
MP News: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके रिटायरमेंट प्लान पर सफाई दी है। जिसमें उन्होंने कहा कि मैनें एक कपल का वीडियो शेयर किया था। जो कि बैंक से रिटायर होकर एक कार से पूरा भारत घूमने के लिए निकले थे। वह वीडियो मजकिया लहजे में शेयर किया गया था।
दिग्विजय सिंह ने रिटायरमेंट को लेकर कहा कि ये हल्ला तो होता ही रहता है। सीधी सी बता है मैंने मेरी पार्टी के अनुरोध किया कि मुझे राज्यसभा थर्ड टर्म नहीं लेना चाह रहा हूं, लेकिन इस मतलब ये नहीं है कि मैं कांग्रेस के लिए काम नहीं करूंगा। पार्टी का काम तो जीवन की आखिरी सांस तक करेंगे, लेकिन पार्टी कहां मुझे कह सकती है ये पार्टी नेतृत्व पर निर्भर करता है।
इसी बीच जब राज्यसभा जाने को लेकर दिग्विजय सिंह से प्रश्न किया गया तो उन्होंने कहा कि ये बहुत ही काल्पनिक प्रश्न है। इसका उत्तर नहीं दिया जा सकता।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती की कीमत तीन गुना है। क्या कारण है कि राज्य सरकार को इतने सालों से जीआई नहीं मिल पा रहा है। यूपीए सरकार ने जीआई टैग देना शुरू किया था। भाजपा सरकार आने के बाद हमारी सरकार में दिए जीआई टैग को निरस्त कर दिया गया था। मैं आज तक नहीं समझ पा रहा हूं कि हमारा इंटरनेशनल मार्केट में पाकिस्चान से कॉम्पिटीशन है, लेकिन पाकिस्तान ने कुछ सालों में कई जगह जीआई टैग दे दिए। हम 13 जिलों में जीआई टैग नहीं दिला पा रहे हैं।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि तीन महीने पहले पत्र लिखा था। उसमें केन्द्र और राज्य सरकार ने किसानों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। संसद के शीतकालीन सत्र में भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था और मध्यप्रदेश के बासमती उत्पादक किसानों को जीआई टैग नहीं मिलने से हो रही आर्थिक क्षति और अन्याय की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया था।
प्रदेश के ग्वालियर-चंबल अंचल से लेकर मालवा और महाकौशल क्षेत्र तक लगभग 14 जिलों- श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, गुना, विदिशा, रायसेन, सीहोर, हरदा, होशंगाबाद, नरसिंहपुर और जबलपुर में हजारों किसानों ने उच्च क्वालिटी वाले सुंगाधित बासमती चावल का उत्पादन कर रहे हैं। इसके बावजूद जीआई टैग नहीं मिलने के कारण किसानों को अपने उत्पाद का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।
आगे दिग्विजय सिंह ने कहा कि राज्य के किसान पिछले दो दशकों से इन जिलों के बासमती चावल को जीआई टैग देने की मांग कर रहे हैं। साल 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार ने बासमती चावल को जीआई टैग प्रदान किया था, लेकिन साल 2026 में केंद्र सरकार के द्वारा इसे वापस ले लिया गया। अभी पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, हरियाणा और दिल्ली से बासमती चावल को जीआई टैग मिला हुआ है, जबकि मध्य प्रदेश के किसान इससे वंचित हैं।
Published on:
08 Mar 2026 06:11 pm
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