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हाईकोर्ट ने निजी मेडिकल कॉलेजों को दिया झटका अब सुप्रीम कोर्ट से दरकार

कोर्ट ने डीएमई व संयुक्त संचालक चिकित्सा शिक्षा के खिलाफ  गत दिवस इंदौर खंडपीठ द्वारा जारी आदेश भी स्थगित कर दिया है।

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Anwar Khan

Sep 30, 2016

Sold to mortgage land, bank officials against issu

Sold to mortgage land, bank officials against issued a warrant

भोपाल। मप्र हाईकोर्ट से राज्य के मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में प्रवेश के लिए प्रदेश के मूल निवासियों को ही अनुमति देने के आदेश के खिलाफ निजी मेडिकल कॉलेजों को कोई राहत नहीं मिली है। जस्टिस एसके सेठ, जस्टिस एसके गंगेले व जस्टिस संजय यादव की संवैधानिक खंडपीठ ने मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित रहने तक सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने डीएमई व संयुक्त संचालक चिकित्सा शिक्षा के खिलाफ गत दिवस इंदौर खंडपीठ द्वारा जारी आदेश भी स्थगित कर दिया है।

यह है मामला
मप्र हाईकोर्ट ने मेडिकल व डेंटल कॉलेजों में केवल राज्य के मूल निवासियों को ही प्रवेश देने का आदेश जारी किया था। मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश रूल्स के नियम 6 को असंवैधानिक करार दिया था। वहीं 31 अगस्त 2016 को इंदौर खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि इन कॉलेजों में ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर प्रवेश दिए जाएं। दोनों आदेशों को विरोधाभासी बताते हुए एसोसिएशन ने पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।

डीएमई और जेडी हुए हाजिर
31 अगस्त के आदेश का पालन न होने का आरोप लगाते हुए एपीडीएमसी ने इंदौर खंडपीठ में अवमानना याचिका दायर की थी। कोर्ट ने इस पर सुनवाई करते हुए 28 सितंबर को राज्य सरकार को आदेश का पालन करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही चिकित्सा शिक्षा संचालक पटेल व संयुक्त संचालक शशिकांता गांधी को कोर्ट के समक्ष हाजिर होने को कहा गया था। महाधिवक्ता कार्यालय की ओर से इन सभी मामलों की सुनवाई एकसाथ करने व विरोधाभासी आदेशों पर संवैधानिक बेंच गठित करने का आग्रह किया गया। एक्टिंग चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन की अनुमति पर तीन वरिष्ठ जजों की संवैधानिक खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। दोनों अधिकारी कोर्ट के समक्ष हाजिर हुए और वस्तुस्थिति से कोर्ट को अवगत कराते हुए कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रवेश देना आरंभ किया जा चुका है। दोनों अधिकारियों के आग्रह पर उनके खिलाफ इंदौर बेंच द्वारा जारी आदेश स्थगित कर दिया गया।



सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया इंतजार
गुरुवार सुबह 10.30 बजे पीठ मामले की सुनवाई करने बैठी। कोर्ट को बताया गया कि दूसरे राज्यों के छात्रों ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। जिसकी सुनवाई आज होनी है। 3.30 बजे कोर्ट को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने केवल चार याचिकाकर्ता छात्रों को काउंसिलिंग में शामिल होने की अनुमति दी है। जबलपुर खंडपीठ के आदेश को स्थगित नहीं किया। अब तीन अक्टूबर को मामले की सुनवाई होगी। इस पर कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय तक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई स्थगित करने के निर्देश दिए। राज्य सरकार की ओर से उपमहाधिवक्ता समदर्शी तिवारी, एपीडीएमसी की ओर से एपी श्रोती, मप्र के छात्रों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र तिवारी, आदित्य संघी ने पक्ष रखा।

दोपहर में हंगामा, शाम से देर रात तक चली काउंसिलिंग
निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए बुधवार शाम को स्थगित हुई काउंसिलिंग गुरुवार दोपहर बाद से फिर शुरू हो गई। जीएमसी में गुरुवार देर रात तक काउंसिलिंग की प्रक्रिया चलती रही, इधर दोपहर में छात्रों ने काउंसिलिंग स्थल पर अव्यवस्थाओं को लेकर हंगामा कर प्रदर्शन किया, और व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताई। गुरुवार को अंतिम दिन है, इसलिए देर रात तक काउंसिलिंग चलती रही।

निजी कॉलेजों की काउसिंलिंग प्रक्रिया दोपहर बाद तक रुकी हुई थी, साथ ही यहां अव्यवस्थाएं भी थी, इसे लेकर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। छात्रों का कहना था कि यहां व्यवस्थाओं के नाम पर न पीने के लिए पानी है, और न ही बैठने की अच्छी व्यवस्था है।

30 को आखिरी दिन है और काउंसलिंग को लेकर भी स्थिति समझ नहीं आ रही है। खासकर बाहर से आए छात्रों ने इसे लेकर नाराजगी जताई। हाईकोर्ट के निर्णय के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने पर छात्रों ने खुशी जाहिर की।


आज दूसरे राउंड की प्रक्रिया
संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. जीएस पटेल ने बताया कि कोर्ट ने हमे राहत दी है। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद पुरानी प्रक्रिया को यथावत रखते हुए काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पहले राउंड के तकरीबन 90 प्रतिशत एडमिशन हो चुके हैं। शुक्रवार को सुबह से दूसरे राउंड की काउंसलिंग की जाएगी। काउंसलिंग की प्रक्रिया रात्रि 11 बजे के बाद तक जारी थी।

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