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भोपाल एम्स की बड़ी सफलता, कैंसर से जूझ रही महिला को बिना छाती खोले लगा दी नई ‘आहार नली’

MP News: आहार नली के लास्ट स्टेज कैंसर के लिए दर-दर भटकते रहे परिजन, जिंदगी और मौत से लड़ रही महिला को एम्स भोपाल में मिला नया जीवन...

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पत्रिका. भोपाल एम्स में बिना छाती, पेट और गला खोले एसोफैगस सर्जरी करते एक्सपर्ट्स। (फोटो: पत्रिका)

MP News: अक्सर हम सुनते आए हैं कि कैंसर शुरुआत में ही पता चल जाए, तो उसका इलाज आसान हो जाता है, लेकिन लास्ट स्टेज पर जिंदगी बचाना मुश्किल होता है। लेकिन भोपाल एम्स के डॉक्टर्स ने इसे मिथ साबित कर दिया है। उन्होंने एक ऐसी महिला को नया जीवन दिया है, जो आहार नली के कैंसर (Esophagus Cancer) की लास्ट स्टेज पर थी। जब हर जगह से उम्मीद टूटी तो, परिजन उसे एम्स (AIIMS Bhopal) लेकर पहुंच गए। एम्स के डॉक्टर्स ने मरीज की गंभीर हालत देखते हुए रिस्क ली और निजी अस्पतालों में 9 लाख रुपए का इलाज महज 5000 रुपए में कर दिया। अब डॉक्टर्स का दावा है कि जिस तरह महिला की एसोफैगस सर्जरी की गई है, वह मध्यप्रदेश में अपनी तरह की पहली सफल सर्जरी है।

यहां पढ़ें पूरा केस

45 वर्षीय एक महिला को खाना निगलने में परेशानी हो रही थी। शुरुआत में डॉक्टर्स ने इसे सामान्य गैस्ट्रिक प्रॉब्लम समझा। लेकिन जांच में आहार नली के निचले हिस्से में थर्ड स्टेज स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा ट्यूमर मिला। उसका पानी की एक बूंद तक निगलना मुश्किल हो रहा था। एसोफैगस (आहार नली) के एंड स्टेज कैंसर ने उसे घेर लिया था। खाना निगलना तो दूर वह पानी की एक बूंद नहीं पी पा रही थी। निजी अस्पतालों के चक्कर काट रहे परिजनों को डॉक्टर्स बताया कि महिला की हालत गंभीर है और उन्हें उसे दिल्ली-मुंबई ले जाना चाहिए। वहीं इलाज संभव हो सकता है। लेकिन इलाज में आने वाला 9 लाख रुपए का खर्च सुनकर उनकी रही-सही हिम्मत भी टूट गई।

ऑन्कोलॉजी सर्जरी विभाग ने चुनौती मानकर शुरू किया इलाज

इसी बीच भोपाल एम्स भोपाल जाना महिला के जीवन के लिए वरदान साबित हुआ। यहां ऑन्कोलॉजी सर्जरी विभाग की टीम ने ठान लिया कि वे महिला का इलाज करेंगे। उसके इलाज को एक चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए, पहले सर्जरी की प्लानिंग की गई और चमत्कार कर दिखाया। बिना छाती खोले लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से महिला की आहार नली का नया रास्ता बना दिया। अब डॉक्टर्स का दावा है कि अपनी तरह की ये सफल सर्जरी मध्यप्रदेश में पहली बार की गई है। उनका कहना है कि एमपी में ये पहली सफल लेप्रोस्कोपिक 'एसोफैगस सर्जरी' है।

जानें कैसे हुई सर्जरी

करीब 8 घंटे चली सर्जरी में एम्स के डॉक्टर्स ने महिला की आहार नली को पूरी तरह से हटा दिया और पेट से नया ट्यूब बनाकर छाती तक पहुंचाया। आमतौर पर इस तरह की सर्जरी करने के लिए छाती, गर्दन और पेट तीनों को खोलना पड़ता है। लेकिन इस बार सिर्फ छोटे-छोटे चीरे लगाकर डॉक्टर्स ने सफल सर्जरी कर दी। अब महिला सामान्य तरीके से तरल पदार्थ ले पा रही हैं और उसकी रिकवरी भी उम्मीद से बेहतर है।

AIIMS Bhopal के चमत्कार से मरीजों को बड़ी राहत

  • ऐसे मामलों के लिए मरीजों को दिल्ली, मुंबई या चेन्नई जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था।
  • लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद रिस्क बहुत ज्यादा रहती थी कि मरीज बच भी पाएगा या नहीं।
  • अब भोपाल एम्स में अत्याधुनिक तकनीक से एसोफैगस कैंसर के इलाज की सुविधा उपलब्ध हो गई है।

इस एक्सपर्ट टीम ने की सफल सर्जरी

इस सफल सर्जरी को एम्स भोपाल एम्स डायरेक्टर प्रो. माधवानंद के नेतृत्व में किया गया। चार डॉक्टर्स की टीम में एचओडी सर्जिकल ऑन्कॉलॉजी डॉ. विनय कुमार, डॉ. अंकिता और चीफ एनेस्थेटिस्ट डॉ. वैशाली शामिल थे। बता दें कि डॉ. माधवानंद भारत के टॉप 10 ऑन्कोलॉजिस्ट में शुमार हैं।

मरीजों को मिली नई उम्मीद


एसोफैगस सर्जरी की ये सफलता केवल तकनीकी नहीं है, बल्कि मध्यभारत के मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण है। अब यहां के लोगों को इस सर्जरी के लिए दूसरे बड़े शहरों जैसे दिल्ली-मुंबई जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही इलाज के महंगे खर्च के कारण मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
-प्रो. माधवानंद, डायरेक्टर, एम्स, भोपाल

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