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‘लाड़ली बहना योजना’ पर दिग्विजय सिंह का सवाल, ‘क्या ये पैसा इनके मामा के घर से आता है?’

MP News: मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने लाड़ली बहना योजना को लेकर सवाल किया है कि क्या 1250 रुपए महीना में लाड़ली बहनें सरकारी अंग्रेजी स्कूलों के अभाव में महंगे प्राइवेट स्कूलों में तीन संतानों को पढ़ाकर इंजीनियर और डाक्टर बना सकती हैं?

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Digvijaya Singh

फोटो- पत्रिका फाइल

MP News: मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने लाड़ली बहना योजना को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दिग्विजय सिंह ने सरकार से पूछा कि क्या 1250 रुपए महीना में लाड़ली बहनें सरकारी अंग्रेजी स्कूलों के अभाव में महंगे प्राइवेट स्कूलों में तीन संतानों को पढ़ाकर इंजीनियर और डाक्टर बना सकती हैं? क्या बीमार पड़ने पर 1250 रुपए महीना में सरकारी अस्पताल के अभाव में महंगे प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा सकती हैं?

दरअसल, शुक्रवार को सीएम डॉ मोहन यादव पेटलावद से 1.26 करोड़ लाड़ली बहनों के खाते में 1250 सौ रुपए ट्रांसफर किए थे। उसी को लेकर पूर्व सीएम ने शनिवार को अपनी प्रतिक्रिया दी।

जानिए क्या है पूर्व सीएम की पोस्ट

पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने लिखा कि लाडली बहनों को 1250 रुपए देकर मचाए जाने वाला शोर निम्नलिखित प्रश्न खड़े करता है। क्या ये पैसा इनके मामा के घर से आता है? क्या महंगी शिक्षा, मंहगी स्वास्थ सेवाओं, महंगे दूध और पौष्टिक आहार के वर्तमान दौर में 1250 रुपए महीना ऊंट के मुंह में जीरा नही है? क्या भागवत साहब ने लाडली बहनों को तीन संतानों को जन्म देने का आवाहन नही किया है?



क्या 1250 रुपए महीना में लाडली बहने सरकारी अंग्रेजी स्कूलों के अभाव में महंगे प्राइवेट स्कूलों में तीन संतानो को पढ़ाकर इंजीनियर और डाक्टर बना सकती हैं?


क्या बीमार पड़ने पर 1250 रुपए महीना में सरकारी अस्पताल के अभाव में महंगे प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा सकती हैं?


क्या 1250 रुपए महीना में तीन संतानों को दूध और पौष्टिक आहार देकर कुपोषण का शिकार होने से बचा सकती हैं?


क्या बिजली बिल का मासिक भुगतान कर सकती हैं?


क्या तीज त्यौहार ओर संतानों का जन्मदिन मना सकती हैं?

दिग्विजय सिंह ने पंडित नेहरू और श्रीमती इंदिरा गांधी की तरह लाडली बहनों की वयस्क संतानों, भाइयों, पति और पिता को सरकारी ओर सार्वजनिक क्षेत्रो के संस्थानों में अच्छे वेतनमान और सुरक्षित भविष्य की नौकरियां देकर आत्मनिर्भर बनाएं। उन्होंने अपने पोस्ट के अंत में हैशटैग के पहले 'सुशील सिंह, अंजना सिंह जबलपुर' भी लिखा है।