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Wheat Bonus- मध्यप्रदेश में इस बार गेहूं के रिकार्ड उत्पादन की उम्मीद है पर केंद्र से खरीदी कोटा कम हो गया है। मंगलवार को कैबिनेट बैठक में इसपर विस्तार से चर्चा हुई। प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद राजपूत ने कहा कि गेहूं का खरीदी कोटा कम हो गया है और बारदाने भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में मुश्किलें आना तय है। हालांकि सरकार ने सरप्लस गेहूं ओपन टेंडर से खरीदने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही किसानों को बोनस भुगतान की व्यवस्था भी की गई। यह राशि विभागीय मद में बजट प्रावधान कर दी जाएगी। सरकार ने सीएम कृषक फसल उपार्जन सहायता योजना के तहत किसानों को भुगतान करने का निर्णय लिया।
कैबिनेट बैठक में गेहूं उपार्जन पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने केंद्र से गेहूं खरीदी का कम कोटा मिलने की बात रखी। मंत्री राजपूत ने कहा कि महज 78 लाख मीट्रिक टन खरीदी का ही कोटा मिला जबकि अब तक 19 लाख किसानों ने पंजीयन कराए हैं। पंजीयन कराते समय किसानों ने संभावित मात्रा 168 लाख मीट्रिक टन तक बताई है।
सूत्रों के मुताबिक गेहूं खरीदी को लेकर हुई चर्चा में मंत्री ने यह भी कहा कि गेहूं का रिकॉर्ड 365 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है। यदि अनुमान के तहत यह गेहूं केंद्रों पर आता है तो खरीदी व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी, इसलिए कोटा बढ़ाने के लिए प्रयास किए, लेकिन महज 1 लाख मीट्रिक टन ही कोटा बढ़ा। अब बारदाने भी नहीं मिल हैं।
राज्य सरकार ने कैबिनेट बैठक में सरप्लस गेहूं आने की स्थिति में ओपन टेंडर से खरीदने की बात कही। सरकार ने सीएम कृषक फसल उपार्जन सहायता योजना के तहत किसानों को भुगतान करने का निर्णय लिया।
सरकार ने बताया कि उपार्जित गेहूं में से जितनी मात्रा केंद्र स्वीकार नहीं करेगा, उसे मप्र स्टेट सिविल सप्लाइज कॉर्पोरेशन द्वारा खुली निविदा के माध्यम से बेचा जाएगा। इस पर खर्च वहन सरकार करेगी। किसानों को बोनस का भुगतान विभागीय मद में बजट प्रावधान कर दिया जाएगा।
Updated on:
18 Mar 2026 01:49 pm
Published on:
18 Mar 2026 06:56 am
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