
मप्र के रंगकर्मियों का अपना घर होगा एमपीएसडी
भोपाल। हम जल्द ही भोपाल के रंगकर्मियों को मप्र नाट्य विद्यालय में स्टूडेंंट्स के साथ इंट्रैक्शन के लिए आमंत्रित करेंगे। इसके बाद हर महीने किसी भी वीकेंड रंगकमिर्यों को चर्चा के लिए आमंत्रित करेंगे। मप्र नाट्य विद्यालय (एमपीएसडी) मप्र के रंगकर्मियों का अपना घर होगा। नाट्य विद्यालय को लेकर मेरी जो प्लानिंग है वो आप सभी को तीन महीने के अंदर दिख जाएंगी।
मैं आपका होकर रहूंगा और आप मेरे होकर रहें तभी यह नाट्य विद्यालय चलेगा। मप्र नाट्य विद्यालय के नवनियुक्त डायरेक्टर आलोक चटर्जी रविवार को कुछ इस अंदाज में स्थानीय रंगकर्मियों से रूबरू हुए।
वरिष्ठ रंगकर्मी आलोक चटर्जी के मप्र नाट्य विद्यालय के निदेशक बनने पर भोपाल आर्टिस्ट वेलफेयर व स्थानीय रंगकर्मियों की ओर से रविवार शाम नर्मदा मंदिर सभागार में में अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान केजी त्रिवेदी, अशोक बुलानी, अखिलेश वर्मा, सरफराज हसन, राजीव सिंह, अंश पायन सिन्हा समेत कई अन्य रंगकर्मियों ने आलोक चटर्जी का अभिनंदन किया।
शुरुआती तीन नाटकों में किया था सिर्फ क्राउड का रोल
इस दौरान आलोक चटर्जी ने कहा कि मैंने राजीव वर्मा, अशोक बुलानी, उदय शहाणे, पापिया जी को देखकर मैंने अभिनय सीखा है। जब मैं पहली बार भारत भवन के रंगमंडल में आया तो सबसे जूनियर था जिसने चार नाटकों में काम किया था।
इनमें भी तीन नाटकों में मैं क्राउड में था जबकि एक नाटक में मेरा एक रोल था। जब मेरा सलेक्शन होना था उस वक्त मेरे अलावा १४ और एनएसडी वाले थे, मेरा सलेक्शन हुआ लेकिन उन १४ का नहीं हुआ। कारंत साहब ने बाद में बोला कि मैंने सोचा, बंगाली है, कुछ नया करेगा। बाकी एनएसडी के आर्टिस्ट को तो मैं जानता हूं। वो अपनी रोटी कमा सकते हैं और जो यह जानता ही नहीं कि प्रोफेशन क्या है उसे प्रोफेशनल बनाने के लिए कारंत मप्र आया है।
मैंने अलखनंदन जी से सीखा रंग अनुशासन
आलोक चटर्जी ने कहा कि जबलपुर में मुझे अलखनंदन जी मिले, मैं उन्हें अपना पहला नाट्य गुरु मानता हूं। वो शख्स कभी एनएसडी नहीं गया, वो खुद में एक संस्थान थे। मैंने उनसे रंग अनुशासन सीखा। मुझे सब कुछ भोपाल के लिए मिला। मैं एनएसडी से लौटकर इसलिए नहीं आया कि मेरे पास कोई मौका नहीं था। मेरे पास मौके ही मौके थे लेकिन मैंने यश चोपड़ा, चंद्रप्रकाश द्विवेदी जैसे लोगों के ऑफर इसलिए छोड़ दिए क्योंकि मुझे चंद्रगुप्त का शो करने जाना था।
Published on:
15 Oct 2018 04:26 pm
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