
भोपाल में सहारा इंडिया के खिलाफ प्रदर्शन
भोपाल. सपाक्स वेलफेयर फाउंडेशन ने मंगलवार को राजधानी में सेंट्रल लायब्रेरी मैदान में सहारा इंडिया कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता और निवेशक विधानसभा के घेराव के लिए निकले लेकिन पुलिस ने रोक लिया और नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया। फाउंडेशन ने सरकार से सहारा इंडिया से निवेशकों का पैसा जल्द वापिस कराने और कंपनी के निदेशकों को गिरफ्तार करने की मांग की है। सपाक्स वेलफेयर फाउंडेशन के संयोजक सुरेश शुक्ला ने बताया कि मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। इसमें मांग की गई है कि सरकार तत्काल प्रभाव से एक अलग से सरकारी टीम गठित करे जो त्वरित प्रभाव से सेबी एवं उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के पालन हेतु सहारा संस्थान को निर्देशित करे और कोर्ट के आदेश अनुसार भुगतान की प्रक्रिया आरंभ कराये । सहारा इंडिया की रियल एस्टेट के कारोबार एवं कोऑपरेटिव सोसाइटी के कारोबार को अलग अलग करते हुए विधि सम्मत आदेशों को ध्यान में रखते हुए भुगतान की प्रक्रिया को आरंभ कराई जाए। सरकार सहारा में कार्यरत रहे लाखों-करोड़ों एजेंटों एवं कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने और रोजगार प्रदान करते के लिए पहल करे। शुक्ला ने कहा कि सहारा में सबसे ज्यादा निवेश दैनिक कार्यकर्ताओं की है जो अपनी रोज की बचत को निवेश करते रहे हैं ताकि समय आने पर उन्हें एक बड़ी पूंजी प्राप्त हो सके। सरकार को तत्काल प्रभाव से उन छोटे लोगों की राशि वापिस कराने की पहल करना चाहिए ताकि उन परिवारों में बढ़ती हुई आत्महत्या को रोका जा सके । सहारा इंडिया के सभी डायरेक्टर एवं सोसायटियों के डायरेक्टरों की गिरफ्तारी तुरंत हो जिससे भुगतान की प्रक्रिया सुरक्षित की जा सके।
यह है मामला
सपाक्स वेलफेयर फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कई सालों से सहारा समूह अपने जमाकर्ताओं की परिपक्वता राशि नहीं दे रहा है । जबकि भुगतान के संबंध में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और उपभोक्ता आयोग द्वारा आदेश पारित किए जा चुके हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने सहारा की सभी सहकारी समितियों में नए खाते खोलने पर रोक लगाई है, किंतु आदेश की अवहेलना कर आज भी निवेशकों से धन जमा कराया जा रहा है जो आदेश का सरासर उल्लंघन है । सुप्रीम कोर्ट ने सहारा की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कारपोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग कारपोरेशन लिमिटेड को अपने आदेश में जमाकर्ताओं का भुगतान करने हेतु आदेशित किया था लेकिन रातों-रात क्यू शाप कंपनी बनाकर सभी उपरोक्त दोनों कंपनियों का धन जबरदस्ती पीछे की तारीख मैं पुनर्निवेश करवा दिया गया।
सहारा के मुखिया और उनके अधिकारी सहकारी समितियों का भुगतान न होने के कारण सहारा सेबी विवाद बताते हैं। उनका कहना है कि सहारा ने सेबी के अकाउंट में ब्याज समेत लगभग 25 हजार करोड़ जमा कर रखा है,विवाद खत्म होने के बाद यह राशि मिलने पर भुगतान होगा। लेकिन सेबी सूचना के अधिकार के तहत बार-बार अपने जवाब में कहता रहा है कि सहारा की सहकारी समितियों का कोई भी धन "सेबी" के खाते में नहीं है, जो धन जमा है वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल एस्टेट कारपोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग कारपोरेशन लिमिटेड का है। इसका सहकारी समितियों का कोई लेना-देना नहीं है । छत्तीसगढ में सहारा निदेशकों की गिरफ्तारी के बाद 15 करोड़ का भुगतान कर दिया गया लेकिन मप्र में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होने के कारण जमाकर्ताओं को कुछ नहीं मिल रहा है।
Updated on:
14 Mar 2023 11:34 pm
Published on:
14 Mar 2023 11:32 pm
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