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MP Election Result Live Update : मध्य प्रदेश में चली भाजपा की लहर, फिर भी चुनाव हार गए पार्टी के ये दिग्गज

भाजपा निर्णायक बढ़त के साथ प्रदेश की सत्ता में आ गई है। हालांकि, इस बार के चुनाव में बड़े उलटफेर हुए हैं। आलम ये है कि कई दिग्गज अपने गढ़ वाली सीटों तक पर चुनाव हार गए हैं।

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MP Election Result Live Update

MP Election Result Live Update : मध्य प्रदेश में चली भाजपा की लहर, फिर भी चुनाव हार गए पार्टी के ये दिग्गज

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 के परिणाम स्पष्ट हो गए हैं। इसी के साथ ये भी तय हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर प्रदेश की सत्ता में आ गई है। हालांकि, इस बार के चुनाव में बड़े उलटफेर देखने को मिले हैं। आलम ये है कि कई दिग्गज नेता अपने गढ़ वाली सीटों तक पर चुनाव हार गए हैं। ऐसे में अगर बात करें भारतीय जनता पार्टी की तो इस बार भाजपा ने पिछली बार के मुकाबले प्रदेशभर में निर्णायक जीत दर्ज की है, बावजूद इसके पार्टी के कई दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा है तो आइये जानते हैं भाजपा की लहर के बावजूद पार्टी के वो कौनसे दिग्गज नेता हैं जिन्हें हार का सामना करना पड़ा है।


दतिया से नरोत्तम मिश्रा

मध्य प्रदेश के हालिया गृहमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा अपनी गढ़ वाली दतिया विधानसभा सीट से हार गए हैं। बता दें कि साल 2003 में इस सीट पर बीजेपी के रामदयाल प्रभाकर कांग्रेस के महेंद्र बौद्ध के खिलाफ विजयी हुए थे। इसके बाद 2008 में ये सीट सामान्य हुई तब यहां बीजेपी की जीत हुई। इस चुनाव के दौरान नरोत्तम मिश्रा, डबरा सीट से दतिया पहुंचे और उन्होंने राजेंद्र भारती को 11,233 वोटों के अंतर से हराया। मिश्रा ने 2013 में भी राजेंद्र भारती पर 11,000 से अधिक वोटों से हराया। इसके बाद 2018 में मिश्रा ने लगातार तीसरी बार भी जीते थे। हालांकि, उस दौरान जीत का अंतर काफी कम था, लेकिन इस सीट पर इस बार भाजपा से कब्जा छिन गया है।

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डबरा से इमरती देवी

ज्योतिरादित्य सिंधिया की कट्टर समर्थक नेता मानी जाने वाली पूर्व मंत्री इमरती देवी को दिग्गज नेता माना जाता है। वो अपने बयानों को लेकर प्रदेश की राजनीति में हमेशा सक्रीय रहती हैं। लेकिन सिंधिया के साथ भाजपा में आने के बाद से इमरती देवी अपने गढ़ वाली सीट से चुनाव नहीं जीत पा रही हैं। इस बार भी इमरती देवी चुनाव हार गई हैं। इससे पहले भाजपा में आने के बाद 2020 में हुए उपचुनाव में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, उससे पहले कांग्रेस पार्टी के टिकट पर साल 2018, 2013 और 2008 में वो इसी सीट से चुनाव जीत चुकी हैं।

इमरती देवी कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रही हैं। उन्हें ज्योतिरादित्य सिंधिया का कट्टर समर्थक माना जाता है। यही कारण है कि 2020 में सिंधिया के साथ उन्होंने भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ले ली थी और भाजपा के टिकट पर ही डबरा सीट से चुनाव लड़ा था। उस दौरान इमरती देवी ने बड़ा दावा करते हुए कांग्रेस प्रत्याशी को 80 हजार वोटों से जीतने का दावा किया था। उसके बाद भी इमरती देवी को करारी हार का सामना करना पड़ा था।

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हरदा से कमल पटेल

भाजपा की ओर से हरदा सीट से प्रत्याशी बनाए गए शिवराज सरकार में कृषि मंत्री कमल पटेल इस बार के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। उन्हें कांग्रेस के डा. रामकिशोर दोगने ने मात्र 870 वोटों से हरा दिया है। बीस राउंड की मतगणना के बाद कांग्रेस के आरके दोगने को कुल 93, 485 वोट मिले हैं, जबकि भाजपा के कमल पटेल 93, 275 वोट हासिल कर सके। आपको बता दें कि इस सीट पर कमल पटेल को भाजपा ने 1993 में पहली बार अपना प्रत्याशी बनाया था और विजय हासिल की थी। तब से लेकर कमल पटेल आधा दर्जन बार यहां से चुनाव लड़ चुके हैं, जिसमें एक बार साल 2013 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। तब कांग्रेस के डा. रामकिशोर दोगने ने ही उन्हें चुनाव में हराया था। हालांकि 2018 में हुए अगले ही चुनाव में कमल पटेल ने इस हार का बदला ले लिया था लेकिन अब एक बार फिर डा. दोगने ने कमल पटेल से हरदा सीट छिटक ली है।


निवास से फग्गन सिंह कुलस्ते

मंडला जिले की निवास विधानसभा सीट से भाजपा के प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते विधानसभा का चुनाव हार गए हैं। फग्गन सिंह कुलस्ते को भाजपा ने निवास सीट से चुनाव मैदान में उतारा था लेकिन भाजपा की लहर के बावजूद फग्गन सिंह कुलस्ते कांग्रेस के चैन सिंह वरकड़े ने 5000 वोटों के अंतर से चुनाव हराया है। 64 साल के फग्गन सिंह पोस्ट ग्रेजुएट हैं। वर्तमान में केंद्र सरकार में इस्पात राज्यमंत्री हैं। 17वीं लोकसभा के सांसद हैं। 2009 से मंडला सीट का नेतृत्व किया है। कांग्रेस की मजबूत सीट होने के कारण यहां भाजपा ने दिग्गज नेता को चुनाव में उतारा था, लेकिन केन्द्रीय मंत्री भी यहां पर जीत दर्ज नहीं कर सके।


सतना से गणेश सिंह

सतना विधानसभा सीट भाजपा का गढ़ कही जाती थी। बीजेपी ने यहां 1990 से लेकर अबतक कुल 5 बार जीत हासिल की है। वहीं बात करें कांग्रेस की तो भले ही कांग्रेस का प्रदेश में ओवरऑल परफॉर्मेंस ठीक न रहा हो पर पार्टी ने सतना सीट पर बड़ा उलटफेर करते हुए भाजपा के दिग्गज नेता को उन्हीं की गढ़ वाली सीट पर पटखनी दी है। सतना विधानसभा से बीजेपी ने सांसद गणेश सिंह को मैदान में उतारा था। शुरुआती मतगणना में बीजेपी सांसद बढ़त बनाए हुए थे, लेकिन अंत में उनकी हार हुई। कांग्रेस उम्मीदवार सिद्धार्थ कुशवाहा ने गणेश सिंह को 4200 वोटों से चुनाव हराया है।


बालाघाट से गौरीशंकर बिसैन

प्रदेश में निर्णायक जीत हासिल करने के बावजूद मध्य प्रदेश की बालाघाट विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। दरअसल भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री गोरीशंकर बिसेन को कांग्रेस की अनुभा मुंजारे ने 29195 वोटों से शिकस्त दे दी है।


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