिए समग्र योजना और शहर की सभी एजेंसियों को मिलकर काम करने की जरूरत है।
आलोक शर्मा, महापौर
Published on:
11 Feb 2019 04:04 am
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