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केंद्र सरकार का बड़ा प्रयोग, नए सत्र से बदलेगा MP का शिक्षा ढांचा…

एक ही छत के नीचे होगी पहली से 12वीं तक की पढ़ाई। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने लिखा पत्र।

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भोपाल। नए शिक्षा सत्र से सर्व शिक्षा अभियान और माध्यमिक शिक्षा मिशन एक साथ चलेंगे। इसके तहत मध्यप्रदेश सहित सभी राज्यों में शिक्षा व्यवस्था का ढांचा बदल जाएगा। नए फार्मूले में पहली से 12वींं तक की शिक्षा एक छत के नीचे आ जाएगी।

अभी पहली से आठवीं तक की शिक्षा सर्वशिक्षा अभियान के तहत राज्य शिक्षा केंद्र से संचालित होती है, जबकि 9वीं से 12वीं तक की शिक्षा माध्यमिक शिक्षा मिशन के तहत लोकशिक्षण संचालनालय से चलती है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव अनिल स्वरूप ने मुख्य सचिव बीपी सिंह सहित सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को 16 नवंबर को पत्र लिखा है। इसमें नए सत्र से नई व्यवस्था को लागू करने के लिए कहा है।

बजट का अंतर होगा खत्म : अभी तक बजट को लेकर भी सर्वशिक्षा और माध्यमिक शिक्षा मिशन में बेहद अंतर रहा है। सर्वशिक्षा के तहत पहली से आठवीं तक औसत चार से पांच हजार करोड़ मिलते रहे हैं, जबकि माध्यमिक शिक्षा मिशन आने के पहले तक चार से पांच सौ करोड़ में ही नौंवी से बारहवीं तक की शिक्षा सिमटी रही। शिक्षा मिशन आने के बाद भी नौवंी से बारहवीं तक की शिक्षा प्राथमिक शिक्षा की तुलना में तंगहाल रही। अब यह अंतर खत्म हो जाएगा।

विजन मोदी 2024 ...
देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए केंद्र के स्तर पर बड़े फेरबदल करना तय किए गए हैं। इसके तहत पीएम नरेंद्र मोदी के साथ सितंबर-२०१७ में इस पर मानव संसाधन मंत्रालय के अफसरों की बैठक हुई थी। इसके बाद विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया। इसमें विजन २०२४ को फोकस करके बदलाव करना तय किया गया। इसमें देश की शिक्षा व्यवस्था को अंतर्राष्ट्रीय स्तर की करके गुणवत्ता सुधार करने का लक्ष्य बताया गया है।

इसलिए पड़ी जरूरत
- सर्वशिक्षा को लागू हुए 17 साल हो गए। इसे खत्म करना पड़ता।
- पहली से बारहवीं तक यूनिफार्म शिक्षा करने की कोशिश।
- अलग-अलग संचालन से दो जगह खर्च। अब प्रशासनिक खर्च बचेगा।
- ज्यादातर देशों में यूनिफार्म एजुकेशन सिस्टम। अब उसे ही अपनाया।
- माध्यमिक शिक्षा मिशन के बेहतर परिणाम नहीं। इसलिए सर्वशिक्षा से जोड़ा।

Facts:

1.35 लाख - मध्यप्रदेश में कुल स्कूलों की संख्या

1.20 करोड़ - मध्यप्रदेश में कुल स्कूली बच्चों की संख्या

80,0000- पहली से 8वीं तक के स्कूल
55,000- नौंवी से बारहवीं तक के स्कूल

(नोट : स्कूल निजी और सरकारी दोनों शामिल है)

यह है नया फॉर्मूला-
दे शभर में सर्वशिक्षा अभियान 2000-2001 में लागू हुआ था। इसके बाद 2009-2010 में माध्यमिक शिक्षा मिशन लागू हुआ। अभी दोनों के अलग आयुक्त हैं। नई व्यवस्था में एक ही आयुक्त या एमडी होगा। प्रशासनिक, वित्तीय और नियंत्रण अधिकार एक ही जगह हो जाएंगे।

यह प्रस्ताव मेरी जानकारी में आया है। अभी इसका अध्ययन नहीं किया है। अफसरों से चर्चा के बाद ही कुछ कह पाऊंगा।
- विजय शाह, स्कूल शिक्षा मंत्री

यह अच्छा कदम है। इससे दो जगह संचालन का खर्च बचेगा। गुणवत्ता और मानीटरिंग पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
- प्रो. देवेंद्र कैथवास, शिक्षाविद्