1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

MOGLI SPECIAL : मोगली कहां पैदा हुआ था, क्या आपको पता है? नहीं तो आइए जानिये यहां पूरी कहानी….

सिवनी जिले के पेंच अभ्यारण्य में मोगली उत्सव की धूम...

4 min read
Google source verification
MOGLI SPECIAL : मोगली कहां पैदा हुआ था, क्या आपको पता है? नहीं तो आइए जानिये यहां पूरी कहानी....

MOGLI SPECIAL : मोगली कहां पैदा हुआ था, क्या आपको पता है? नहीं तो आइए जानिये यहां पूरी कहानी....

भोपाल। मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में जल्द ही मोगली उत्सव की धूम मचने वाली है। दरअसल बच्चों में शिक्षा, पर्यावरण और जानवरों के प्रति लगाव बढ़ाने के लिए राज्य स्तरीय मोगली उत्सव ( Mogli Bal Utsav ) का आयोजन हो रहा है। यह आयोजन 27-28 नवंबर को पेंच अभ्यारण ( Pench Tiger Reserve ) में होने जा रहा है। इस उत्सव ने 1990 के दौरे के टीवी किरदार मोगली को जीवंत कर दिया है। आज 'पत्रिका' आपको बता रहा है कि मध्यप्रदेश और मोगली का संबंध क्या है?...

अनूठी यादों पर एक नजर...
आपको भी याद होगा 1990 का वो दौर, जब दूरदर्शन पर गुलजार का लिखा गीत 'जंगल-जंगल बात चली है पता चला है, चड्ढी पहन के फूल खिला है, फूल खिला है...' ( The Jungle Book ) बजता था तो बच्चे टीवी से चिपक जाया करते थे।

इसका प्रमुख किरदार मोगली ( Mogli in Jungle Book )बच्चों में काफी लोकप्रिय हो गया था। इसकी लोकप्रियता ही है कि मप्र सरकार अब हर साल मोगली उत्सव आयोजित कराने लगी है। जो कि पिछले कुछ वर्षों से सिवनी जिले में आयोजित किया जा रहा है।

मप्र में जन्मा था मोगली ( birth of Mogli )...
ब्रिटिश शासन के अंग्रेज अधिकारी कर्नल हेनरी विलियम स्लीमन के दस्तावेज में मोगली के होने के साक्ष्य मिलते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ के अनुसार मोगली लैंड का क्षेत्र मध्यप्रदेश के सिवनी जिले का जंगल है। जिसे अब इंदिरा प्रियदर्शनी राष्ट्रीय उद्यान या पेंच टाइगर रिजर्व भी कहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि मोगली यहीं रहता था।

इस बार ये होगा खास: बच्चों के लिए होंगे अनेक कार्यक्रम
मोगली उत्सव के दौरान स्कूली बच्चों के लिए अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वहीं इस बार नवंबर में अलग-अलग जंगलों की बजाय मोगली लैंड की सैर कराई जाएगी। यह मोगली लैंड पेंच टाइगर रिजर्व में है। स्कूल शिक्षा विभाग ने जिले के शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को निर्देश देकर कहा है कि जिले स्तर पर बच्चों को मोगली लैंड की सफारी कराई जाए।

पर्यावरण विज्ञान के साथ-साथ भौगोलिक विशेषताओं और वन्य जीवों के बारे में बताया जाए। इससे पहले विकासखंड स्तरीय मोगली बाल उत्सव परीक्षा का आयोजन किया गया। वहीं इस स्पर्धा के प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में सहायक संचालक शिक्षा आरएस मर्सकोले, संस्था प्राचार्य डीसी डहरवाल, प्रधान पाठक यूरेन्द्र हनवत, व्याख्याता पी चौधरी, एस एससैयाम बतौर अतिथि शामिल थे।

शिक्षक पंचम हनवत की ओर से मोगली बाल उत्सव के बारे में जानकारी दी गई। गौरतलब है कि जिन छात्र-छात्राओं का चयन लिखित परीक्षा से हुआ है, वे जिला स्तरीय मोगली बाल प्रश्न मंच प्रतियोगिता में 5 नवंबर को बालाघाट उत्कृष्ट विद्यालय में होने वाले समारोह में भाग लेंगे।

जानिये मोगली को: हेनरी की कलम से...
सर विलियम हेनरी स्लीमन ने लिखा था कि सिवनी के संतबावड़ी गांव में सन 1831 में एक बालक पकड़ा गया था, जो इसी क्षेत्र के जंगली भेड़ियों के साथ गुफाओं में रहता था।

इसके अलावा जंगल बुक के लेखक रुडयार्ड किपलिंग ने जिन भौगोलिक स्थितियों बैनगंगा नदी, उसके कछारों तथा पहाडय़िों की चर्चा की थी वे सभी वास्तव में इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थितियों से पूरी तरह मेल खाती हैं।

पेंच टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल 757 वर्ग किमी हैं। पेंच राष्ट्रीय उद्यान और सेंचुरी का कोर एरिया 411 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है।

मोगली की ऐसे मिली थी जानकारी!
रुडयार्ड किपलिंग ने मोगली के जीवन को कागज पर उतारा था। उन्होंने महज 13 साल की उम्र से ही कविताएं लिखना आरंभ कर दिया था।
ऐसा कहा जाता है कि किपलिंग को एक बार भारत की नदियों और जंगलों की सैर करने का मौका मिला। उसी दौरान एक फॉरेस्ट रेंजर गिसबार्न ने रुडयार्ड किपलिंग को एक बालक के शिकार करने की क्षमताओं के बारे में बताया।

जंगली जानवरों के बीच लालन-पालन होने के कारण उस बालक में यह गुण विकसित हुआ था। यहीं से किपलिंग को जंगली खूंखार जानवरों के बीच रहने वाले उस मोगली के बारे में लिखने की प्रेरणा मिली। रुडयार्ड की इस किताब में मोगली के सहयोगी मित्रों और बुजुर्गों के तौर पर चमेली, भालू, सांप, अकडू-पकडू, खूंखार शेरखान आदि को भी बखूबी स्थान दिया गया है।

परदेसी हुए दीवाने: ऐसे मिली मोगली को पहचान...
भारत के जंगलों में पाए जाने वाले इस मोगली के बारे में उसकी खासियतें एक अंग्रेज लेखक ने पहचानी, लेकिन इसे फिल्माने का काम जापान ने किया।

जापान में सिवनी के इस बालक के कारनामों के बारे में 1989 में एक 52 एपिसोड वाला सीरियल तैयार किया गया था।

'द जंगल बुक शिओन मोगली' नाम से बनाए गए इस एनिमेटेड सीरियल को जब टीवी पर प्रसारित किया गया, तो जापान का हर आदमी मोगली का दीवाना हो गया।