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अगर आप या आपके बच्चे हैं टीवी या मोबाइल स्क्रीन के एडिक्ट, तो हो जाएं सावधान!

दरअसल मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी देखने का अत्यधिक प्रयोग बच्चों और युवाओं को मिर्गी रोग का शिकार बना सकता है। मोबाइल प्रयोग करने वाले ज्यादातर बच्चे और युवा तनाव में आ सकते है, जिससे उन्हें मिर्गी का दौरा पड़ सकता है।

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भोपाल। अगर आपके बच्चे भी ज्यादातर समय टीवी, कम्प्यूटर या फिर मोबाइल स्क्रीन के सामने बिता रहे हैं तो अब आप उनकी हेल्थ को लेकर अलर्ट हो जाइए। दरअसल मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी देखने का अत्यधिक प्रयोग बच्चों और युवाओं को मिर्गी रोग का शिकार बना सकता है। मोबाइल प्रयोग करने वाले ज्यादातर बच्चे और युवा तनाव में आ सकते है, जिससे उन्हें मिर्गी का दौरा पड़ सकता है। विशेषज्ञ मिर्गी की बीमारी का मुख्य कारण तनाव को ही मानते हैं। अधिकतर यह बीमारी 12 से 18 वर्ष के बीच होती है। वर्तमान में युवा देर रात तक मोबाइल का प्रयोग करते रहते हैं, उनकी नींद पूरी नहीं होती। तनाव बढऩे के कारण उन्हें मिर्गी के दौरे की आशंका बढ़ जाती हैं।

ये हैं मिर्गी होने के कारण
इधर लोगों में मिर्गी को लेकर कई भ्रांतियां हैं कि मिर्गी एक लाइलाज बीमारी है। शहर के हमीदिया अस्पताल के न्यूरोलाजी विभाग के डॉ. आरएस यादव के मुताबिक बच्चों और बुजुर्गों में मिर्गी की समस्या सबसे अधिक देखी जाती है। किसी दुर्घटना के दौरान सिर में लगी चोट की वजह से भी कुछ वर्षों बाद मिर्गी की समस्या हो सकती है। बच्चों में मिर्गी का मुख्य कारण आनुवंशिक या फिर मां के गर्भ में या प्रसव के दौरान किसी वजह से मस्तिष्क में खून या ऑक्सीजन की आपूर्ति न होना या किसी अन्य वजह से हो सकता है।

बुजुर्गों में दूसरा सबसे बड़ा विकार है यह बीमारी
बुजुर्गों में यह बीमारी दूसरे बड़े विकार या बीमारी की वजह से आती है। बुजुर्गों में हाइपरटेंशन और डायबिटीज जैसी बीमारियों से ग्रसित होने के कारण पक्षघात होना या ट्यूमर बनने से भी दौरे की समस्या हो सकती है। न्यूरोलॉजी के लगभग 10 से 12 प्रतिशत ऐसे मामले आते हैं, जिनमें सिर पर चोट के बाद मिर्गी की समस्या शुरू हुई। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में न्यूरोलॉजी के ओपीडी में हर रोज करीब 40 मरीज पहुंच रहे हैं। जबकि शहर में दो से अधिक मरीज अलग-अलग जगह पहुंचते हैं।

जूता सुंघाने जैसे टोटके कारगर नहीं
विशेषज्ञ बताते हैं कि मिर्गी के दौरे के वक्तजूता सुंघाने में कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं जुड़ा है। मिर्गी आने पर जूता सुंघाने से कोई लाभ नहीं होता है। मिर्गी का दौरा आने पर तुरंत व्यक्ति को बायीं करवट से लिटाएं। मुंह से झाग, थूक या खून निकल रहा है तो, उसे साफ करें, ताकि ये गले में न जाएं। अगर थूक, झाग या खून गले में चला गया तो, सांस रुक सकती है और जान को खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि मिर्गी का दौरा एक-दो मिनट बाद अपने आप सही हो जाता है और हमें लगता है कि जूता सुंघाने से ऐसा हुआ है। यह भ्रम है।

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लाइलाज बीमारी नहीं है मिर्गी
एक्सपर्ट के मुताबिक मिर्गी सौ फीसदी ठीक हो जाती है, पर इसका दवा ठीक से लेने की जरूरत है। धीरे-धीरे दवा को कम किया जाता है। फिर इंसान दवा और बीमारी से पूरी तरह मुक्तहो जाता है। दवा का पूरा कोर्स करना जरूरी है। यह कोर्स अलग-अलग लोगों में अलग-अलग होता है। विभिन्न जांचों के आधार पर कोर्स का समय तय होता है।

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एक बीमाारी का नाम नहीं मिर्गी
मिर्गी किसी एक बीमारी का नाम नहीं है। यह तमाम तरह की बीमारियों का समुच्चय है। मिर्गी के दौरे के वक्तदिमागी संतुलन खराब हो जाता है। शरीर लडख़ड़ाने लगता है और व्यक्ति का खुद पर नियंत्रण नहीं रहता है। वह जिस स्थिति में होता है, उसी में गिर जाता है। अचानक बेहोशी आ जाती है। हाथ-पांव में झटके आने लगता है। मुंह से झाग निकलने लगता है। मिर्गी के दौरे में यह भी देखा गया है कि व्यक्ति ठीकठाक होता है और अचानक ही बेहोश हो जाता है। दौरा का प्रभाव खत्म होने के बाद भी स्पष्ट बोलने में समस्या आती है।

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