
MP News (फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)
MP News: छत्तीसगढ़ में 2100 करोड़ के शराब घोटाले में आरोपी रहीं दो फर्म पर मध्यप्रदेश में अफसरों की कृपा बरस रही है। जिन दो फर्म प्राइम वन वर्क फोर्स व ईगल हंटर सॉल्यूशन कंपनी पर नकली होलोग्राम बनाकर शराब सप्लाई करने में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोपी बनाया। उन्हीं दोनों फर्म को पहले प्रदेश में बिजली विभाग ने मैन पावर सप्लाई करने का ठेका दिया। अब नगरीय विकास विभाग दोनों दागी कंपनियों में से प्राइम वन वर्क फोर्स को इंदौर नगर निगम में मैन पावर सप्लाई करने का ठेका देने जा रहा है।
कंपनी ने विभाग की तकनीकी और वित्तीय बिड क्वालीफाई ली है। अब वर्क ऑर्डर जारी करने की तैयारी है। नगरीय विकास विभाग 60 करोड़ से मैन पावर सप्लाई का ठेका 5 कंपनियों को देने जा रहा है। इसमें प्राइम वन वर्क फोर्स भी है। खास यह है कि 2014 में छग में दोनों कंपनियों पर ईडी ने केस दर्ज किया, उसी साल एमपी में बिजली विभाग ने कंपनियों को ठेका दिया। पत्रिका की पड़ताल में पोल खुली तो जिम्मेदारों को जवाब नहीं सूझ रहा।
दोनों दागी कंपनियों को मप्र में मैन पावर सप्लाई करने का ठेका देने का मामला विधानसभा तक पहुंचा। कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने सदन में प्रश्न लगाकर ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर से दोनों कंपनियों को बिजली कंपनी में 300 करोड़ का टेंडर देने पर सवाल पूछा है। उन्होंने सवाल उठाया कि मप्र विद्युत वितरण कंपनी इंदौर सर्किल, देवास, धार एंव मंदसौर सर्किल के अधीक्षण अभियंता टेंडर कमेटी एवं मुख्य अभियंता उज्जैन एवं इंदौर द्वारा मैनपावर एंव आउटसोर्स के टेंडर में भ्रष्टाचार एवं अपात्र कंपनियों को टेंडर दिए गए हैं।
दागी कंपनी (Accused Company)प्राइम वन और ईगल इंटर का मायाजाल 2024 में ही बिजली विभाग में फैला। विभाग ने दोनों कंपनियों को यहां 300 करोड़ से मैन पावर सप्लाई करने का काम सौंप दिया। प्राइम वन बिजली विभाग की तीनों कंपनियों में भी मैन पावर सप्लाई कर रही है। मध्यक्षेत्र में भोपाल और गुना, पूर्व क्षेत्र में जबलपुर, सतना, कटनी और छतरपुर में प्राइम वन अकेले मानव बल सप्लाई कर रही है। वहीं, पश्चिम क्षेत्र में धार, देवास, इंदौर और मंदसौर में ईगल हंटर के साथ मिलकर प्राइम वन मैन पावर सप्लाई कर रही है।
प्रदेश में विभाग दागी फर्मों को लेकर अलग- अलग कायदे (rules in electricity department) चला रहे है। बिजली विभाग में टेंडर शर्तों में साफ है कि कंपनी पर एफआइआर या केस लंबित है तो टेंडर नहीं दिया जाएगा। इसके बाद भी बिजली विभाग के अफसरों ने 2024 में दोनों कंपनियों को टेंडर दे दिए।
अब इंदौर नगर निगम में एफआइआर वाले क्लॉज को अलग कर लाभ पहुंचाने की तैयारी है। नगर निगम में कंपलसरी वर्क एक्सपीरियंस की शर्त अलग से जोड़कर नई कंपनियों को टेंडर लेने से रोका तो दागी कंपनियों की राह खोल दी।
छत्तीसगढ़ ईओडब्ल्यू ने जनवरी 2024 में प्राइम वन और ईगल हंटर के खिलाफ एफआइआर दर्ज की। एफआइआर के मुताबिक प्राइम वन वर्क फोर्स सिंडीकेट का हिस्सा है। उसने फर्जी होलोग्राम बनाकर अवैध शराब सप्लाई कर छत्तीसगढ़ सरकार को नुकसान पहुंचाया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है।
Q: शराब घोटाले में फंसी फर्म प्राइम वन वर्क फोर्स की जांच ईडी कर रही है। इस कंपनी को इंदौर नगर निगम में मैन पावर सप्लाई का ठेका क्यों दिया?
A- प्राइम वन वर्क को पहले ही ठेका दिया गया, नया नहीं है। ईडी जांच की जानकारी नहीं है। ऐसा है तो कार्रवाई करेंगे।
Q: अपराधों में शामिल कंपनी को भी काम दिया जाता है?
A- काम देते वक्त एजेंसी से शपथ पत्र लेते हैं। इसमें पता होता है तो ठेका नहीं देते। जांच कराएंगे।
Q: जिसकी जांच ईडी के पास, उसे ठेका देना उचित है?
A- किसी भी डिफॉल्टर एजेंसी को निगम काम नहीं देता। यदि एजेंसी पर देश-प्रदेश-जिले में कहीं केस है और एजेंसी से ऐसी कोई चिट्ठी मिलती है तो कार्रवाई होगी।
-शिवम वर्मा, कमिश्नर, नगर-निगम इंदौर
तबीयत खराब है। अभी अस्पताल में भर्ती हूं। जिस कंपनी की जानकारी आप चाह रहे हैं, उसके बारे में फिलहाल मुझे जानकारी नहीं है। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद ही कुछ बता सकूंगा।
- प्रद्युम्न सिंह तोमर, ऊर्जा मंत्री
Published on:
01 Aug 2025 10:32 am
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