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ये क्या? कमलनाथ के मंत्री शिवराज नहीं अपने ही कार्यकाल की कराएंगे जांच, फाइल पर भी किया साइन

उमंग सिंघार को अपनी ही चिट्ठी पर देनी पड़ी सफाई

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भोपाल/ पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान को घेरने के चक्कर में कमलनाथ सरकार के मंत्री उमंग सिंघार खुद ही फंस गए हैं। शिवराज सिंह के शासनकाल में नर्मदा किनारे लगाए गए पौधों की जांच वन मंत्री उमंग सिंघार ने ईओडब्ल्यू से करवाने का फैसला किया है। इसके लिए उन्होंने पत्र भी जारी किया, जिसमें मंत्री जी बड़ी चूक हो गई है। उस चूक की वजह से उन्होंने यह आदेश अपने ही कार्यकाल के दौरान की जांच के आदेश दे दिए।

वन मंत्री उमंग सिंघार की यह चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। जिसमें मंत्री की बड़ी चूक सामने आई है। उन्होंने जो पत्र जारी किया है, उसके अनुसार उसमें लिखा है कि नर्मदा कछार में 2 जुलाई 2019 को वन विभाग द्वारा रोपित पौधों की फरवरी 2019 में स्थलवार जांच की गई। जिसमें यह बात सामने आई कि उस वक्त 15626 पौधे रोपित किए गए 11140 पौधे जीवित पाए गए। ऐसे कई लोकेशन हैं, जहां पौधे नहीं मिले हैं।

यहां हो गई चूक
दरअसल, 18 दिसंबर 2018 को मध्यप्रदेश में कमलनाथ की सरकार बन गई थी। लेकिन उमंग सिंघार ने जो पत्र जारी किया है, उसमें तारीख 2 जुलाई 2019 अंकित है। ऐसे में मंत्री जी के विभाग से बड़ी चूक हो गई। क्योंकि 2 जुलाई 2019 को वन विभाग के मंत्री तो उमंग सिंघार ही थे। ऐसे में मंत्री जी ने अपने ही विभाग के कामों की जांच के लिए पत्र जारी कर दिया। इस पत्र में मंत्री उमंग सिंघार के साइन भी हैं।

चूक पर दी सफाई
वहीं, जब चिट्ठी वायरल हो गई और मंत्री उमंग सिंघार ने इस मसले पर सफाई भी दी है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है कि टाइपिंग भूल सुधारी जा सकती है। प्रदेश की जनता की मेहनत की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग नहीं होने दूंगा। मां नर्मदा के किनारे 7 करोड़ पौधों का रोपण प्रदेश का एक बड़ा सुनियोजित आर्थिक घोटाला है। मैं लक्ष्य से भटकता नहीं हूं।

क्या है मामला
दरअसल, शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में नर्मदा किनारे 2 जुलाई 2017 को छह करोड़ पौधे लगाए गए। मंत्री का आरोप है कि 20 रुपये वाले पौधे को 200 रुपये से ज्यादा कीमत पर खरीदा गया। मंत्री सिंघार ने कहा था कि इसमें 450 करोड़ का आर्थिक घोटाला हुआ है। उन्होंने कहा था कि इस घोटाले में जो भी दोषी पाए जाएंगे उन पर कार्रवाई कर बख्शा नहीं जाएगा।