
मध्य प्रदेश में आरक्षित लोक सभा सीटों पर कम वोटिंग का गणित.
प्रदेश की राजनीति आदिवासियों के ईद-गिर्द घूमती रही है। भाजपा हो या कांग्रेस, ये खुद की नैया पार लगाने के लिए आदिवासी वोटरों को लुभाते आए हैं। लोकसभा चुनाव में भी यही हुआ।
प्रदेश की 47 आरक्षित विधानसभा सीटों में से जुन्नारदेव व आलीराजपुर में ही पिछले लोकसभा के मुकाबले अधिक वोटिंग हुई। बाकी की 45 सीटों पर कम वोट पड़े। वहीं 6 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव 2023 में वोटिंग का रिकार्ड 4 विधानसभा सीटें पानसेमल, जोबट, झाबुआ और बड़वानी में ही टूट पाया। बाकी 43 सीटों पर 1 से लेकर 17 फीसद तक कम वोटिंग के रेकॉर्ड बने। जंगलों में महुआ नहीं था, तेंदूपत्ता की खरीदी भी बंद, तब भी कम वोटिंग ने चिंता बढ़ा दी है।
मध्य प्रदेश में अब भाजपा और कांग्रेस आंकलन बैठाने में जुटे हैं कि आदिवासियों द्वारा कम वोटिंग से किसको फायदा और किसको नुकसान होगा। विवाह का सीजन अब जोर पकड़ रहा है और महुआ कम आया था, तेंदूपत्ता की खरीदी शुरू नहीं हुई थी ऐसे में आदिवासी वोटरों की खामोशी किसको भारी पड़ेगी, यह 4 जून को रिजल्ट के साथ ही पता चलेगी। इन वोटरों ने कम वोटिंग कर एक तरह से दलों को चेताया है।
अंतर
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विस सीट 2019 2023 2024 2019 2023
Updated on:
18 May 2024 04:13 pm
Published on:
18 May 2024 04:10 pm
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