
MP Election 2023 : थम गया एमपी का चुनावी शोर, अब सिर्फ डोर-टू-डोर प्रचार, जानें किसने कितनी ताकत झोंकी
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में सूबे की सोलहवीं विधानसभा के गठन के लिए हो रहा चुनाव प्रचार अभियान मतदान समाप्ति के 48 घंटे पहले यानी बुधवार की शाम 6 बजे थम गया है। चुनावी शोरगुल थमने के बाद अब सिर्फ प्रत्याशी शांतिपूर्वक मतदाताओं के घर-घर जाकर ही मिल सकते हैं। आपको बता दें कि चुनाव प्रचार अभियान के दौरान भाजपा और कांग्रेस के साथ साथ प्रदेश में सक्रीय सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने प्रचार के लिए पूरी ताकत झोंक दी।
भाजपा के चुनाव प्रचार में मोदी का फेस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल तीन सभाएं बैतूल, झाबुआ और शाजापुर में कीं। वे हाल के दिनों में लगभग एक दर्जन सभाओं को संबोधित कर चुके हैं और भाजपा का प्रचार अभियान पीएम मोदी के चेहरे पर ही केंद्रित होकर रह गया।
कांग्रेस ने झोंकी पूरी ताकत
चुनाव प्रचार के अंतिम दिन आज कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे राजधानी भोपाल और राज्य के आदिवासी बहुल क्षेत्र बैतूल में चुनावी सभाओं को संबोधित किया तो वहीं पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी आज भाजपा के गढ़ दतिया और सीधी में कांग्रेस प्रत्याशियों के समर्थन में वोट मांगने पहुंची। इसके पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने कल विदिशा में चुनावी सभा को संबोधित किया। इससे एक दिन पहले उन्होंने भोपाल में विशाल रोड शो और जनसभा को संबोधित किया था। वहीं, कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता भी राज्य में विभिन्न स्थानों पर प्रचार अभियान में जुटे रहे।
जानें मतदान का शेड्यूल
राज्य में सभी 230 विधानसभा सीटों पर मतदान के लिए 17 नवंबर शुक्रवार का दिन तय किया गया है। मतदान सुबह 7 बजे से शुरु होकर शाम 6 बजे तक चलेगा। यानी मतदाता सुबह 7 से शाम 6 बजे के बीच वोट डाल सकेंगे। हालांकि, नक्सल प्रभावित बालाघाट, डिंडोरी और मंडला जिले के संबंधित नक्सली क्षेत्रों में स्थित मतदान केंद्रों में मतदान की प्रक्रिया सुबह 7 बजे शुरु होकर दिन में 3 बजे तक पूरी कर ली जाएगी। इस तरह राज्य में चुनाव प्रचार अभियान और इसका शोरगुल आज शाम 6 बजे थम गया। अब प्रदेशभर में कहीं भी राजनीतिक दलों की चुनावी सभाएं और रैलियां नहीं हो सकेंगी।
सभी मतदाताओं से वोट डालने की अपील
प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने मीडिया बातचीत के दौरान कहा कि निर्वाचन आयोग ने सभी 230 सीटों पर निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से मतदान कराने की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। राज्य के पांच करोड़ 60 लाख से अधिक मतदाता 65 हजार 500 से अधिक मतदान केंद्रों पर पहचान पत्र के साथ पहुंचकर वोट डाल सकेंगे। उन्होंने सभी मतदाताओं से वोट डालने की अपील की है। विधानसभा चुनाव में कुल दो हजार 533 उम्मीदवार मैदान में उतरें हैं, जिनमें दो हजार 280 पुरुष हैं, जबकि 252 महिलाएं और एक अन्य (थर्ड जेंडर) प्रत्याशी भी शामिल हैं।
भाजपा कांग्रेस ने झोंकी पूरी ताकत
राज्य में लगभग एक पखवाड़े पहले शुरू हुआ चुनाव प्रचार अभियान निरंतर गति पकड़ते हुए चरम पर पहुंच गया। इस दौरान भाजपा के अलावा मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचकर चुनावी सभाएं और रोड शो आदि के जरिए अपने दल और प्रत्याशियों का प्रचार किया। भाजपा की ओर से वरिष्ठ नेता अमित शाह, जे पी नड्डा, अनेक केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने प्रचार किया। वहीं कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी के अलावा सुश्री प्रियंका गांधी वाड्रा, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कमलनाथ ने प्रचार अभियान में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया।
अन्य दल भी नहीं रहे पीछे
इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी (आप) के अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान यानी दोनो मुख्यमंत्रियों के साथ साथ अन्य नेताओं ने भी प्रदेशभर में कई चुनावी सभाओं को संबोधित किया।
इन दिग्गजों की साख दाव पर
चुनाव में राज्य के मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान बुधनी से, पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ छिंदवाड़ा से और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर दिमनी से, प्रहलाद पटेल नरसिंहपुर से और फग्गन सिंह कुलस्ते मंडला के निवास से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इसके अलावा भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय इंदौर एक क्षेत्र से, चार सांसद, राज्य सरकार के दो दर्जन से अधिक मंत्री और अन्य प्रमुख नेता भी चुनावी दंगल में हैं।
किस दल ने कितनी सीटों पर उतारे उम्मीदवार ?
चुनाव आयोग के आकड़ों के मुताबिक, कुल दो 533 प्रत्याशियों में से भाजपा और कांग्रेस के 230-230 के अलावा बसपा के 181, सपा के 71 और 1166 निर्दलीय प्रत्याशी प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। मतदाताओं की कुल संख्या पांच करोड़ 60 लाख 58 हजार से अधिक है, जिनमें दो करोड़ 87 लाख 82 हजार से ज्यादा पुरुष और दो करोड़ 71 लाख, 99 हजार से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं। अन्य मतदाता यानी थर्ड जेंडर की संख्या 1292 है।
2018 में इस तरह बनी थी कांग्रेस की सरकार
पंद्रहवीं विधानसभा के गठन के लिए 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में किसी भी दल का स्पष्ट बहुमत (216 सीट) नहीं मिल सकी थी। उस समय कांग्रेस 114 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी और उसने अन्य दलों के साथ मिलकर दिसंबर 2018 में राज्य में 15 सालों बाद कांग्रेस की सरकार बनाई थी। तब मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ ने शपथ ली थी। भाजपा को 109 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था और उसके हाथ से सत्ता चली गई थी। इसके अलावा चार निर्दलीयों के साथ ही बसपा के दो और सपा के एक प्रत्याशी ने विजय हासिल की थी।
उपचुनाव के बाद शिवराज फिर बने सूबे के मुखिया
राज्य में मार्च 2020 को तत्कालीन कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के अपने समर्थक विधायकों के दलबदल के कारण कांग्रेस सरकार गिर गई थी और भाजपा फिर से सत्ता में आ गई। इसके बाद हुए उपचुनावों के चलते विधानसभा में मौजूदा भाजपा सदस्यों की संख्या बढ़कर 127 हो गई, जबकि कांग्रेस के जीते हुए सदस्यों की संख्या घटकर 96 ही रह गई। ऐसे में पूर्व में शिवराज सिंह चौहान ने उपचुनाव के जरिए एक बार फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। फिलहाल शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और अब नई सरकार के गठन को लेकर तस्वीर अगले महीने 3 दिसंबर की मतगणना के साथ साफ हो जाएगी।
Published on:
15 Nov 2023 06:15 pm

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