
मप्र बजट 2022 : जानें ऐसी योजनाएं जो हर बार बजट में होती हैं शामिल लेकिन नहीं हो पाई पूरी
भोपाल. बजट से पहले लोगों की सेहत सुधारने का वादा करने वाले दावे बजट आने के बाद हवाहवाई ही साबित हुए। इस बार के बजट में मरीजों को लाभ देने के नाम पर पिछले बजट की घोषणाओं को एक बार फिर चिपका दिया। पिछले बजट में मप्र में दो अत्याधुनिक कैंसर इंस्टीट्यूट बनाए जाने का प्रावधान किया गया था। वहीं मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने के सपने भी दिखाए गए। इस बजट में एक बार फिर यह सपनों को नए रूप में पेश कर दिया गया। २०२१-२२ के बजट में 9 नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए भी 300 करोड़ रुपए का बंदोबस्त किया गया था, कॉलेज नहीं खुले तो इसबार फिर नौ नए मेडिकल कॉलेज खोलने की बात कही गई। बीते साल जो घोषणाएं की गई वो अब तक मूर्त रूप नहीं ले सकी है।
पिछली बजट की योजनाओं का हाल
घोषणा एक : जबलपुर में कैंसर मरीजो के लिए अत्याधुनिक टर्सरी कैंसर केयर इंस्टीट्यूट की स्थापना की जाएगी।
हकीकत : पिछले चार साल से यहां निर्माण कार्य चल रहा है। दावा है कि बिल्डिंग 31 मार्च तक हैंडओवर की जानी है। इसके बाद स्टाफ और मशीनरी की व्यवस्था की जाएगी। पिछले बजट में इस इंस्टीट्यूट के लिए 40 करोड़ रुपए दिए गए थे।
घोषणा दो : ग्वालियर में कैंसर अस्पताल तैयार किया जाएगा
हकीकत : अब तक ना तो डीपीआर तैयार हुई ना जगह तय की जा सकी। अस्पताल में एक हजार बीस्तर के अस्पताल का काम भी तीन साल से चल रहा है। इस बजट में एक बार फिर सौगात के नाम पर लोगों को झूठी दिलासा दिला दी।
घोषणा तीन : गांधी मेडिकल कॉलेज में १४९२ बिस्तरों का नया अस्पताल
हकीकत : यह अस्पताल बीते छह सालों से तैयार हो रहा है। हर बार बजट में इसे सौगात मान लिया जाता है। 100 करोड़ रुपए का एलोकेशन किया गया था। अब भी एक साल तक इसका लाभ मरीजों को मिलने की उम्मीद नहीं।
घोषणा चार : तीन मेडिकल कॉलेजों में लीनियर एक्सीलरेटर लगाने के दावे
हकीकत : राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज में २०१५ से लीनियर एक्सीलरेटर की तैयारी सिर्फ कागजों में चल रही हैं। बीते साल तीन मेडिकल कॉलेजों में मशीन लगाने की बात की गई, प्रस्ताव सिर्फ काजगों पर है, इसबार फिर वादा किया।
Published on:
09 Mar 2022 09:01 pm
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