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MP Election 2023 : जन क्यों नहीं हो पाया जागरूक, 77.12% ने ही किया मतदान

- वर्ष 2018 में 75.63% हुआ था मतदान - छोटे जिलों की 18 विधानसभा सीटों पर ही बढ़ा मतदान - आयोग का मिशन 50ञ्च230 का बाकी जगह नहीं दिखा असर

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mp election 2023 : हितेश शर्मा. प्रदेश के 19 जिलों की 95 विधानसभा सीटों पर विधानसभा चुनाव-2018 में प्रदेश के औसत मतदान 75.63 प्रतिशत से कम मतदान हुआ था। इन सीटों पर मतदान बढ़ाने के लिए निर्वाचन आयोग ने मिशन 50@230 चलाया, जिला स्तर पर जनजागरूकता के लिए मैराथन, कार रैली, रंगोली प्रतियोगिता, नौका दौड़ जैसे आयोजन किए गए, लेकिन अधिकांश सीटों पर इसका खास असर नजर नहीं आया। पिछली बार प्रदेश के चार बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में ही मतदान कम हुआ था, इस बार भी भोपाल, ग्वालियर और इंदौर में मत प्रतिशत प्रदेश के औसत 77.12 से कम रहा। 18 सीट ऐसी रहीं, जिनमें वोटिंग प्रतिशत पहले से बेहतर हो पाया। आदिवासी क्षेत्रों में मतदान काफी अच्छा होता है, लेकिन पिछले चुनाव में आलीराजपुर की दोनों सीटों पर यह कम था। वहीं, सागर जिले की सात, भिंड की सभी पांच और मुरैना की छह में से पांच सीटों पर मतदान कम हुआ था।

28 हजार बूथों पर जन नहीं हो पाए जागरूक
आलीराजपुर, भिंड, रीवा, छतरपुर, मुरैना, सीधी, सिंगरौली, दतिया, सागर, दमोह, सतना, पन्ना, टीकमगढ़, कटनी और अशोक नगर में वोटिंग प्रतिशत राज्य के औसत से कम था। 28 हजार बूथों पर जागरूकता अभियान चलाया। कई जगह अलग-अलग तरह के नवाचार किए।

बड़े शहरों में भी प्रदेश के औसत से कम रहा वोटिंग प्रतिशत

इंदौर के नौ विधानसभा क्षेत्रों में छह पर वोटिंग प्रतिशत कम रहा था। देपालपुर, महू, सांवेर और राऊ में वोटिंग पिछली बार की तरह इस बार भी अच्छी रही, लेकिन इंदौर-2 में 2018 में 64.85% तो 2023 में 67.43% और इंदौर-5 में 65.67% तो 2023 में 67.90% रहा। शहर की सभी सीटों पर मतदान का प्रतिशत तो बढ़ा लेकिन प्रदेश के औसत के आसपास भी कोई सीट नहीं पहुंची। पिछली बार भोपाल की सात में से बैरसिया को छोडकऱ 6 सीटों पर ऐसा ही हाल था। इस बार भी प्रदेश के औसत तक कोई नहीं पहुंची। दक्षिण-पश्चिम में तो 63.68% से गिरकर 59.11% पर आ गया। मध्य में 61.36% से कम होकर 60.54% रह गया। हुजूर में 70.65% से 70.64% हुआ तो गोविंदपुरा में 61.19% से बढकऱ 63.03% हुआा। ग्वालियर में सभी छह क्षेत्रों में मतदान कम रहा था। इस बार मत प्रतिशत तो बढ़ा, लेकिन किसी भी शहरी सीट पर 65% तक वोटिंग ही हो पाई। उज्जैन की दो सीटें ऐसी थी, जहां मतदान कम था। इस बार भी 71% का आंकड़ा नहीं छू सका।

कम रुचि दिखाते शहरी मतदाता

शहरी इलाकों में मतदान का प्रतिशत हमेशा कम रहता है। एक बड़ा तबका मतदान में रुचि नहीं दिखाता। ग्रामीण क्षेत्र में केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाती रही है फिर भी ग्रामीण केंद्र तक नहीं जा पाते। माइग्रेशन भी कारण।
- गिरिजाशंकर, राजनीतिक विश्लेषक

2018 की कम मतदान वाली सीट
- जिला - विधानसभा - 2018 वोटिंग - 2023 वोटिंग
- ग्वालियर- ग्वालियर पूर्व - 58.18% - 57.94%
- भिंड- भिंड - 58.70% - 58.57%
- भोपाल - भोपाल मध्य - 61.36% 60.54%
- भोपाल - हुजूर - 70.65% - 70.64%
- रीवा - सिरमौर - 64.96% - 64.22%

यहां मामूली बढ़त

- आलीराजपुर - जोबट (एसटी) - 52.84%- 54.37%
- मुरैना - अंबाह (एससी) - 59.32% - 60.50%
- भिंड - गोहद (एससी) - 59.33% - 61.52%
- रीवा - मनगवां (एससी) - 59.99%- 62.36%
- ग्वालियर- ग्वालियर दक्षिण - 60.45% 63.83%
- भोपाल - गोविंदपुरा - 61.19%- 63.03%
- भिंड - अटेर - 61.95% - 64.08%

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