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बड़े नगर निगम छोट शहरों में लगाएंगे पॉवर प्लांट, भारी बिजली बिलों से मिलेगी मुक्ति

नीमच में 123.5 एकड़ पर सोलर ब विंड एनर्जी प्लांट स्थापित कर रहा भोपाल, मध्य प्रदेश के साथ असम व उडीसा में भी प्रयोग

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भोपाल. भोपाल-इंदौर जैसे बड़े नगर निगम अपने 10 से 15 करोड़ रुपए प्रतिमाह के बिजली बिल का तोड़ नीमच, रतलाम, मंदसौर जैसे छोटे शहरों में तलाश रहे हैं। सरकारी मदद से ये छोटे शहरों के गांवों, पहाड़ों और खुले-बंजर मैदानों में सोलर व विंड एनर्जी प्लांट स्थापित कर रहे हैं।

भोपाल तो 400 किमी दूर नीमच में इसके लिए 123.5 एकड़ जमीन पर अपने लिए सोलर ब विंड एनर्जी प्लांट के प्रोजेक्ट पर काफी काम कर चुका है। अगले कुछ दिनों में यहां जमीनी काम भी शुरू करवा दिया जाएगा। ये 20 मेगावाट का प्रोजेक्ट है। यह देख अब शासन की मदद से इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और इसी तरह के आठ बड़े नगर निगम भी अपने बिजली बिल कम करने की राह छोटे शहरों में तलाश रहे। इसके लिए शहरी आवास एवं विकास विभाग एक समग्र कार्ययोजना तैयार कर रहा है।

इस समय भोपाल नगर निगम को ही प्रतिमाह 12 करोड़ रुपए तक का बिजली बिल मिलता है। स्ट्रीट लाइट से लेकर जलापूर्ति प्रोजेक्ट, सीवेज ट्रीटमेंट व इसी तरह के अन्य प्रोजेक्ट में बिजली का उपयोग होता है। भोपाल नगर निगम पर इस समय बिजली कंपनी का करीब 100 करोड़ रुपए बकाया है। यह जमा नहीं करने से बिजली कंपनी बीते तीन माह में पांच बार नगर निगम के अलग-अलग बिजली कनेक्शन काट चुकी है। यही स्थिति अन्य बड़े नगरीय निकायों की भी है।

सोलर एनर्जी व विंड एनर्जी के वाली योजनाओं के तहत केंद्र सरकार ने स्‍लीन एनर्जी फॉर लिए बड़े शहरों के पास अधिक जमीन नहीं होती है। यहां जमीन का मूल्य भी अधिक होता है। वहीं छोटे शहरों के आसपास ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी जमीन काफी होती है| केंद्र व राज्य की ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने वाली योजनाओं के तहत प्रोजेक्ट बनाकर जमीन रूरल प्रोडेक्टिव यूजेस नाम से आवंटित कराना आसान होता है।

जितनी बिजली इन शहरों में संबंधित निकाय के प्रोजेक्ट बनाएंगे, उतनी बिजली के बिल में छूट निकायों को बिजली कंपनी से मिलेगी। केंद्र सरकार ने स्‍लीन एनर्जी फॉर रूरल प्रोडेक्टिव यूजेस नाम से योजना बनाई है। इसके तहत निकाय ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के प्रोजेक्ट लगाते हैं तो उन्हें मदद मिलेग। मप्र के साथ असम और उडीसा के निकाय इसमें जमीनी काम कर रहे हैं।