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सरकार की माली हालत खराब, 2 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेगी एमपी गवर्नमेंट

वित्तीय संस्थानों से प्रस्ताव बुलाए  

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वित्तीय संस्थानों से प्रस्ताव बुलाए

भोपाल। मध्‍यप्रदेश सरकार की माली हालत खराब है. हाल ये है कि सरकार को विकास योजनाओं के लिए भी कर्ज जुटाना पड़ रहा है. मध्यप्रदेश सरकार 2 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले रही है. इसके लिए वित्तीय संस्थानों से प्रस्ताव बुलाए गए हैं. गौरतलब है कि प्रदेश पर पहले से ही 2 लाख 95 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है.

वित्तीय संस्थाओं से 2 अगस्त को प्रस्ताव बुलाए गए हैं और 3 अगस्त को इन प्रस्तावों पर विचार कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा- राज्य में आर्थिक दिक्कतों के कारण कई गतिविधियां बंद हैं. इन्हें प्रारंभ करने और विकास योजनाओं के लिए एमपी सरकार 2 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेगी। यह कर्ज भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से लिया जाएगा। दस साल की अवधि के लिए लिए जानेवाले इस कर्ज के लिए प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है. रिजर्व बैंक ने राज्य सरकार को कर्ज मुहैया कराने में सक्षम वित्तीय संस्थानों से प्रस्ताव बुलाए हैं. वित्तीय संस्थाओं से 2 अगस्त को प्रस्ताव बुलाए गए हैं और 3 अगस्त को इन प्रस्तावों पर विचार कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

2 हजार रुपए की यह कर्ज राशि जून 2032 की समयावधि तक के लिए ली जाएगी- 2 हजार रुपए की यह कर्ज राशि जून 2032 की समयावधि तक के लिए ली जाएगी. विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस राशि से मूलभूत विकास योजनाओं की गतिविधियां संचालित करनेवाले विभागों को अतिरिक्त रकम मुहैया कराई जाएगी। गौरतलब है कि प्रदेश पर पहले से ही 2 लाख 95 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है.

हाल में ही प्रदेश में 6 हजार करोड़ रुपए की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृतियां भी जारी की गईं - इनमें मुख्यतः लोक निर्माण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास विभाग व लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग शामिल है. उम्मीद जताई जा रही है कि इस कर्ज से राज्य में विकास कार्यों को गति मिलेगी. हाल में ही प्रदेश में 6 हजार करोड़ रुपए की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृतियां भी जारी की गईं हैं।